हाई ब्लड प्रेशर एक आम समस्या बन गई है, जो दिल की बीमारी, स्ट्रोक, किडनी खराब होने और समय से पहले मौत का बड़ा कारण बन सकती है. इसे “साइलेंट किलर” के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि कई बार यह बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है.
वैसे तो हाई बीपी चेक करने के लिए ब्लड प्रेशर मापा जाता है, लेकिन सिर्फ इससे यह पता नहीं चलता कि शरीर को अंदर से कितना नुकसान हो चुका है. हाल ही में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने HyPrevent नाम की एक नई AI तकनीक बनाई है, जो यह समझने में मदद करती है कि हाई ब्लड प्रेशर का असर शरीर के अलग-अलग अंगों पर कितना पड़ रहा है.
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क्या है HyPrevent?
HyPrevent एक AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित तकनीक है, जो सीखने की मदद से शरीर के कई अंगों से जुड़े क्लिनिकल और इमेजिंग डेटा का विश्लेषण करती है, इसका मकसद यह पता लगाना है कि हाई ब्लड प्रेशर की वजह से शरीर के अंदर बीमारी कितनी गंभीर हो चुकी है और किन मरीजों में किस तरह का नुकसान छिपा हो सकता है.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मुताबिक, यह टूल खास तौर पर इसलिए बनाया गया है ताकि पता चल सके कि हाई ब्लड प्रेशर से शरीर के कौन-कौन से अंग खराब हो रहे हैं, इससे हर मरीज का इलाज उसके हिसाब से किया जा सकेगा, सबको एक जैसी दवा नहीं देनी पड़ेगी.
क्या-क्या करेगी ये मशीन?
यह नई तकनीक सिर्फ BP के नंबर नहीं देखती. यह AI, कंट्रास्टिव लर्निंग और कई अंगों से जुड़े मेडिकल डेटा का इस्तेमाल करके यह समझती है कि हाई ब्लड प्रेशर शरीर के अंदर क्या बदलाव कर रहा है. ये सिस्टम ऐसे पैटर्न पहचानने की कोशिश करता है जो बीमारी की गंभीरता से जुड़े हों साथ ही यह यह भी बता सकता है कि एक जैसे ब्लड प्रेशर वाले दो मरीजों की बीमारी का असर शरीर पर अलग-अलग हो सकता है यानी दो लोगों का ब्लड प्रेशर भले ही एक जैसा हो, लेकिन उनके अंगों को हुआ नुकसान और आगे चलकर बीमारी का खतरा अलग हो सकता है.
यह तकनीक कैसे काम करती है?
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी इनोवेशन के अनुसार, HyPrevent को ऐसे डेटा पर ट्रेन किया गया है, जिसमें हाई ब्लड प्रेशर वाले और सामान्य ब्लड प्रेशर वाले दोनों तरह के लोग शामिल थे. यह सिस्टम शरीर के कई अंगों से जुड़ी जानकारी देखकर हर व्यक्ति की बीमारी कितनी गंभीर है, इसका अलग-अलग आकलन कर सकता है साथ ही, यह बीमारी के ऐसे छिपे हुए प्रकारों को भी पहचान सकता है, जो इलाज पर अलग तरह से असर दिखाते हैं. यह तरीका पुराने हाइपरटेंशन मैनेजमेंट से काफी अलग है, क्योंकि अभी तक इलाज का मुख्य ध्यान सिर्फ ब्लड प्रेशर को एक तय सीमा में रखने पर होता है.
इस तकनीक से मरीजों को क्या फायदा हो सकता है?
अगर आगे की स्टडीज में HyPrevent सही साबित होती है, तो इससे कई फायदे हो सकते हैं,
बीमारी का जल्दी पता चल सकता है
यह सिस्टम अंगों को होने वाले नुकसान की पहचान लक्षण आने से पहले कर सकता है.
इलाज ज्यादा व्यक्तिगत हो सकता है
मरीजों को अलग-अलग बीमारी समूहों में बांटकर डॉक्टर उनके जोखिम के हिसाब से इलाज तय कर सकते हैं.
डॉक्टरों को बेहतर फैसला लेने में मदद
इस तकनीक से डॉक्टर बीमारी की प्रगति और भविष्य के खतरे को बेहतर समझ सकते हैं.
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