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कैंसर की ये दवाएं हो गई महंगी, खसरे और टिटनेस के टीके का भी बढ़ा दाम

केंद्र सरकार द्वारा कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली तीन दवाओं के प्राइज बढ़ा दिए हैं. इसके साथ ही खसरा और टिटनेस की टीकों की भी कीमत में इजाफा हुआ है.

कैंसर की ये दवाएं हो गई महंगी, खसरे और टिटनेस के टीके का भी बढ़ा दाम
कैंसर की दवाओं समेत, खसरे और टिटनेस के टीकों के बढ़े दाम. ( Image NDTV)

केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो दवाओं और तीन महत्वपूर्ण वैक्सीनों के दाम बढ़ा दिए हैं. इसके अलावा एंटी-टेटनस इम्यूनोग्लोबुलिन (Anti-Tetanus Immunoglobulin) इंजेक्शन की अधिकतम कीमत में भी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है. इन कीमतों में संशोधन को लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी गई है. 

कैंसर की दवा में 50% का इजाफा 

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कार्बोप्लाटिन (Carboplatin) और सिस्प्लाटिन (Cisplatin) इंजेक्शन की कीमतों में 50% तक बढ़ोतरी की है. ये दोनों दवाएं विभिन्न प्रकार के कैंसर के इलाज के लिए काफी महत्वपूर्ण है. नई कीमतों के तहत अब कार्बोप्लाटिन 10 mg/ml की अधिकतम कीमत 90.74 रुपये प्रति मिलीलीटर और सिस्प्लाटिन 1 mg/ml की अधिकतम कीमत 10.89 रुपये प्रति मिलीलीटर तय की गई है. 

एक्सपर्ट्स के अनुसार, दोनों दवाएं 'प्लैटिनम-आधारित' कीमोथेरेपी दवाएं हैं. वैश्विक स्तर पर प्लेटिनम के दामों में दोगुने से ज्यादा का इजाफा हुआ है. क्यूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश प्लेटिनम आयात करता है, और पश्चिमी एशिया में तनाव के कारण इसकी आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हो रही थी.

इसके अलावा एनपीपीए ने बीसीजी वैक्सीन, खसरा रूबेला वैक्सीन (एमआर वैक्सीन) और खसरे का टीका के दाम में भी बढ़ाएं हैं. अधिसूचना के अनुसार, बीसीजी वैक्सीन की कीमत 8.20 रुपए से बढ़ाकर 9.89 रुपए प्रति डोज, खसरा रूबेला वैक्सीन की कीमत 72.90 रुपए से बढ़ाकर 87.93 रुपए प्रति वायल और खसरे का टीका की कीमत 51.40 रुपए से बढ़ाकर 62 रुपए प्रति वायल की गई है. इन कीमतों में 2026 के लिए 0.64956% थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का प्रभाव भी शामिल है.

एंटी-टेटनस इंजेक्शन के दाम बढ़े 

Photo Credit: NDTV

सरकार ने राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (NLEM) में शामिल एंटी-टेटनस इम्यूनोग्लोबुलिन (Anti-Tetanus Immunoglobulin) इंजेक्शन की भी अधिकतम कीमत में 50% की बढ़ोतरी की मंजूरी दी है. ये दवा टेटनस संक्रमण से बचाव के लिए इस्तेमाल की जाती है, जिसका निर्माण भारत सीरम्स एंड वैक्सीन्स लिमिटेड करती है.

नई कीमत के तहत एंटी-टेटनस इम्यूनोग्लोबुलिन 250 IU ₹1,912.02 प्रति वायल और एंटी-टेटनस इम्यूनोग्लोबुलिन 500 IU ₹2,881.19 प्रति वायल तय की गई है.

16 दवाओं के अधिकतम नए दाम तय 

इसके अलावा राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने दवा मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO), 2013 के तहत अन्य 16 विभिन्न दवाओं की नई रिटेल कीमतें तय की हैं. इसमें आंखों की दवा (आई ड्रॉप्स), हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और अन्य बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई दवाएं शामिल हैं. सरकार का कहना है कि यह फैसला अक्टूबर 2025 के बाजार आंकड़ों के आधार पर लिया गया है.

आदेश के अनुसार, Phenylephrine + Chlorpheniramine + Boric Acid + Hydroxypropylmethyl Cellulose आई ड्रॉप्स की रिटेल कीमत 8.35 रुपए प्रति मिलीलीटर तय की गई है. पहले इसकी दावा की गई कीमत 18 रुपये प्रति मिलीलीटर थी. Telmisartan 40 mg + Cilnidipine 10 mg + Chlorthalidone 6.25 mg संयोजन वाली उच्च रक्तचाप की दवा की कीमत 16.17 रुपए प्रति टैबलेट तय की गई है.

यह पहले 24 रुपए प्रति टैबलेट के दावे के मुकाबले काफी कम है. Amlodipine + Telmisartan + Metoprolol संयोजन वाली दवा की रिटेल कीमत 12.03 रुपए प्रति टैबलेट निर्धारित की गई है, जबकि पहले दवा कीमत 15 रुपए प्रति टैबलेट थी.

नियमों के उल्लंघन पर होगा एक्शन

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन भी दवा और वैक्सीन की कीमतों में संशोधन किया गया है उसमें जीएसटी शामिल लागू नहीं है. इसीलिए निर्धारित रिटेल कीमतों पर केवल लागू जीएसटी अलग से जोड़ा जाएगा.

आदेश के तहत अब सभी दवा कंपनियों को नई कीमतों के अनुसार पैक और मूल्य सूची अपडेट करनी होगी. साथ ही इसकी जानकारी राज्य औषधि नियंत्रकों और वितरकों को देनी होगी. इसके अलावा उत्पादन, आयात और बिक्री का विवरण भी नियमित रूप से एनपीपीए को देना होगा. 

दवा और वैक्सीन के क्यों बढ़े दाम?

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कंपनियों का कहना था कि दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और अन्य जरूरी सामग्री की कीमतें पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गई हैं. इसके अलावा आयातित सामान महंगा होने, डॉलर की कीमत में उतार-चढ़ाव और उत्पादन व वितरण खर्च बढ़ने से दवा बनाना पहले की तुलना में ज्यादा महंगा हो गया है. 

कंपनी के अनुसार मौजूदा तय कीमत पर इस दवा का उत्पादन करना आर्थिक रूप से मुश्किल हो रहा था, इसलिए उसने सरकार से कीमत बढ़ाने की मांग कि थी. इसकी एनपीपीए और औषधि विभाग ने समीक्षा कि और पाया कि दवाओं और वैक्सीन की उपलब्धता बनी रहे इसके लिए दामों में संशोधन जरुरी है. यही वजह है कि यह फैसला लिया गया है. अधिकारी के अनुसार, फैसले से दवा कि उपलब्धता बनी रहेगी और मरीजों को आवश्यक उपचार समय पर मिलता रहेगा.

सरकार के इस फैसले के बाद असर मरीजों की जेब पर पड़ेगा और दवाएं अधिक कीमत पर मिलेंगी.हालांकि, सरकार ने कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि दवाओं को निर्धारित सीमा से अधिक कीमत पर नहीं बेचा जाए क्यूंकि अगर नियमों का उल्लंघन करते पाया गया तो डीपीसीओ और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी और अतिरिक्त वसूली गई राशि ब्याज सहित वापस जमा करनी होगी.

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