विज्ञापन

नवरात्र से पहले 'Rent A Garba Partner' पोस्ट वायरल, क्या Gen Z अकेलेपन की गिरफ्त में है?

सोशल मीडिया पर वायरल 'Rent A Garba Partner' पोस्ट सिर्फ एक मजाक नहीं थी. यह युवाओं में बढ़ते अकेलेपन, सोशल मीडिया संस्कृति और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक बड़ी सच्चाई की ओर इशारा करती है.

नवरात्र से पहले 'Rent A Garba Partner' पोस्ट वायरल, क्या Gen Z अकेलेपन की गिरफ्त में है?
NDTV

त्योहारों का मौसम शुरू होते ही हर तरफ रौनक दिखने लगती है. चारों तरफ रोशनी, नए-नए कपडे, ढोल-नगाड़ों की थाप और गरबा-डांडिया का जोश. नवरात्रि में मां शक्ति की अराधना के लिए जब लोग गोल घेरे में पारंपरिक चनिया-चोली और केडियू पहनकर रात-रात भर झूमते हैं, तो लगता है कि पूरी दुनिया बस खुशियों में डूबी है. लेकिन क्या वाकई हर कोई इस जश्न का हिस्सा बन पा रहा है?

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट बहुत तेजी से वायरल हुई. इंस्टाग्राम पर कृष मिस्त्री नाम के एक लड़के ने पोस्ट डाली- 'रेंट अ गरबा पार्टनर' यानी गरबा के लिए साथी किराए पर लें. उसने बाकायदा तीन पैकेज निकाले- सिल्वर (1,000 रुपये), गोल्ड (1,500 रुपये) और प्लैटिनम (2,000 रुपये). इन पैकेजेस में गरबा सिखाने, मैचिंग कपड़े पहनने, साथ में फोटो खिंचवाने और दोस्तों के सामने मिलने की झूठी कहानी गढ़ने तक का वादा किया गया था.

लोग इस पोस्ट को देखकर खूब हंसे, लाखों व्यूज आए, मजेदार कमेंट्स की बाढ़ आ गई. किसी ने इसे मजाक कहा तो किसी ने पूछा कि क्या सच में ऐसा मिल सकता है? लेकिन अगर हंसी-मजाक से हटकर थोडा गहराई से सोचें, तो यह पोस्ट आज के समाज की एक कड़वी और दुखद सच्चाई को सामने लाती है. त्योहारों की इस चकाचौंध में भी लोग अंदर से कितने खाली और अकेले हो गए हैं कि अब डांडिया खेलने के लिए भी किराए का साथी ढूंढने की नौबत आ गई है.

यहां देखें पोस्‍ट - 

Also Read | Woman Awarded Rs 24 Lakh After Neighbours Cut Trees For Better Lake View

क्या सच में आज का इंसान अकेला हो गया है?

ऊपर से देखने पर लगेगा कि आज का युवा कभी अकेला हो ही नहीं सकता. हर किसी के पास स्मार्टफोन है, सोशल मीडिया पर हजारों फॉलोअर्स हैं और वाट्सएप पर अनगिनत ग्रुप्स बने हुए हैं. पर हकीकत बिल्कुल उलट है. आज हमारे पास बात करने के लिए स्क्रीन तो है, पर दुख-सुख बांटने के लिए कोई कंधा नहीं है.

भीड़भाड़ वाली सड़कों और बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों के बीच लोग अपने छोटे-छोटे फ्लैट्स में कैद होकर रह गए हैं. इंस्टाग्राम पर दूसरों की पार्टी और खुशियों भरी फोटो देखकर हम खुद को और ज्यादा अलग-थलग महसूस करने लगते हैं. त्योहार पहले परिवार और मोहल्ले को साथ लाने का बहाना होते थे, लेकिन अब त्योहार भी सोशल मीडिया पर सिर्फ अच्छी रील्स और दिखावे का जरिया बनकर रह गए हैं.

आखिर क्यों बढ़ रहा है यह अकेलापन?

यह सवाल हर किसी के मन में आता है कि जब सुविधाएं इतनी बढ़ गईं, तो अपनापन कहां गायब हो गया? इसके पीछे कई बड़ी वजहें हैं:

सोशल मीडिया का दिखावा: हम फोन पर घंटों रील्स देखते हैं, दूसरों की चमकती जिंदगी से अपनी तुलना करते हैं और खुद को कम आंकने लगते हैं. वर्चुअल रिश्ते बढ़ गए हैं, पर रीयल जिंदगी की बातचीत खत्म हो चुकी है.
भागदौड़ और करियर का दबाव: पढ़ाई और नौकरी के चक्कर में लोग अपना घर-गांव छोड़कर दूर शहरों में आ गए हैं. 10 से 12 घंटे की शिफ्ट और ऑफिस के टारगेट के बाद किसी से मिलने या रिश्ते निभाने की ऊर्जा ही नहीं बचती.
जॉइंट फैमिली का खत्म होना: पहले घरों में दादा-दादी, चाचा-चाची सब साथ रहते थे. कोई न कोई बात करने के लिए हमेशा मौजूद रहता था. अब न्यूक्लियर फैमिली और सिंगल लिविंग का कल्चर बढ़ गया है, जिससे अकेलापन और गहरा हो गया है.
लोगों पर भरोसा न कर पाना: आज के समय में हर कोई जज किए जाने के डर में जीता है. अपनी कमजोरी या परेशानी किसी को बताने में डर लगता है कि कहीं सामने वाला मजाक न उड़ा दे, इसलिए लोग अपनी भावनाएं अंदर ही दबा लेते हैं.

अकेलेपन का सेहत पर क्या असर पड़ता है?

डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अकेलापन केवल मन का वहम नहीं है, बल्कि यह एक साइलेंट किलर की तरह हमारे पूरे शरीर को खोखला करता है. कई रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि लगातार अकेला रहना दिन में 15 सिगरेट पीने जितना नुकसानदेह हो सकता है.

दिल की बीमारियों का खतरा: जब कोई इंसान लंबे वक्त तक अकेला महसूस करता है, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (जैसे कोर्टिसोल) का स्तर हमेशा बढ़ा रहता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा काफी ज्यादा हो जाता है.
कमजोर इम्यूनिटी: अकेलापन हमारे इम्यून सिस्टम को बुरी तरह कमजोर कर देता है. ऐसे लोग मौसमी बीमारियों, वायरल इन्फेक्शन और शरीर में सूजन (इंफ्लेमेशन) की चपेट में बहुत जल्दी आ जाते हैं.
नींद न आना और डिप्रेशन: अकेले रहने वाले लोगों का स्लीप साइकिल बिगड़ जाता है. रात भर करवटें बदलना, बेचैनी और फिर धीरे-धीरे डिप्रेशन व गंभीर एंग्जायटी का शिकार हो जाना बहुत आम बात हो गई है.
खान-पान की गलत आदतें: अकेलेपन में लोग अक्सर अनहेल्दी फूड खाने लगते हैं. कोई खाना छोड़ देता है तो कोई तनाव मिटाने के लिए ज्यादा मीठा या जंक फूड खाने लगता है, जिससे मोटापा, डायबिटीज और पेट से जुड़ी बीमारियां घेर लेती हैं.

क्या आप भी अकेलापन महसूस कर रहे हैं?

लोगों के बीच रहकर भी अकेला महसूस करना
फोन पर घंटों रहना लेकिन किसी से बात न करना
त्योहारों में उदासी महसूस होना
दोस्तों की पोस्ट देखकर खुद को अलग महसूस करना
लोगों से मिलने का मन न करना

इस अकेलेपन से बाहर कैसे निकलें?

अगर आपको भी कभी ऐसा लगता है कि आप बिल्कुल अकेले पड़ गए हैं या किसी त्योहार पर जाने के लिए आपके पास कोई दोस्त नहीं है, तो मायूस होने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान और असरदार कदम उठाकर आप इससे उबर सकते हैं:

  1. स्क्रीन से बाहर निकलें : फोन को दिन में कुछ घंटों के लिए खुद से दूर रखें. सोशल मीडिया की दुनिया नकली है, उसपर ज्यादा वक्त बिताने के बजाय पार्क में टहलने जाएं या किसी पड़ोसी से चाय पर बात करें.
  2. किसी नई हॉबी या एक्टिविटी से जुड़ें : अकेले बैठने से दिमाग में नकारात्मक विचार ज्यादा आते हैं. कोई स्पोर्ट्स क्लब जॉइन करें, जिम जाएं, डांस क्लास लें या वीकेंड पर किसी एनजीओ में वॉलंटियर करें. जब आप ऐसे कामों में जुड़ते हैं तो समान सोच वाले नए दोस्त अपने आप बन जाते हैं.
  3. खुद की कंपनी पसंद करना सीखें : किसी के साथ होने का इंतजार करने से बेहतर है कि आप अकेले जीना सीखें. अगर गरबा जाने के लिए कोई साथी नहीं मिला, तो भी नए कपड़े पहनिए और खुद अकेले चले जाइए. वहां जाकर माहौल का हिस्सा बनिए, कोई न कोई आपको सर्किल में शामिल कर ही लेगा.
  4. अपनों को खुद फोन लगाएं : कई बार हम सिर्फ इस ईगो में रहते हैं कि सामने वाले ने फोन क्यों नहीं किया. इस झिझक को तोड़िए. अपने पुराने स्कूल के दोस्त, रिश्तेदार या माता-पिता को खुद कॉल करें और हालचाल पूछें. एक छोटी सी बातचीत भी आपका मूड बदल सकती है.
  5. डॉक्टर की मदद लेने से न हिचकिचाएं : अगर अकेलापन इतना बढ़ गया है कि रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो रहा है और हर वक्त उदासी छाई रहती है, तो किसी अच्छे काउंसलर या थेरेपिस्ट से बात करने में शर्म न करें. मानसिक सेहत भी शारीरिक सेहत जितनी ही जरूरी है.

जिंदगी किराए के साथियों से नहीं, बल्कि दिल से बनाए गए रिश्तों से चलती है. त्योहार का असली मकसद कपड़ों का दिखावा या फोटो खिंचवाना नहीं, बल्कि अपने दिल के दरवाजे खोलकर लोगों से जुड़ना है. इस नवरात्रि अगर आपके पास कोई पार्टनर नहीं भी है, तो भी मुस्कुराइए, खुद से प्यार कीजिए और जिंदगी की धुन पर खुलकर थिरकिए.

Watch Video: 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Health, Partner, Garba, Navratra
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com