Heart Attack Vs Panic Attack: अचानक सीने में घबराहट, तेज धड़कन, पसीना आना और ऐसा महसूस होना कि अब जान चली जाएगी, ऐसे लक्षण दिखते ही ज्यादातर लोग हार्ट अटैक समझकर डर जाते हैं. लेकिन हर बार ऐसा होना हार्ट अटैक नहीं होता. कई मामलों में ये पैनिक अटैक भी हो सकता है. जिसके लक्षण काफी हद तक हार्ट अटैक जैसे दिखाई देते हैं. ऐसे में दोनों के बीच फर्क समझना बेहद जरूरी है. कार्डियो केयर के डॉ. नवीन अग्रवाल ने बताया कि सही पहचान और समय पर चेकअप से सही परेशानी समझी जा सकती है और मुश्किल से बचा भी जा सकता है.
पैनिक अटैक और हार्ट अटैक में क्या अंतर है?
डॉ. नवीन अग्रवाल के अनुसार, पैनिक अटैक अक्सर मेंटल टेंशन, स्ट्रेस या इमोशनल प्रेशर की वजह से होता है. हालांकि कई बार बिना किसी कारण के भी पैनिक अटैक हो सकता है. इसमें व्यक्ति को तेज घबराहट, दिल की धड़कन बढ़ना, पसीना आना, सांस फूलने जैसा महसूस होता है. कई बार मौत का डर भी लगने लगता है. लेकिन टेस्ट कराने पर ईसीजी, इको या दूसरे टेस्ट नॉर्मल आते हैं.
हार्ट अटैक में आमतौर पर सीने में तेज दर्द या दबाव, दर्द का कंधे, हाथ, गर्दन या जबड़े तक फैलना, सांस लेने में तकलीफ जैसे सिंपटम्स दिखाई दे सकते हैं. खासकर जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान की आदत या परिवार में हार्ट डिजीज की हिस्ट्री हो. उनमें हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है.

कैसे पहचानें हार्ट अटैक और पैनिक अटैक. (Image NDTV)
क्या पैनिक अटैक से हार्ट अटैक हो सकता है?
डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि सिर्फ पैनिक अटैक होने से हार्ट अटैक होने की पॉसिबिलिटी बहुत कम होती है. तनाव के दौरान शरीर में कुछ हार्मोन बढ़ सकते हैं. जिससे रिस्क बढ़ जाता है. लेकिन हार्ट अटैक आ ही जाएगा, ये कहना मुश्किल है. इसलिए केवल पैनिक अटैक की वजह से हार्ट की दवाएं शुरू करना सही नहीं माना जाता. अगर किसी व्यक्ति को बार बार पैनिक अटैक आते हैं तो घबराने की बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर बेसिक हार्ट चैकअप, जैसे ईसीजी, इको और जरूरत पड़ने पर ट्रेडमिल टेस्ट कराना बेहतर रहता है. खासकर 30-35 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को एक बार कार्डियक टेस्ट जरूर कराने चाहिए.
कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?
अगर सीने में तेज दर्द लगातार बना रहे, दर्द हाथ या जबड़े तक पहुंचे, सांस लेने में ज्यादा तकलीफ हो, व्यक्ति बेहोश हो जाए या पहले से हार्ट की बीमारी हो, तो इसे सामान्य घबराहट मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है.
डॉ. नवीन अग्रवाल का कहना है कि बार बार पैनिक अटैक आने पर भी अधिकांश लोग नॉर्मल और लंबा जीवन जी सकते हैं. जरूरी है कि खुद से दवा लेने की बजाय सही जांच कराएं और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार इलाज कराएं.
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