मानसून में अक्सर ऐसा होता है कि बाल धोने के सिर्फ एक दिन बाद ही फिर से तेल-तेल, बेजान और गंदे लगने लगते हैं. क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? अगर हां, तो ये जानकारी आपके काम की है. कहीं बाहर जाना हो और आप चाहते हों कि बाल साफ और फ्रेश दिखें, लेकिन उसी दिन बालों में ऑयल नजर आने लगे तो मूड खराब हो जाता है. ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज हुसैन ने बताया कि ऐसा क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है.
नमी की भूमिका
हवा में मौजूद नमी सिर्फ त्वचा ही नहीं, आपके बालों और स्कैल्प को भी प्रभावित करती है. हमारे स्कैल्प में छोटी-छोटी ग्रंथियां होती हैं जो नेचुरल तेल (सीबम) बनाती हैं. यह तेल बालों को हेल्दी और नम रखने में मदद करता है, लेकिन ज्यादा नमी होने पर ये ग्रंथियां ज्यादा तेल बनाने लगती हैं. इसी वजह से बाल जल्दी ऑयली और चिपचिपे हो जाते हैं.
स्कैल्प में ज्यादा पसीना आना
मानसून में गर्मी और उमस ज्यादा होती है, जिससे स्कैल्प पर पसीना आता है. जब पसीना और तेल मिल जाते हैं, तो बालों पर एक चिपचिपी परत बन जाती है, इससे बाल भारी, गंदे और जल्दी ऑयली दिखने लगते हैं.
गंदगी और प्रदूषण का असर
बरसात के मौसम में धूल और प्रदूषण भी ज्यादा होता है. ये गंदगी आसानी से पसीने और तेल वाले बालों में चिपक जाती है, इससे बाल जल्दी गंदे लगते हैं और भारी महसूस होते हैं.
फंगल और स्कैल्प की समस्या
मानसून का मौसम फंगस और बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए सही होता है, इससे डैंड्रफ, खुजली और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में स्कैल्प और ज्यादा तेल बनाने लगता है, जिससे बाल और चिपचिपे हो जाते हैं.
क्या पतले बाल जल्दी चिपचिपे होते हैं?
हां, पतले बाल वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा होती है. क्योंकि पतले बाल स्कैल्प के करीब होते हैं, इसलिए तेल जल्दी पूरे बालों में फैल जाता है और बाल जल्दी ऑयली दिखते हैं.
मानसून में बालों की चिपचिपाहट कम करने के आसान तरीके
- नीम के पानी से बाल धोएं, इससे स्कैल्प साफ रहता है
- ताजा एलोवेरा जेल लगाएं, इससे स्कैल्प को ठंडक और बैलेंस मिलता है
- आंवला और रीठा जैसे हर्बल क्लीनर का इस्तेमाल करें
- बहुत उमस वाले दिन में ज्यादा तेल लगाने से बचें
- अपनी हेयर टाइप के हिसाब से बाल धोते रहें
- बाल धोने के बाद अच्छे से सुखाएं, नमी न रहने दें
पद्म श्री से सम्मानित शहनाज़ हुसैन आयुर्वेदिक ब्यूटी केयर की अग्रणी विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने भारत की हर्बल विरासत को दुनियाभर तक पहुंचाया है. उन्होंने 375 से अधिक आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन विकसित किए और एक ग्लोबल फ्रैंचाइज़ नेटवर्क खड़ा किया साथ ही, वे हार्वर्ड केस स्टडी बनने वाली पहली भारतीय महिला उद्यमी भी हैं.
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