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सावधान! दिल्ली-NCR में कल से PUC नहीं तो पेट्रोल नहीं, प्रदूषण को लेकर सख्त नियम लागू

दिल्ली प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए बीएस-6 से नीचे के वाहनों पर प्रतिबंध, पार्किंग शुल्क दोगुना, निर्माण कार्यों पर रोक और वर्क फ्रॉम होम जैसे कदम लागू होंगे.

सावधान! दिल्ली-NCR में कल से PUC नहीं तो पेट्रोल नहीं, प्रदूषण को लेकर सख्त नियम लागू
दिल्ली प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं.

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सर्दियों में बढ़ने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए सोमवार को कई कड़े उपायों की घोषणा की. इनमें दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-6 से नीचे की श्रेणी के वाहनों के प्रवेश पर रोक, 'पीयूसी नहीं तो ईंधन नहीं' नियम का सख्ती से पालन तथा निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर प्रतिबंध शामिल हैं.

बीएस-6 से नीचे के वाहनों की एंट्री पर रोक

सिरसा ने कहा कि दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-6 मानकों से नीचे वाली श्रेणी के वाहनों के शहर में प्रवेश पर एक नवंबर से पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों पर कोई अतिरिक्त पार्किंग शुल्क नहीं लगाया जाएगा. बीएस (भारत स्टेज) एक से छह तक विभिन्न श्रेणियों में वाहनों के उत्सर्जन मानक तय करता है. इनमें बीएस-6 श्रेणी की गाड़ियां सबसे सख्त पर्यावरणीय मानकों का पालन करती हैं.

सीएनजी वाहनों को मिलेगी राहत

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि सरकार इस पाबंदी की जानकारी पहले ही सार्वजनिक करेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएनजी वाहनों पर बीएस-4 से जुड़ी पाबंदियां लागू नहीं होंगी. हालांकि, सरकार ने अभी यह नहीं बताया है कि यह प्रतिबंध कितने समय तक लागू रहेगा.

निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए एक नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना किया जाएगा. इलेक्ट्रिक वाहनों को इस अतिरिक्त शुल्क से छूट मिलेगी. वहीं, दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) की पार्किंग सुविधाएं इस व्यवस्था से बाहर रहेंगी.

दफ्तरों के समय में होगा बदलाव

एक नवंबर से 28 फरवरी तक दफ्तरों के खुलने और बंद होने के समय में बदलाव किया जाएगा. एमसीडी कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के दफ्तर सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित होंगे. दिल्ली सरकार ने कहा कि सरकारी और निजी कार्यालयों में आने वाले कर्मचारियों की संख्या में 50 प्रतिशत की कटौती की जाएगी. यानी आधे कर्मचारी घर से काम करेंगे.

उच्चस्तरीय बैठक के बाद फैसला

इन उपायों की घोषणा केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई 'कार्रवाई आधारित योजना' बैठक के बाद की गई. बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश वर्मा तथा पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा मौजूद रहे. सिरसा ने कहा कि 'पीयूसी नहीं तो ईंधन नहीं' नियम को युद्ध स्तर पर लागू किया जाएगा. अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुके वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा. इसके लिए दिल्ली के सभी 500 पेट्रोल पंपों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) कैमरे लगाए गए हैं.

उन्होंने बताया कि अक्टूबर में जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जबकि नवंबर में पीयूसी केंद्रों को आधुनिक बनाया जाएगा. एएनपीआर कैमरों के सुचारू संचालन के लिए उनकी दोबारा जांच भी की जाएगी. तीन स्वचालित जांच केंद्रों के जरिए करीब 2.5 लाख वाहनों की फिटनेस जांच की जाएगी ताकि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान की जा सके.

पुरानी बसों और ट्रकों को हटाने की तैयारी

सरकार 'परिवर्तन योजना' के तहत बीएस-4 और उससे पुरानी बसों तथा मालवाहक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाने पर काम कर रही है. इसके लिए नए वाहनों के पंजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, धूल पैदा करने वाले तोड़फोड़ कार्य और खुले में निर्माण गतिविधियों पर एक नवंबर से 10 दिसंबर तक रोक रहेगी. वहीं, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक सभी प्रकार के निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा.

एआई से होगी निगरानी

सरकार ने 723 निर्माण स्थलों को अपने निगरानी तंत्र से जोड़ा है. यहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्वचालित प्रणाली के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण उपायों की निगरानी की जा रही है. मंत्री के अनुसार, बहुत कम स्थलों पर नियमों के उल्लंघन की शिकायत मिली है. मकानों के नक्शे पास कराने के लिए एमसीडी के 'मलबा ऐप' पर पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा. साथ ही घरों में मरम्मत और निर्माण कार्य कराने वाले परिवारों के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे.

सरकार ने साफ हवा का भरोसा दिलाया

पर्यावरण मंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि दिल्लीवासियों को स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए पूरे वर्ष वैज्ञानिक और तकनीकी तरीकों से काम किया जा रहा है. मंत्री के अनुसार, दिल्ली में वर्तमान में 5,088 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं. सार्वजनिक परिवहन को और मजबूत बनाने के लिए 150 नई इलेक्ट्रिक बसें बेड़े में शामिल की जाएंगी.

प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष फोकस

जिलाधिकारियों के साथ बैठकों के माध्यम से सर्वाधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों के आसपास की गतिविधियों की पहचान की जा रही है. इनमें श्मशान घाट, कूड़ा निस्तारण स्थल और सीमेंट ढुलाई वाले स्थान शामिल हैं. अब तक चिन्हित 62 हॉटस्पॉट में से 42 को नियंत्रित किए जाने का दावा किया गया है. यातायात जाम और प्रदूषण कम करने के लिए चिन्हित 15 सिग्नल-फ्री मार्गों में से आठ का काम पूरा हो चुका है. शेष सात मार्गों को सात अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार प्रदूषण और ट्रैफिक से प्रभावित संवेदनशील इलाकों पर भी विशेष निगरानी रख रही है.

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