अफगानिस्तान में महिलाओं को जबरदस्ती बुर्का पहनाने पर तुले तालिबानी लड़ाके अब खून-खराबे पर उतर आए हैं. तालिबान ने जब महिलाओं पर बुर्का पहनने का दबाव बढ़ाने के लिए उन्हें गिरफ्तार करना शुरू किया तो यहां कि महिलाएं सड़कों पर उतर आईं. लेकिन इन प्रदर्शनकारी महिलाओं को तितर-बितर करने के लिए तालिबान ने बल प्रयोग किया और गोलीबारी भी की. संयुक्त राष्ट्र (UN) का कहना है कि इस कार्रवाई में कम से कम दो की मौत हुई और 20 घायल हुए. मरने वालों में एक मासूम बच्चा भी शामिल है.
तालिबान ने किया खून-खराबा
AFP की रिपोर्ट के अनुसार UN के एक्सपर्ट्स के एक समूह ने अफगानिस्तान के पश्चिमी शहर हेरात में महिलाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई की निंदा की है. बताया गया है कि हेरात की तालिबानी नैतिकता पुलिस (मोरैलिटी पुलिस) ने शनिवार को दर्जनों अफगानी महिलाओं को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया था. इन महिलाओं पर आरोप था कि उन्होंने पूरे शरीर को ढकने वाला बुर्का नहीं पहना था.
गुरुवार को जारी एक बयान में UNHRC द्वारा नियुक्त 10 स्वतंत्र एक्सपर्ट ने कहा कि कम से कम दो लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक लोग घायल हुए. बयान में कहा गया, “महिलाओं को ड्रेस कोड के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लेने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं. यह मनमानी और गैरकानूनी हिरासत हो सकती है, क्योंकि ऐसा लगता है कि महिलाओं को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लैंगिक भेदभाव से मुक्त रहने के अधिकार का उपयोग करने के लिए सजा दी जा रही है.”
बता दें कि अफगानिस्तान में ड्रेस कोड से जुड़े नियम सदाचार के प्रसार और बुराई की रोकथाम मंत्रालय (पीवीपीवी) द्वारा लागू किए जाते हैं. इन नियमों के अनुसार महिलाओं को घर से बाहर निकलते समय लगभग पूरा शरीर ढकना जरूरी है. हालांकि, कई महिलाएं बुर्के की बजाय ढीला अबाया, सिर ढकने वाला स्कार्फ और चेहरे को ढकने वाला कपड़ा पहनती हैं.
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