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धूप में बैठने से कंट्रोल होगा शुगर लेवल, नई स्टडी में हुआ खुलासा, जानें कैसे और कब बैठे धूप में

शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग प्राकृतिक रोशनी में रहते थे, उनका ब्लड ग्लूकोज स्तर दिन में ज्यादा घंटों तक नॉर्मल रेंज में रहता था, और इसमें कम बदलाव होता था. इसके अलावा, उनका मेलाटोनिन लेवल नींद का हार्मोन शाम को थोड़ा ज्यादा था, और फैट ऑक्सीडेटिव मेटाबॉलिज्म भी बेहतर हुआ.

धूप में बैठने से कंट्रोल होगा शुगर लेवल, नई स्टडी में हुआ खुलासा, जानें कैसे और कब बैठे धूप में
स्टडी के लिए, टीम ने 65 साल और उससे ज्यादा उम्र के 13 भागीदारों को शामिल किया, सभी को टाइप 2 डायबिटीज थी.

अगर आप टाइप 2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए खास है. एक नई स्टडी में सामने आया है कि दिन की प्राकृतिक रोशनी न सिर्फ हमारी नींद और मूड के लिए अच्छी होती है, बल्कि यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी मदद कर सकती है. यह स्टडी स्विट्जरलैंड की जिनेवा यूनिवर्सिटी और नीदरलैंड्स की मास्ट्रिच यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर की है. तो चलिए जानते हैं आखिर क्यों सूरज की रोशनी डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है. 

सूरज की रोशनी और मधुमेह रोगियों के बीच क्या है संबंध

शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग प्राकृतिक रोशनी में रहते थे, उनका ब्लड ग्लूकोज स्तर दिन में ज्यादा घंटों तक नॉर्मल रेंज में रहता था, और इसमें कम बदलाव होता था. इसके अलावा, उनका मेलाटोनिन लेवल नींद का हार्मोन शाम को थोड़ा ज्यादा था, और फैट ऑक्सीडेटिव मेटाबॉलिज्म भी बेहतर हुआ.

जर्नल सेल मेटाबॉलिज्म में छपी इस स्टडी ने इस डायबिटिक्स पर प्राकृतिक रोशनी के फायदेमंद असर का पहला सबूत दिया. यूएनआईजीई में एसोसिएट प्रोफेसर चार्ना डिबनेर ने कहा, "यह कई सालों से पता है कि सर्कैडियन रिदम में गड़बड़ी मेटाबोलिक डिसऑर्डर के बढ़ने में एक बड़ी भूमिका निभाती है, जो पश्चिमी आबादी के बढ़ते हिस्से को प्रभावित करते हैं."

स्टडी के लिए, टीम ने 65 साल और उससे ज्यादा उम्र के 13 भागीदारों को शामिल किया, सभी को टाइप 2 डायबिटीज थी. उन्होंने खास तौर पर डिजाइन किए गए रहने की जगहों में 4.5 दिन बिताए, जहां बड़ी खिड़कियों से प्राकृतिक या कृत्रिम रोशनी पहुंच रही थी. कम से कम चार हफ्ते के ब्रेक के बाद, वे दूसरे सत्र के लिए दूसरी रोशनी वाले माहौल में लौटे.

शरीर के मेटाबॉलिज्म में देखे गए पॉजिटिव बदलावों को बेहतर ढंग से समझने के लिए, वैज्ञानिकों ने हर लाइट ट्रीटमेंट से पहले, उसके दौरान और बाद में वॉलंटियर्स के रक्त और मांसपेशियों के सैंपल लिए. उन्होंने कल्चर्ड स्केलेटल मसल सेल्स में मॉलिक्यूलर क्लॉक के रेगुलेशन को ब्लड में लिपिड, मेटाबोलाइट्स और जीन ट्रांसक्रिप्ट के साथ विश्लेषण किया.

कुल मिलाकर, परिणाम साफ दिखाते हैं कि इंटरनल क्लॉक और मेटाबॉलिज्म नेचुरल लाइट से प्रभावित होते हैं. डिबनेर ने समझाया, "यह बेहतर ब्लड शुगर रेगुलेशन और ब्रेन सेंट्रल क्लॉक और ऑर्गन्स क्लॉक के बीच बेहतर समन्वय का कारण हो सकता है."

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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