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This Article is From Oct 04, 2025

महिलाओं को शिकार बना रही ये बीमारी, Covid के बाद बढ़े मामले, स्टडी में हुआ चौकाने वाले खुलासे

कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में एसोसिएट प्रोफेसर जूडिथ ब्रुचफेल्ड ने कहा, ''पॉट्स की जांच के लिए महंगे उपकरणों की जरूरत नहीं है. इसे बहुत सरल और सस्ते टेस्ट से पहचाना जा सकता है, जो हर अस्पताल और क्लीनिक में उपलब्ध हैं.

महिलाओं को शिकार बना रही ये बीमारी, Covid के बाद बढ़े मामले, स्टडी में हुआ चौकाने वाले खुलासे
स्वीडन के प्रसिद्ध कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने इस पर एक बड़ा अध्ययन किया.

Study on covid : एक नई स्टडी में पता चला है कि कोविड से लंबे समय से प्रभावित लोगों में दिल की एक असामान्य बीमारी, जिसे पोस्टुरल ऑर्थोस्टैटिक टैचीकार्डिया सिंड्रोम (पीओटीएस) कहा जाता है, काफी आम है. स्टडी में पाया गया कि इस बीमारी में दिल तब बहुत तेज धड़कता है जब कोई व्यक्ति लेटने से खड़े होने की स्थिति में होता है. खास बात यह है कि यह स्थिति पुरुषों की तुलना में मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है.

पीओटीएस की वजह से प्रभावित लोगों को खड़े होने में काफी परेशानी होती है. उनका दिल आराम की हालत में और जब वे मेहनत करते हैं तो भी सामान्य से तेज धड़कने लगता है. इसके अलावा, ऐसे लोगों को थकान ज्यादा महसूस होती है और ध्यान केंद्रित करने में भी दिक्कत होती है. यह लक्षण लॉन्ग कोविड से पीड़ित लोगों में देखा गया है, इसलिए शोधकर्ताओं ने इस बीमारी और लॉन्ग कोविड के बीच संबंध पर ध्यान दिया.

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स्वीडन के प्रसिद्ध कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने इस पर एक बड़ा अध्ययन किया. उन्होंने 467 लॉन्ग कोविड से पीड़ित लोगों की जांच की, जिन्हें कोविड के दौरान अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया था. इसमें 91 प्रतिशत मरीज महिलाएं थीं, जो मध्यम उम्र की थीं और कोविड से पहले पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय थीं.

'सर्कुलेशन: एरिथमिया एंड इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी' पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया कि करीब एक तिहाई लोगों को पीओटीएस की सही डायग्नोसिस मिली, जबकि लगभग 27 प्रतिशत में पीओटीएस के लक्षण थे, लेकिन वे पूरी तरह से इस बीमारी की जांच के मानदंडों पर खरे नहीं उतरे. बाकी 42 प्रतिशत लोगों को इस बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे.

शोध में पाया गया कि जो मरीज पीओटीएस से ग्रसित थे, उनका दिल चलने के दौरान ज्यादा तेज धड़कता था. साथ ही उनकी जिंदगी की गुणवत्ता भी काफी कम हो गई थी, यानी वे पहले जितना अच्छा महसूस नहीं कर पा रहे थे.

इस अध्ययन में शामिल डॉक्टर मिकेल ब्योर्नसन ने कहा, ''इससे पहले भी कुछ छोटे-छोटे अध्ययन इस बात का सुझाव देते थे कि लॉन्ग कोविड और पीओटीएस के बीच संबंध हो सकता है. लेकिन अब यह बड़े पैमाने पर साबित हो गया है कि यह एक आम समस्या है. यह जानकारी डॉक्टरों और मरीजों दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे इलाज आसान हो सकता है.''

कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में एसोसिएट प्रोफेसर जूडिथ ब्रुचफेल्ड ने कहा, ''पॉट्स की जांच के लिए महंगे उपकरणों की जरूरत नहीं है. इसे बहुत सरल और सस्ते टेस्ट से पहचाना जा सकता है, जो हर अस्पताल और क्लीनिक में उपलब्ध हैं. इसलिए, लॉन्ग कोविड वाले उन मरीजों को जिनका दिल खड़े की स्थिति या काम करते समय बहुत तेज धड़कता है, और जिन्हें चक्कर, थकान और ध्यान न लगने जैसी समस्याएं होती हैं, जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और पीओटीएस की जांच करानी चाहिए.''

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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