विज्ञापन

Explainer: क्या AI की रफ्तार धीमी करने का वक्त आ गया है? सैम ऑल्टमैन के पेस AI वाले बयान ने फिर छेड़ी बहस

Open AI के CEO सैम ऑल्टमैन का कहना है कि अब AI की रफ्तार को थोड़ा नियंत्रित करने का समय आ गया है. ये बयान ऐसे समय में आया है जब हगिंग फेस हैक मामले के सामने आने के बाद AI की सुरक्षा पर बहस तेज हो गई है. समझिए क्या है पूरा मामला और क्या है इसके मायने?

Explainer: क्या AI की रफ्तार धीमी करने का वक्त आ गया है? सैम ऑल्टमैन के पेस AI वाले बयान ने फिर छेड़ी बहस
ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन
AFP
  • Open AI के एक मॉडल ने टेस्टिंग जोन से बाहर निकल कर हगिंग फेस के सर्वर को हैक कर लिया था.
  • यह घटना जुलाई 2026 की है, इसके बाद AI की सुरक्षा पर बहस और तेज हो गई है.
  • अब सैम ऑल्टमैन ने बयान दिया है कि, "शायद AI की रफ्तार को थोड़ा नियंत्रित करने का समय आ गया है."

ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने पहली बार AI के विकास को पूरी तरह रोकने की बजाय उसकी रफ्तार संतुलित रखने की बात कही है. यह बयान ऐसे समय आया है जब ओपन एआई के एक AI एजेंट हगिंग फेस के एक टेस्ट सिस्टम में सेंध लगाने की घटना सामने आई है और इसने AI सुरक्षा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. अब बहस सिर्फ AI को तेज या धीमा करने की नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और सही दिशा में विकसित करने की हो रही है.

सैम ऑल्टमैन का मानना है कि AI की रफ्तार को नियंत्रित करने से समाज इस नई तकनीक के साथ खुद को आसानी से ढाल सकेगा. ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पहली बार है जब ऑल्टमैन ने AI पर पॉज यानी पूरी तरह रोक लगाने की बात नहीं की. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि AI का विकास इतनी तेजी से नहीं होना चाहिए कि सुरक्षा और समाज दोनों पीछे छूट जाएं.

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: AFP

ऑल्टमैन का बयान ऐसे समय में आया है जब ओपन एआई के एक प्रायोगिक मॉडल ने अपने सुरक्षित टेस्टिंग जोन से खुद को बाहर निकालते हुए इंटरनेट का उपयोग किया और हगिंग फेस के सर्वर को हैक कर लिया. हालांकि साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कोई अपग्रेडेड AI अटैक नहीं था. उस सिस्टम की सुरक्षा कमजोर थी, इसलिए AI उसके अंदर पहुंच गया.

AI की दुनिया में लंबे समय से दो विचारधाराओं Acceleration और Deceleration के बीच बहस चल रही हैं. Acceleration यानी AI के विकास की रफ्तार को और बढ़ाना. इस सोच के समर्थक मानते हैं कि AI का विकास जितनी तेजी से होगा, उतना ही विज्ञान, चिकित्सा, शिक्षा और अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा. वहीं जो पक्ष Deceleration यानी AI के विकास की रफ्तार को कम करने का पक्षधर है, उसका कहना है कि AI की क्षमताएं इतनी तेजी से बढ़ रही हैं कि सुरक्षा, कानून और समाज उसके साथ कदम नहीं मिला पा रहे. इसलिए AI के विकास की गति नियंत्रित होनी चाहिए.

ये भी पढ़ें: AI इंसानों की जगह नहीं ले सकेंगे: जॉब को लेकर सैम ऑल्टमैन का बड़ा बयान

क्या केवल दो ही रास्ते हैं?

टेकक्रंच के पॉडकास्ट में एक्सपर्ट्स ने अपनी राय में यही कहा कि हमारे सामने सिर्फ दो ही विकल्प हैं- AI के विकास को तेज गति दो, या उसे धीमा कर दो?

हालांकि कुछ एक्सपर्ट ये भी कहते हैं कि असली सवाल यह है कि AI किस दिशा में आगे बढ़े और उसके लिए कितने मजबूत सुरक्षा उपाय बनाए जाएं, इस पर फोकस करना जरूरी है. वो AI के विकास की गति पर रोक लगाने की वकालत नहीं करते बल्कि उन्हें सही डायरेक्शन देने पर जोर देते हैं.

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक हगिंग फेस की घटना AI की सुपर इंटेलिजेंस का उदाहरण नहीं थी. दरअसल समस्या ये थी कि टेस्टिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित नहीं था. लिहाजा, AI को जितनी पहुंच मिलनी चाहिए थी, उससे ज्यादा मिल गई. वहां AI ने सुरक्षी की सामान्य गलतियों का फायदा उठा लिया था.
एक्सपर्ट्स ने ये भी कहा कि यह हमला किसी हाई-टेक जासूसी ऑपरेशन जैसा नहीं था, बल्कि एक साधारण और काफी शोर मचाने वाला प्रयास था जिसे समय रहते रोका जा सकता था.

ये भी पढ़ें: चाहे जितना भी एडवांस हो आपका सिस्टम, आ रहा है AI का ऐसा शातिर मॉडल जो कुछ भी कर लेगा आसानी से हैक

ओपन एआई पर आर्थिक दबाव, IPO पर असर भी

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ओपन एआई के सामने एक बड़ी चुनौती है. एक तरफ उसे लगातार निवेश जुटाना है. दूसरी तरफ AI की रफ्तार भी नियंत्रित रखने की बात करनी है. अगर विकास धीमा होता है तो कमाई और निवेश प्रभावित हो सकते हैं. अगर बहुत तेजी से आगे बढ़ता है तो सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं.

एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि ऑल्टमैन अभी तो खुलकर AI की गति पर बात कर सकते हैं, क्योंकि ओपन एआई का IPO आने में अभी कुछ वक्त है. पर एंथ्रोपिक्स जैसी कंपनियां IPO को लेकर ओपन एआई से आगे चल रही हैं. ऐसे में उनके सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयानों से निवेशकों और बाजार की प्रतिक्रिया प्रतिकूल यानी विपरीत भी हो सकती है जिससे IPO पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है.

ऐसे में AI के विकास को लेकर इस समय चल रही बहस के मूल में बात केवल इतनी सी नहीं रह गई है कि AI तेज गति से बढ़े या धीमी गति से इसका विस्तार हो, बल्कि अब सवाल ये है कि AI कितनी सुरक्षित है और कंपनियां इसे लेकर सुरक्षा को कितना प्राथमिकता देती हैं. यानी आने वाले समय में AI का भविष्य केवल उसकी ताकत से नहीं बल्कि जिम्मेदारियों, पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों से तय होगा. क्योंकि केवल इससे ही यह तय होगा कि AI इंसानों की मदद करेगा या नई तरह की साइबर जोखिम पैदा करेगा.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Sam Altman, OpenAI, Ai Safety, AI Safety Expert, Artificial Intelligence
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com