Semaglutide Price Drop: वजन घटाने और टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा सेमाग्लूटाइड इन दिनों काफी चर्चा में है. दरअसल मार्च 2026 में इसका पेटेंट खत्म होने जा रहा है, जिसके बाद कई भारतीय कंपनियां इसके सस्ते जेनेरिक वर्जन लॉन्च करेंगी, जिससे लाखों लोगों को फायदा मिल सकता है, लेकिन इसके साथ कुछ जरूरी सावधानियां भी जुड़ी हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं क्या है पूरा मामला.

सेमाग्लूटाइड क्या है?
सेमाग्लूटाइड एक ऐसी दवाई है, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल और वजन को कम करने में मदद करती है. अभी तक यह दवा काफी महंगी थी, जिससे हर कोई इसे अफोर्ड नहीं कर पाता था, लेकिन अब पेटेंट खत्म होने के बाद इसकी कीमत काफी कम होने की उम्मीद है. बता दें पहले जहां इसका महीने का खर्च लगभग 8,000 रुपए से 16,000 रुपए तक था, वहीं अब यह 3,000 रुपए से 5,000 रुपए में मिल सकती है, इससे मोटापे और डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए इलाज आसान हो सकता है.
पेटेंट खत्म होने का क्या मतलब है?
20 मार्च 2026 के बाद भारत में सेमाग्लूटाइड का पेटेंट खत्म हो जाएगा, जिसका मतलब है कि अब दूसरी फार्मा कंपनियां भी इसका जेनेरिक वर्जन बना सकेंगी. इससे न सिर्फ दवा की उपलब्धता बढ़ेगी बल्कि कीमत भी कम होगी.
सेमाग्लूटाइड के साइड इफेक्ट्स
इस दवा का असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है, शुरुआत में कुछ लोगों को हल्के साइड इफेक्ट्स महसूस हो सकते हैं, जैसे
- मतली
- उल्टी
- दस्त या कब्ज
- पेट दर्द
गंभीर साइड इफेक्ट्स किन लोगों में हो सकते हैं?
कुछ मामलों में यह दवा थोड़ी गंभीर समस्याएं भी पैदा कर सकती है, जैसे
- पैंक्रियाटाइटिस (पैंक्रियाज में सूजन)
- गॉलब्लैडर की समस्या (पथरी)
- किडनी पर असर
- लो ब्लड शुगर
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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