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AC में ज्‍यादा देर बैठने से होती है खांसी और सांस लेने में दिक्कत? डॉक्टर से जानें वजह और बचाव के उपाय

क्‍या आपने भी कभी इस बात पर ध्‍यान द‍िया है कि जब आप देर तक एसी में बैठते हैं तो आपको खांसी या सांस से जुड़ी दूसरी द‍िक्‍कते होती हैं. कहीं इसके पीछे आपका एसी तो नहीं, जानें एक्‍सपर्ट से.

AC में ज्‍यादा देर बैठने से होती है खांसी और सांस लेने में दिक्कत? डॉक्टर से जानें वजह और बचाव के उपाय
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गर्मी के मौसम में घर हो, दफ्तर हो या कोई दुकान, एसी की ठंडी हवा मिलते ही जान में जान आ जाती है. चिलचिलाती धूप से भागकर जैसे ही हम एयर कंडीशन वाले कमरे में बैठते हैं, लगता है कि सुकून मिल गया. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि इसी एसी वाले कमरे में लगातार बैठे रहने के बाद अचानक से गले में खराश होने लगती है, सूखी खांसी उठने लगती है या फिर सिर भारी-भारी सा महसूस होता है.

असल में दिक्कत अकेले एसी की मशीन में नहीं होती, बल्कि कमरे के अंदर की बंद हवा और उसकी साफ-सफाई में छुपी होती है. जब कमरे में ताजी हवा आने-जाने का रास्ता नहीं होता और एसी के फिल्टर में धूल जम जाती है, तो वही ठंडी हवा हमारी सेहत के लिए आफत बन जाती है.

कमरे के अंदर की हवा इतनी जरूरी क्यों है?

हममें से ज्यादातर लोग अपना पूरा दिन चार दीवारों के अंदर ही गुजारते हैं. कभी घर का कमरा, तो कभी ऑफिस का केबिन. ऐसे में हमारी सांसों की सेहत पूरी तरह इस बात पर टिकी होती है कि कमरे की हवा कैसी है. बंद कमरे में बाहर से ज्यादा गंदगी और एलर्जेंस जमा हो सकते हैं.

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कमरे की हवा को दूषित करने वाली चीजें:

  • जालों और कोनों में जमी धूल और उसमें पनपने वाले बारीक कीड़े
  • बाहर से कपड़ों के साथ आए फूलों के परागकण और पालतू जानवरों के झड़े हुए बाल
  • सीलन और नमी वाली जगहों पर पैदा होने वाली फंगस और फफूंदी
  • बीड़ी-सिगरेट का बचा हुआ धुआं
  • फिनाइल, फर्श साफ करने वाले कैमिकल्स और रूम फ्रेशनर से निकलने वाली तेज गैस

क्या एसी वाले कमरे से सांस फूलने की समस्या हो सकती है?

एसी कमरे की नमी को पूरी तरह खींच लेता है. लगातार बहुत ठंडी और सूखी हवा में रहने की वजह से सांस की नली और गले की परत सूखने लगती है. इससे गले में खुजली, बार-बार पानी पीने की तलब और नाक बंद होने जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं.

अगर किसी इंसान को पहले से दमा, धूल की एलर्जी या ब्रोंकाइटिस जैसी पुरानी बीमारी है, तो गंदे एसी वाले कमरे की हवा उनके लिए ट्रिगर का काम करती है. जरा सी धूल या ठंडे तापमान में जाते ही उनकी छाती में जकड़न महसूस होने लगती है.

इन चेतावनी भरे लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें

अगर आपको लगता है कि आपका बंद कमरा आपकी तबीयत बिगाड़ रहा है, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें:

  • कमरे में घुसते ही बार-बार छींकें आना या गले में कांटे जैसा चुभना
  • आंखों में लगातार जलन होना या पानी बहना
  • हर वक्त नाक बंद रहना और सांस भारी लगना
  • कमरे में रहते ही सिर में दर्द, भारीपन और सुस्ती महसूस होना

सबसे बड़ा संकेत यह है कि जैसे ही आप उस कमरे या इमारत से बाहर खुली हवा में निकलते हैं, आपकी तबीयत खुद-ब-खुद ठीक होने लगती है

किन लोगों को बंद कमरे की हवा से ज्यादा खतरा है

कुछ लोगों का शरीर खराब इनडोर हवा को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर पाता:

  • छोटे बच्चे, जिनकी सांस लेने की गति तेज होती है और फेफड़े अभी नाजुक होते हैं
  • घर के बुजुर्ग लोग, जिनकी रोग प्रतिरोधक छमता उम्र के साथ कमजोर पड़ जाती है
  • अस्थमा, एलर्जी और सांस के पुराने मरीज
  • वे लोग जो अक्सर बार-बार बीमार पड़ते रहते हैं

कमरे की हवा को साफ और सुरक्षित कैसे बनाएं

कमरे की हवा सुधारने के लिए बहुत भारी-भरकम खर्च करने की कतई जरूरत नहीं है. बस अपनी रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव करके इसे ठीक किया जा सकता है.

वेंटिलेशन का पूरा ख्याल रखें: जब बाहर का मौसम ठीक हो और तेज धूप न हो, तो सुबह-शाम कुछ देर के लिए खिड़की-दरवाजे खोल दें ताकि बासी हवा बाहर निकल सके. रसोई और बाथरूम के एग्जॉस्ट फैन को जरूर चलाएं.
एसी की समय पर सर्विस कराएं: एसी के जालीदार फिल्टर को हर 15 दिन में खुद धोएं और तय समय पर मैकेनिक से सर्विस कराएं.
गीले कपड़े से सफाई करें: कमरे में झाड़ू लगाने से धूल हवा में उड़कर सांस में जाती है. इसलिए फर्श, पंखे, परदों और गद्दों के आसपास गीले पोछे या वैक्यूम क्लीनर से सफाई करें.
एसी का तापमान बहुत कम न रखें: एसी को हमेशा 24 से 26 डिग्री के बीच चलाएं. बहुत ज्यादा ठंडा तापमान शरीर को सुखा देता है.
कमरे के अंदर स्मोकिंग से बचें: घर के अंदर सिगरेट पीने से हवा में खतरनाक टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं.
जरूरत पड़ने पर एयर प्यूरीफायर लगाएं: अगर आपके इलाके में प्रदूषण बहुत ज्यादा है, तो एक अच्छा एयर प्यूरीफायर कमरे की हवा को काफी हद तक हल्का कर सकता है.

डॉक्टर के पास कब जाना जरूरी है

अगर आपकी खांसी हफ्तों तक ठीक न हो, सीने से सीटी जैसी आवाज आए, सांस लेने में जोर लगाना पड़े या एलर्जी की दवाएं लेने के बाद भी राहत न मिले, तो तुरंत किसी छाती रोग विशेषज्ञ को दिखाएं.

(एक्‍सपर्ट के बारे में: डॉ. शिवांशु राज गोयल, डायरेक्टर एवं यूनिट हेड - पल्मोनोलॉजी, रेस्पिरेटरी और स्लीप मेडिसिन, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका)

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