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मिडिल क्लास के लिए सस्ता हेल्थ इंश्योरेंस लाएगी सरकार? क्या आयुष्मान भारत योजना में भी होगा बदलाव?

Health insurance for Middle Class: संसदीय समिति ने मिडिल क्लास के लिए सस्ते हेल्थ इंश्योरेंस और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के रेट्स तय करने की सिफारिश की है.जानिए आम जनता को राहत देने के लिए दिए गए बड़े सुझाव क्या-क्या हैं...

मिडिल क्लास के लिए सस्ता हेल्थ इंश्योरेंस लाएगी सरकार? क्या आयुष्मान भारत योजना में भी होगा बदलाव?
Health Insurance: मिडिल क्लास को मिले सस्ता हेल्थ इंश्योरेंस...आयुष्मान भारत योजना को लेकर संसदीय समिति ने की ये बड़ी सिफारिशें

महंगे इलाज का खर्च आज मिडिल क्लास परिवारों के लिए बड़ी चिंता बन गया है.अचानक अस्पताल में भर्ती होने पर लाखों रुपये का बिल किसी भी  मिडिल क्लास परिवार का बजट बिगाड़ सकता है. इसी परेशानी को देखते हुए संसद की एक समिति ने मिडिल क्लास के लिए सस्ते और आसान हेल्थ इंश्योरेंस कवर को बढ़ावा देने की सिफारिश की है. इसके साथ ही, प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के खर्च को लेकर भी कई अहम सुझाव दिए गए हैं. समिति चाहती है कि इलाज के पैकेज के रेट साफ और तय हों, ताकि मरीज को इलाज शुरू कराने से पहले यह पता हो कि कितना खर्च आएगा.

मिडिल क्लास के लिए सस्ता हेल्थ इंश्योरेंस

संसदीय समिति ने कहा है कि मिडिल क्लास के लिए 'आरोग्य संजीवनी' जैसी सस्ती और आसान हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम्स को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. समिति के मुताबिक, मिडिल क्लास का एक बड़ा हिस्सा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के दायरे से बाहर रह जाता है. ऐसे में बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी आने पर उसे अपनी जेब से भारी खर्च उठाना पड़ता है.

समिति ने ऐसे हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स का विस्तार करने की सिफारिश की है, जिनकी पॉलिसी की शर्तें आसान हों और जिनका फायदा ज्यादा लोगों तक पहुंच सके.

प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के रेट हों तय

प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च कितना होगा, इसे लेकर भी समिति ने बड़ा सुझाव दिया है. समिति ने सभी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के लिए ट्रांसपेरेंट और स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट पैकेज तय करने की सिफारिश की है.इसका मकसद इलाज के खर्च को कम करना और मनमाने चार्ज पर रोक लगाना है. खास तौर पर कमरे के किराए से जुड़े ऐसे बिलिंग मॉडल को खत्म करने की बात कही गई है, जिनसे इलाज का कुल खर्च बढ़ जाता है.

समिति ने स्टैंडर्ड प्रक्रियाओं के लिए प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की कीमतों में मनमाने अंतर को रोकने के लिए एक स्टैच्यूरी फ्रेमवर्क बनाने का भी सुझाव दिया है.

आयुष्मान भारत के पैकेज रेट में समय-समय पर बदलाव

संसदीय समिति ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के पैकेज रेट को लेकर भी सिफारिश की है. महंगाई और इलाज में इस्तेमाल होने वाली नई टेक्नोलॉजी की बढ़ती लागत को देखते हुए इन रेट्स की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए.समिति का कहना है कि इसके लिए एक स्टैच्यूरी फ्रेमवर्क बनाई जाए, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की आर्थिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाए. इससे प्राइवेट अस्पतालों की योजना में भागीदारी बनी रहेगी और ट्रीटमेंट क्लाविटी से भी समझौता नहीं होगा.

समिति के मुताबिक, AB-PMJAY के तहत अब तक 11 करोड़ से ज्यादा अस्पताल में भर्ती के मामले कवर किए जा चुके हैं. योजना में 38,038 सरकारी और प्राइवेट अस्पताल जुड़े हैं और 1.57 लाख करोड़ रुपये के इलाज को मंजूरी दी जा चुकी है.

लगातार बढ़ रहा है मेडिकल खर्च 

संसदीय समिति ने प्राइवेट हेल्थकेयर के बढ़ते खर्च पर भी चिंता जताई है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक अस्पताल में भर्ती होने पर औसतन 34,064 रुपये का आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च आता है.वहीं, मेडिकल महंगाई की दर करीब 10-13% सालाना बताई गई है. यानी इलाज की कीमत हर साल बढ़ रही है और इसका सीधा असर आम परिवार की जेब पर पड़ रहा है.

समिति ने यह भी कहा कि सरकारी हेल्थ इंश्योरेंस योजनाओं के फायदे मेडिकल महंगाई और इलाज में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी की बढ़ती लागत से प्रभावित नहीं होने चाहिए.

कैशलेस क्लेम सेटलमेंट को आसान बनाने की सिफारिश

हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को तेजी से निपटाने के लिए समिति ने नेशनल हेल्थ एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के बेहतर इस्तेमाल की सिफारिश की है. इसका मकसद कैशलेस क्लेम सेटलमेंट को ज्यादा फास्ट और ट्रांसपेरेंट  बनाना है.समिति ने हाल में हुए इंश्योरेंस सुधारों का सख्ती से पालन करने की भी बात कही है. इनमें हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने की ऊपरी उम्र सीमा हटाना और पहले से मौजूद बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड को तीन साल तक सीमित करना शामिल है.

हर ब्लॉक में जन औषधि केंद्र, अस्पतालों में AMRIT फार्मेसी

सस्ती दवाओं को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए समिति ने सभी बाकी ब्लॉक स्तर के सरकारी हेल्थ फैसिलिटी में जन औषधि केंद्र खोलने की सिफारिश की है.इसके साथ ही बड़े प्राइवेट अस्पतालों में AMRIT फार्मेसी को बढ़ावा देने की बात कही गई है. यहां मरीजों को सस्ती कीमत पर दवाएं, इम्प्लांट और सर्जिकल सामान मिल सकेगा.

सब-डिस्ट्रिक्ट लेवल तक सस्ती डायलिसिस

डायलिसिस का खर्च कम करने के लिए भी समिति ने बड़ा सुझाव दिया है. समिति ने कहा है कि फ्री या बेहद कम कीमत वाली हीमोडायलिसिस सुविधा को जिला अस्पतालों से आगे बढ़ाकर सब-डिस्ट्रिक्ट स्तर तक ले जाने की संभावनाएं तलाशनी चाहिए.इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. समिति के मुताबिक, नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम से मरीजों को अब तक अनुमानित 10,102 करोड़ रुपये की बचत हुई है.

राज्यों को हेल्थ बजट बढ़ाने की सलाह

समिति ने राज्यों से अपने कुल बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने को भी कहा है. सिफारिश है कि राज्य अपने कुल खर्च का कम से कम 8% हिस्सा हेल्थ सेक्टर पर खर्च करें.केंद्र सरकार राज्यों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करे, यह सुझाव भी समिति ने दिया है.

आयुष इलाज भी आयुष्मान भारत में शामिल करने की सिफारिश

समिति ने आयुष इलाज के पैकेज को भी AB-PMJAY में शामिल करने की सिफारिश की है. इसके साथ यह सुनिश्चित करने की बात कही गई है कि योजना के लाभार्थियों पर इलाज का कोई आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च न आए.इसके अलावा, प्राइवेट हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स को आयुष्मान भारत  डिजिटल मिशन से जोड़ने के लिए गाइडलाइंस बनाने का सुझाव दिया गया है.

दूर-दराज के इलाकों में टेली-मेडिसिन और मेंटल हेल्थ सुविधा

दूर-दराज के इलाकों में डॉक्टरों और एक्सपर्ट की सुविधा पहुंचाने के लिए समिति ने Tele-MANAS और eSanjeevani के रीजनल हब बढ़ाने की सिफारिश की है. इससे लोगों को घर के पास या दूर बैठे एक्सपर्ट से मेडिकल और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह लेने में मदद मिल सकती है.

हेल्थ पर सरकारी खर्च बढ़ा, जेब से खर्च फिर भी बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के मुताबिक, कुल स्वास्थ्य खर्च में लोगों की जेब से होने वाले खर्च यानी आउट-ऑफ पॉकेट एक्सपेडीजर की हिस्सेदारी 2014 में 62.6% थी, जो 2022-23 में घटकर 43.4% रह गई.इसी अवधि में प्रति व्यक्ति सरकारी स्वास्थ्य खर्च भी 1,108 रुपये से बढ़कर 2,786 रुपये हो गया. हालांकि, समिति ने माना कि प्राइवेट इलाज की बढ़ती कीमत और मेडिकल महंगाई के बीच आम लोगों के लिए हेल्थकेयर का खर्च अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है.

क्या सस्ता होने वाला है हेल्थ इंश्योरेंस?

बता दें कि फिलहाल संसदीय समिति ने सिफारिशें की हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार ने तुरंत कोई नई मिडिल-क्लास हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम लॉन्च कर दी है. समिति ने सस्ते और आसान हेल्थ कवर को बढ़ावा देने, इलाज के रेट को ट्रासपेरेंट बनाने और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को महंगाई के हिसाब से अपडेट करने जैसे बड़े सुझाव दिए हैं.

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