आज के समय में नई भाषा सीखना सिर्फ आपके करियर के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि अगर आप कहीं ट्रैवल कर रहे हैं और उस शहर में वही भाषा बोली जाती है, तो लोगों से बातचीत करना भी आपके लिए काफी आसान हो जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नई भाषा सीखना दिमाग की सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जा सकता है?
जी हां, बिल्कुल सही सुना आपने, बार्सिलोना में आयोजित फेडरेशन ऑफ यूरोपियन न्यूरोसाइंस सोसाइटीज सम्मेलन में पेश की गई एक रिसर्च के अनुसार, जो लोग एक से ज्यादा भाषाएं बोलते हैं, उनका दिमाग उनकी उम्र के मुकाबले ज्यादा जवान दिखाई देता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि नई भाषा सीखना और उसे नियमित रूप से इस्तेमाल करना दिमाग को सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकता है.
दो, तीन और चार भाषाएं बोलने वालों में क्या अंतर मिला?
रिसर्च में पाया गया कि जो लोग 'दो भाषाएं' बोलते थे, उनका दिमाग केवल 'एक भाषा' बोलने वालों की तुलना में लगभग 6 साल युवा दिखाई दिया. वहीं, जो लोग 'तीन भाषाएं' बोलते थे, उनका दिमाग करीब 7 साल युवा नजर आया. अगर बात चार भाषाएं बोलने वाले लोगों की करें, तो उनका दिमाग उनकी वास्तविक उम्र की तुलना में लगभग 13 साल युवा दिखाई दिया.
दिमाग पर क्या असर पड़ता है?
रिसर्च में पाया गया कि जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे दिमाग की कोशिकाओं के बीच संपर्क कमजोर होने लगता है. इसका असर याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और नई चीजें सीखने की गति पर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि कई भाषाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों का दिमाग लगातार अलग-अलग शब्दों, व्याकरण और विचारों के बीच काम करता रहता है. यही मानसिक गतिविधि दिमाग को ज्यादा सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकती है.
इस रिसर्च में क्या जांचा गया?
इससे पहले की रिसर्च में यह देखा गया था कि यूरोप के उन देशों के लोग, जहां भाषा सीखने और कई भाषाएं बोलने की क्षमता ज्यादा है, उनमें उम्र बढ़ने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी हो सकती है, लेकिन इस नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने यह मापने की कोशिश की कि कई भाषाएं बोलने का असर सीधे किसी व्यक्ति के दिमाग पर किस तरह पड़ता है.
इसके लिए स्पेन, चिली, अर्जेंटीना और डबलिन के वैज्ञानिकों ने बास्क इलाके के लोगों पर स्टडी की. इस इलाके में ज्यादातर लोग 2-3-4 भाषाएं बोलते हैं, इसलिए इसे चुना गया. यहां के लोग स्पेनिश, बास्क, फ्रेंच और/या अंग्रेजी बोलते हैं.
रिसर्च कैसे की गई?
दिमाग की न्यूरोलॉजिकल उम्र पता करने के लिए वैज्ञानिकों ने पहले 728 लोगों पर टेस्ट किया, इसके लिए उन्होंने मैग्नेटोएन्सेफेलोग्राफी नाम की तकनीक इस्तेमाल की जिससे दिमाग की गतिविधियों को मापा जा सकता है. इन लोगों की उम्र और भाषा बोलने की क्षमता अलग-अलग थी. फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इन सारे आंकड़ों को समझा गया और ये तय किया गया कि हर उम्र में दिमाग के कनेक्शन का लेवल नॉर्मली कैसा होना चाहिए. इसके बाद 144 लोगों के दूसरे ग्रुप का स्कैन किया गया. इस ग्रुप में बराबर संख्या में ऐसे लोग थे जो एक, दो, तीन और चार भाषाएं बोलते थे. इन सबकी तुलना करके देखा गया कि ज्यादा भाषा बोलने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है.
विशेषज्ञ ने क्या कहा?
स्पेन के सैन सेबेस्टियन में बास्क सेंटर ऑन कॉग्निशन, ब्रेन एंड लैंग्वेज की शोधकर्ता डॉ. लूसिया अमोरुसो ने कहा कि जो लोग ज्यादा भाषाएं बोलते हैं उनका दिमाग उनकी असली उम्र से कहीं ज्यादा युवा दिखता है. उनके अनुसार ये फायदा सिर्फ इस बात पर नहीं है कि आप 2 या 4 भाषा बोलते हो. अगर आपकी भाषा पर अच्छी पकड़ है और आपने बचपन में ही दूसरी भाषा सीख ली थी तो उसका असर और भी ज्यादा होता है यानी जितना गहरा और लंबा भाषा सीखने का अनुभव होगा, दिमाग के लिए उतना ही फायदा होगा.
किन बातों को भी ध्यान में रखा गया?
रिसर्च करते समय वैज्ञानिकों ने लोगों की उम्र, लिंग और शिक्षा का भी ध्यान रखा, लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि इसके अलावा जीवनशैली और लोगों से मिलना-जुलना जैसे दूसरे कारण भी दिमाग पर असर डाल सकते हैं, इसलिए सिर्फ भाषा को ही इसका पूरा कारण नहीं माना जा सकता.
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