- दिल्ली की हवा फिर खराब, पराली जलाने की घटनाएं बढ़ीं
- अक्टूबर शुरू होने से पहले दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर खतरे के संकेत
- दिल्ली-एनसीआर में महसूस होने लगी धूल और धुंध
दिल्ली में सर्दियों से पहले ही वायु प्रदूषण के संकेत दिखने लगे हैं. राजधानी की हवा बुधवार को फिर ‘मध्यम' श्रेणी में पहुंच गई, जबकि पिछले पांच दिनों से वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक' बनी हुई थी. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईएआरआई) के मुताबिक, बुधवार को छह राज्यों में पराली जलाने की 19 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें सबसे अधिक मामले पंजाब और उत्तर प्रदेश से सामने आए. विशेषज्ञों का मानना है कि कम हवा की गति और कमजोर वेंटिलेशन जैसी परिस्थितियां प्रदूषण को बढ़ा सकती हैं. ऐसे में आने वाले दिनों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है.
छह राज्यों में दर्ज हुईं 19 पराली जलाने की घटनाएं
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के आंकड़ों के अनुसार बुधवार को उपग्रहों के माध्यम से छह राज्यों में पराली जलाने की कुल 19 घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें पंजाब और उत्तर प्रदेश में सात-सात मामले सामने आए, जबकि मध्य प्रदेश में चार और हरियाणा में एक घटना दर्ज की गई. 15 सितंबर से 30 सितंबर के बीच इन छह राज्यों में कुल 114 पराली जलाने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं. इनमें पंजाब में 59, उत्तर प्रदेश में 32, मध्य प्रदेश में 17, हरियाणा में तीन, राजस्थान में दो और दिल्ली में एक मामला शामिल है.

दिल्ली की हवा फिर हुई खराब
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार बुधवार को दिल्ली का औसत AQI 129 दर्ज किया गया. यह स्तर ‘मध्यम' श्रेणी में आता है. सीपीसीबी के मानकों के अनुसार 0 से 50 तक AQI ‘अच्छा', 51 से 100 ‘संतोषजनक', 101 से 200 ‘मध्यम', 201 से 300 ‘खराब', 301 से 400 ‘बहुत खराब' और 401 से 500 ‘गंभीर' माना जाता है. दिल्ली के 45 वायु निगरानी केंद्रों में से 42 केंद्रों पर हवा ‘मध्यम' श्रेणी में रही, जबकि तीन केंद्रों पर ‘संतोषजनक' श्रेणी दर्ज की गई.
आईआईटी दिल्ली स्टेशन पर ‘खराब' हवा
शाम छह बजे आईआईटी दिल्ली निगरानी केंद्र पर AQI 207 दर्ज किया गया, जो ‘खराब' श्रेणी में आता है. विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय प्रदूषण, धूल और मौसमीय परिस्थितियों के कारण कुछ इलाकों में स्थिति औसत से अधिक खराब देखी जा रही है.
मौसमीय परिस्थितियां भी बढ़ा रहीं चिंता
एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के अनुसार 1 से 3 अक्टूबर तक और उसके बाद के छह दिनों तक दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘मध्यम' श्रेणी में बने रहने की संभावना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वेंटिलेशन इंडेक्स 6000 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड से नीचे रहने की आशंका है. साथ ही औसत हवा की गति 10 किलोमीटर प्रति घंटा से कम रहने का अनुमान है. ये दोनों परिस्थितियां प्रदूषकों के फैलाव के लिए अनुकूल नहीं मानी जातीं, जिससे हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है.

सितंबर रहा पिछले दो वर्षों से अधिक प्रदूषित
आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2026 में दिल्ली का औसत AQI 114.8 दर्ज किया गया. यह वर्ष 2024 के औसत AQI 91.1 और वर्ष 2025 के AQI 84.9 की तुलना में काफी अधिक है. इस वजह से सितंबर 2026 पिछले तीन वर्षों का सबसे प्रदूषित सितंबर महीना बन गया. महीने के अंतिम हिस्से में प्रदूषण में तेज बढ़ोतरी देखी गई. 20 से 24 सितंबर के बीच पांच दिनों तक AQI लगातार उच्च स्तर पर रहा. 22 सितंबर को AQI 242 तक पहुंच गया, जो पूरे महीने का सबसे खराब स्तर था.
24 सितंबर के बाद मिली कुछ राहत
25 सितंबर से वायु गुणवत्ता में कुछ सुधार देखा गया. AQI 25 सितंबर को 140, 26 सितंबर को 90, 27 सितंबर को 71, 28 सितंबर को 98, 29 सितंबर को 89 और 30 सितंबर को 114 दर्ज किया गया. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण का स्तर अभी भी सामान्य से अधिक बना हुआ है.
लोगों ने महसूस किया बदलाव
दिल्ली-एनसीआर के कई निवासियों ने बताया कि सितंबर के अंतिम दिनों में सुबह और शाम के समय हवा में धुंध और धूल का प्रभाव साफ महसूस किया गया. लोगों का कहना है कि मानसून के बाद का मौसम सामान्यतः राहत देने वाला होता है, लेकिन इस बार हवा की गुणवत्ता अपेक्षा से अधिक खराब रही.
सर्दियों से पहले बढ़ी चिंता
वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि आने वाला सर्दियों का मौसम अत्यधिक प्रदूषित रहेगा, लेकिन सितंबर के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले जरूर हैं. विशेषज्ञों के अनुसार मौसम में बदलाव, स्थानीय प्रदूषण, धूल और क्षेत्रीय उत्सर्जन मिलकर वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं. ऐसे में अक्टूबर से लागू होने वाले ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) और प्रदूषण नियंत्रण उपायों की प्रभावशीलता पर भी सबकी नजर रहेगी. दिल्ली हर साल सर्दियों में गंभीर वायु प्रदूषण की चुनौती का सामना करती है. ऐसे में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं और प्रतिकूल मौसमीय परिस्थितियों ने इस बार भी सर्दियों से पहले चिंता बढ़ा दी है.
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