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Explainer: चंडीपुरा वायरस क्या है? फिर से क्यों बन रहा है चिंता का कारण, हर माता-पिता को इसके बारे में पता होना चाहिए?

कई आम वायरल बीमारियों के उलट, चंडीपुरा वायरस के लिए अभी कोई खास एंटीवायरल इलाज या वैक्सीन मौजूद नहीं है. इसलिए, बीमारी की शुरुआती पहचान और तुरंत मेडिकल देखभाल ही वे सबसे अहम बातें हैं जिनसे बचने की संभावना बढ़ सकती है.

Explainer: चंडीपुरा वायरस क्या है? फिर से क्यों बन रहा है चिंता का कारण, हर माता-पिता को इसके बारे में पता होना चाहिए?
क्या हैं चंडीपुरा वायरस?
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आम तौर पर, बच्चे को बुखार होने पर माता-पिता उसे आराम, फ्यूइड्स और दवाओं से ठीक कर लेते हैं. लेकिन कभी-कभी ऐसी कंडीशन भी आ जाती है जब बुखार सिर्फ कोई आम मौसमी बीमारी नहीं रह जाता है. चंडीपुरा वायरस (CHPV) इसका ही एक उदाहरण है. हाल ही में गुजरात के जामनगर में संदिग्ध चांदीपुरा वायरस का एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है. शहर के दिग्जाम सर्कल क्षेत्र के रहने वाले एक दो वर्षीय मासूम बच्चे की सरकारी जी.जी. अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू में इलाज के दौरान मौत हो गई है. 

जिसके बाद एक बार फिर से इस कम जाने-पहचाने वायरस की ओर सबका ध्यान खींचा है. हालांकि यह आम नहीं है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इस पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि यह बहुत तेजी से दिमाग पर असर डाल सकता है, खासकर बच्चों में. कई मामलों में, जो लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे लगते हैं, वे सिर्फ दो-तीन दिनों में ही जानलेवा हो सकते हैं.

कई आम वायरल बीमारियों के उलट, चंडीपुरा वायरस के लिए अभी कोई खास एंटीवायरल इलाज या वैक्सीन मौजूद नहीं है. इसलिए, बीमारी की शुरुआती पहचान और तुरंत मेडिकल देखभाल ही वे सबसे अहम बातें हैं जिनसे बचने की संभावना बढ़ सकती है.

नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के अनुसार, भारत में पिछले कुछ सालों में चंडीपुरा वायरस के कारण समय-समय पर बीमारी फैलती रही है, खासकर मॉनसून के महीनों में, जब इस वायरस को फैलाने वाले कीड़े ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं.

एक रेयर वायरस जो बहुत तेजी से गंभीर रूप ले सकता है (A rare virus that can become serious very quickly)

हालांकि यह संक्रमण दुर्लभ है, फिर भी परिवारों को इसके चेतावनी लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए. हालांकि चंदीपुरा वायरस से होने वाला संक्रमण अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन यह बीमारी शरीर में बहुत तेजी से फैलती है, इसलिए जितनी जल्दी हो सके इसका इलाज करवाना बेहद जरूरी है.

चंडीपुरा वायरस रैब्डोविरिडे (Rhabdoviridae) परिवार का सदस्य है, वही वायरस परिवार जिसमें रेबीज भी आता है. हालांकि इससे होने वाली बीमारी अलग होती है. यह मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई (sandflies) के काटने से फैलता है. इसके ज्यादातर मामले वेस्टर्न और सेंट्रल इंडिया में, खासकर बारिश के मौसम में सामने आए हैं.

बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा क्यों? ( Why children are the most vulnerable)

चंडीपुरा वायरस की सबसे चिंताजनक बातों में से एक है इसकी तेजी, जिससे यह दिमाग पर हमला कर सकता है. यह बीमारी आमतौर पर अचानक तेज बुखार, तेज सिरदर्द, जी मिचलाने और थकान के साथ शुरू होती है. यह बीमारी तेजी से दिमाग तक फैल सकती है, जिससे उल्टी, बेचैनी, दौरे पड़ना और बेहोशी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं. अगर तुरंत इलाज न मिले, तो मरीज कोमा में जा सकता है और उसकी मौत भी हो सकती है. कभी-कभी लक्षण दिखने के 48 से 72 घंटों के भीतर ही ऐसा हो सकता है.

15 साल से कम उम्र के बच्चों को सबसे ज्यादा जोखिम वाला माना जाता है. उनके इम्यून सिस्टम और डेवलप हो रहे नर्वस सिस्टम की वजह से उन्हें गंभीर बीमारी होने का खतरा ज्यादा हो सकता है. एक बात जिसका हर पेरेंट्स को ध्यान रखना चाहिए वो ये है कि बच्चे को तेज बुखार के साथ उल्टी या कोई असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए.

बचपन में होने वाले कई संक्रमणों से बुखार आता है. चंडीपुरा वायरस की खास बात यह है कि इसमें न्यूरोलॉजिकल लक्षण बहुत तेजी से दिखाई दे सकते हैं. जो बच्चा सुबह थका हुआ लग रहा था, वह कुछ ही घंटों में कन्फ्यूज हो सकता है, बहुत ज्यादा नींद आ सकती है या फिर कुछ केस में बच्चों को दौरे भी पड़ सकते हैं. 

इन लक्षणों को कभी न करें इग्नोर (The symptoms that should never be ignored)

डॉक्टर अक्सर कहते हैं कि सही समय पर इलाज बहुत मायने रखता है. इसलिए अगर आपको अपने बच्चे में कुछ भी ऐसे लक्षण दिखाई दें तो माता-पिता को तुरंत ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

  • अचानक 101°F से ज्यादा तेज बुखार, खासकर रात के समय
  • बार-बार उल्टी या दस्त होना
  • दौरे पड़ना
  • व्यवहार में बदलाव
  • उलझन या भ्रम की स्थिति
  • सतर्कता कम होना या बेहोश हो जाना

इन लक्षणों का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि बच्चे को चंडीपुरा वायरस है. हालाँकि, ये लक्षण दिमाग में सूजन का संकेत हो सकते हैं, जो हमेशा एक मेडिकल इमरजेंसी होती है.

अस्पताल में तुरंत इलाज मिलने से डॉक्टर सही इलाज दे पाते हैं, दिमाग और दूसरे अंगों की निगरानी कर पाते हैं, और किसी भी तरह की गंभीर कंडीशन को पहले से ही संभाल पाते हैं. 

सही समय पर इलाज ही बचाव

अभी तक इसका कोई खास इलाज नहीं है, इसलिए बचाव और भी जरूरी हो जाता है. कुछ वायरल संक्रमणों के विपरीत, जिनके लिए टीके या एंटीवायरल दवाएं मौजूद हैं, चंडीपुरा वायरस के लिए अभी इनमें से कुछ भी उपलब्ध नहीं है. इसलिए इससे बचाव ही सबसे जरूरी उपाय है. मरीज की जान बचाने के लिए अस्पताल में शुरुआती सपोर्टिव केयर बहुत जरूरी है. इस बीमारी में डेथ रेट बहुत ज्यादा होता है. सामने आए मामलों में ये रेट 56% से 75% के बीच रही है. यही वजह है कि डॉक्टर लक्षणों के अपने-आप ठीक होने का इंतजार करने के बजाय, जल्द से जल्द अस्पताल में इलाज कराने पर जोर देते हैं.

मानसून के दौरान सावधानियां बरतने से खतरे को कम किया जा सकता है ( Simple precautions can lower the risk during monsoon)

क्योंकि सैंडफ्लाइज वायरस फैलाती हैं, इसलिए उनके काटने से बचना जोखिम को कम करने के सबसे असरदार तरीकों में से एक है.

सैंडफ्लाई के काटने से बचाने के लिए माता-पिता को यह पक्का करना चाहिए कि उनके बच्चे पूरी आस्तीन (long-sleeved) वाले कपड़े पहनें, बच्चों के लिए सही कीड़े भगाने वाली दवा (insect repellent) का इस्तेमाल करें और जरूरत पड़ने पर उन्हें कीटनाशक लगी मच्छरदानी के नीचे सुलाएं. आस-पास की जगह को साफ रखने, कचरा हटाने, साफ-सफाई बेहतर करने और घर के पास कीड़ों के पनपने की स्थितियों को कम करने से खतरा कम हो जाएगा.

सैंडफ्लाई अक्सर घनी वेजिटेरियन, जानवरों के बाड़े, नमी वाली जगहों और खराब साफ-सफाई वाले इलाकों में पाई जाती हैं. ये मच्छरों से काफी छोटी होती हैं, इसलिए इन पर आसानी से ध्यान नहीं जाता.

सरकार की 2026 की एक लिस्ट में कर्नाटक के बागलकोट, बीदर, विजयपुरा (बीजापुर), दक्षिण कन्नड़, कलबुर्गी (गुलबर्गा), रायचूर, उत्तर कन्नड़, उडुपी और यादगीर जिलों को सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) से प्रभावित जिलों के तौर पर पहचाना गया है. इससे पता चलता है कि वहां यह कीट मौजूद है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी जिलों में चांदीपुरा वायरस सक्रिय रूप से फैल रहा है. हालांकि, एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अगर आप इन इलाकों में यात्रा कर रहे हैं या वहां रह रहे हैं, तो बचाव के उपाय करें, खासकर मॉनसून के दौरान और उसके ठीक बाद.

इस आर्टिकल में बताया गया है कि चंडीपुरा वायरस क्या है, यह कम समय में जानलेवा क्यों हो सकता है, और इसके मुख्य लक्षण, जोखिम और बचाव के उपाय क्या हैं, जिनके बारे में हर माता-पिता को पता होना चाहिए.

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अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

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