आजकल चारों तरफ एक ही चर्चा है - चुटकी में वजन घटाने वाले इंजेक्शन. हॉलीवुड से लेकर हमारे यहां के शहरों तक, ओजेंपिक (Ozempic), वेगोवी (Wegovy) और जेपबाउंड (Zepbound) जैसी दवाओं का जबर्दस्त क्रेज देखा जा रहा है. लोग सोचते हैं कि बस एक सुई लगाओ और बिना मेहनत के चर्बी गायब हो जाएगी. डायबिटीज के मरीजों के लिए तो ये दवाएं किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही थीं. लेकिन अब अमेरिका से आई एक खबर ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दर्जनों मरीजों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है. उनका आरोप है कि इन दवाओं के इस्तेमाल के बाद उनकी आंखों की रौशनी अचानक चली गई. मरीजों ने दवा बनाने वाली दिग्गज कंपनियों नोवो नॉर्डिस्क और एली लिली पर मुकदमा ठोक दिया है.
मरीजों का कहना है कि उन्हें इस भयानक खतरे के बारे में पहले से कोई चेतावनी नहीं दी गई थी. तो आखिर ये पूरा माजरा क्या है? क्या वाकई ये दवाएं आंखें छीन रही हैं या मामला कुछ और है? आइए इसे सीधी और आसान भाषा में समझते हैं.
आखिर किस बात को लेकर हुआ है मुकदमा?
अदालत में दायर याचिकाओं में मरीजों ने दावा किया है कि जीएलपी-1 (GLP-1) ग्रुप की दवाएं लेने के बाद उन्हें आंखों की एक बेहद दुर्लभ और गंभीर बीमारी हो गई.
- बीमारी का नाम है NAION (नॉन-आर्टेरिटिक एंटीरियर इस्केमिक ऑप्टिक न्यूरोपैथी).
- आम बोलचाल में कहें तो यह आंखों का एक तरह का स्ट्रोक है.
- इसमें आंख की मुख्य नस यानी ऑप्टिक नर्व तक खून की सप्लाई अचानक रुक जाती है.
- नतीजा यह होता है कि इंसान की एक आंख की रोशनी अचानक और हमेशा के लिए चली जाती है.
मरीजों का आरोप है कि कंपनियों को इस खतरे का अंदाजा था, फिर भी उन्होंने डिब्बे पर या पर्चे में सही ढंग से वॉर्निंग नहीं छापी.
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दवा कंपनियों की क्या सफाई है?
दूसरी तरफ, दवा बनाने वाली कंपनियां इन सारे आरोपों को सिरे से खारिज कर रही हैं. नोवो नॉर्डिस्क का कहना है कि वे मरीजों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हैं और ये सारे मुकदमे बेबुनियाद हैं. वहीं एली लिली ने भी साफ कहा है कि उनकी दवा जेपबाउंड और इस बीमारी के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है.
कंपनियों का तर्क है कि सिर्फ किसी के मुकदमा कर देने से यह साबित नहीं हो जाता कि दवा ही बीमारी की असली जड़ है.
रिसर्च और वैज्ञानिक क्या कह रहे हैं?
अब सवाल उठता है कि साइंस इस बारे में क्या बोलती है? क्या वैज्ञानिकों को कोई पक्का सबूत मिला है? इसका जवाब थोड़ा पेचीदा है.
- साल 2024 में करीब 3 लाख लोगों पर एक बहुत बड़ी रिसर्च की गई थी. इसमें यह देखा गया कि सेमाग्लूटाइड लेने वालों में क्या सच में आंखों की रोशनी जाने का खतरा ज्यादा है? उस समय वैज्ञानिकों को ऐसा कोई ठोस संबंध नजर नहीं आया था.
- लेकिन इसके बाद कुछ छोटी रिसर्च में यह बात सामने आई कि शायद इसका थोड़ा बहुत लिंक हो सकता है.
- साल 2026 में छपी एक बड़ी समीक्षा में 48 लाख से ज्यादा लोगों के डेटा को छाना गया. इसमें भी कोई सीधा और पक्का सबूत नहीं मिला कि ये दवाएं ही आंखों के अंधेपन की सीधी वजह हैं.
हालांकि, वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि जो सबूत अभी हमारे पास हैं, उनकी छमता बहुत कमजोर है और इस पर अभी और गहरी जांच की सख्त जरूरत है.
दुनिया भर की सरकारी एजेंसियों का क्या रुख है?
मामले की गंभीरता को देखते हुए दुनिया भर के हेल्थ रेगुलेटर्स अलर्ट पर हैं.
- अमेरिकी एजेंसी एफडीए (FDA) लगातार आ रही शिकायतों और रिपोर्टों की जांच कर रही है ताकि यह तय किया जा सके कि क्या नियमों में कोई बदलाव करने की जरूरत है.
- यूरोपीय यूनियन और ब्रिटेन की हेल्थ एजेंसियों ने माना है कि सेमाग्लूटाइड दवाओं के साथ यह बीमारी बहुत ही दुर्लभ (वेरी रेयर) साइड इफेक्ट के रूप में सामने आ सकती है.
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी साल 2025 में इसको लेकर एक मेडिकल अलर्ट जारी किया था और दवा के पर्चे में इसके बारे में जानकारी जोड़ने की सलाह दी थी.
ब्रिटेन की स्वास्थ्य एजेंसी ने तो साफ निर्देश दिए हैं कि अगर यह दवा लेने वाले किसी भी मरीज की देखने की ताकत में अचानक गिरावट आए, तो उसे बिना एक पल गंवाए तुरंत आंखों के डाक्टर को दिखाना चाहिए.
तो क्या आपको यह दवा छोड़ देनी चाहिए?
अगर आप या आपके परिवार में कोई यह दवा ले रहा है, तो डर के मारे इसे फौरन बंद करने की गलती बिल्कुल न करें.
- यह समझना बेहद जरूरी है कि टाइप 2 डायबिटीज और बहुत ज्यादा मोटापा अपने आप में जानलेवा बीमारियां हैं. ये दवाएं लाखों लोगों की शुगर और वजन कंट्रोल करने में बहुत कामयाब रही हैं.
- अगर आप अचानक दवा बंद कर देंगे, तो आपका ब्लड शुगर लेवल अचानक बहुत ऊपर भाग सकता है, जिससे दिल और गुर्दे पर फौरन आफत आ सकती है.
- यह बीमारी लाखों में से किसी एक को होने वाला बेहद दुर्लभ मामला है. हर किसी को यह खतरा नहीं होता.
मरीजों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
अगर आप ओजेंपिक, वेगोवी या इस तरह की कोई भी जीएलपी-1 दवा ले रहे हैं, तो इन बातों की गांठ बांध लें:
- अगर सुबह उठने पर या अचानक दिन में किसी एक आंख से धुंधला दिखने लगे, तो इसे मामूली कमजोरी समझकर टालें नहीं.
- आंखों में कोई भी बदलाव महसूस हो तो तुरंत अपने आई स्पेशलिस्ट के पास जाएं.
- अपने उस डॉक्टर को जरूर बताएं जिसने आपको यह दवा लिखी है. खासकर अगर आपको पहले से ही शुगर की वजह से आंखों में दिक्कत यानी रेटिनोपैथी की शिकायत है.
- कोई भी दवा कभी भी सोशल मीडिया के वीडियो देखकर या किसी दोस्त के कहने पर शुरू न करें.
समझदारी इसी में है कि आप अफवाहों से न घबराएं, बिना डाक्टरी सलाह के दवा से छेड़छाड़ न करें और अपने शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव पर पैनी नजर रखें.
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