Hantavirus Outbreak India: कोविड की तबाही को दुनिया अभी भूल भी नहीं पाई थी कि अब एक और वायरस ने डर बढ़ा दिया है. अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे एक लग्जरी क्रूज शिप पर हंता वायरस संक्रमण सामने आने के बाद कई देशों में अलर्ट जारी कर दिया गया है. जहाज पर सफर कर रहे कुछ यात्रियों की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी. तेज बुखार, सिर दर्द, उल्टी-दस्त और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखे. देखते ही देखते 3 लोगों की मौत हो गई और मामला WHO तक पहुंच गया.
दरअसल ये मामला चर्चा में तब आया जब डच क्रूज शिप एमवी हॉन्डियस (MV Hondius) समुद्री यात्रा पर था. इसी दौरान एक बुजुर्ग यात्री की हालत खराब हुई. शुरुआत में इसे सामान्य वायरल इंफेक्शन माना गया, लेकिन बाद में कई और यात्री बीमार पड़ने लगे. जहाज जब दक्षिण अफ्रीका पहुंचा तब तक दो और मौतें हो चुकी थीं. इसके बाद हेल्थ एजेंसियों ने जहाज पर मेडिकल जांच शुरू कर दी और यात्रियों की निगरानी बढ़ा दी गई. कुछ मरीजों के सैंपल लैब में भेजे गए, जहां Andes strain hantavirus की पुष्टि हुई.
क्यों खतरनाक है हंता वायरस
इस पूरे मामले ने इसलिए भी डर बढ़ा दिया है क्योंकि हंता वायरस को बेहद खतरनाक माना जाता है. कुछ मामलों में इसकी मौत दर 35 से 50 प्रतिशत तक बताई जाती है. यानी हर दो संक्रमित लोगों में से एक की जान जाने का खतरा हो सकता है. यह वायरस कोविड-19 की तरह तेजी से हवा में नहीं फैलता.
फिलहाल भारत में घबराने जैसी स्थिति नहीं
एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक फिलहाल भारत में घबराने जैसी स्थिति नहीं है क्योंकि अभी तक देश में इसका कोई मामला सामने नहीं आया है. डॉक्टरों का कहना है कि हंता वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और दूसरे कृन्तकों से फैलता है. उनके पेशाब, लार या मल के संपर्क में आने से इंसान संक्रमित हो सकता है. खासतौर पर बंद जगहों या गंदगी वाले इलाकों में खतरा ज्यादा माना जाता है.
डॉक्टरों के मुताबिक इंसानों से इंसानों में इसका संक्रमण बहुत रेयर है. यही वजह है कि WHO इसे कोविड जैसी महामारी का खतरा नहीं मान रहा. लेकिन दिक्कत यह है कि अगर वायरस शरीर में पहुंच जाए तो यह सीधे फेफड़ों और किडनी पर हमला कर सकता है. कई मामलों में मरीज को अचानक सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है और ऑक्सीजन लेवल तेजी से गिर सकता है.
कोई वैक्सीन नहीं है हंता वायरस की
हंता वायरस के दो बड़े प्रकार बताए जाते हैं. पहला ओल्ड वर्ल्ड हंता वायरस, जो यूरोप और एशिया में पाया जाता है और किडनी को नुकसान पहुंचाता है. दूसरा न्यू वर्ल्ड हंता वायरस, जो अमेरिका में ज्यादा मिलता है और फेफड़ों पर हमला करता है. एक्सपर्ट्स इसे ज्यादा खतरनाक मानते हैं क्योंकि गंभीर मामलों में फेफड़ों में पानी भर सकता है. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अभी तक इस वायरस की कोई वैक्सीन मौजूद नहीं है. मरीजों का इलाज सिर्फ लक्षणों के आधार पर किया जाता है. यानी बुखार, सांस की तकलीफ और ऑक्सीजन लेवल को कंट्रोल करने पर फोकस रहता है.
क्रूज से उतरे यात्रियों पर नजर, कई देशों को अलर्ट
WHO ने जिन देशों को सतर्क किया है उनमें कनाडा, जर्मनी, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, तुर्की और अमेरिका समेत कई देश शामिल बताए जा रहे हैं. वजह यह है कि क्रूज शिप से उतरे यात्रियों का संपर्क अलग-अलग देशों से रहा था.
फिलहाल वैज्ञानिक इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं. हेल्थ एजेंसियां लोगों को साफ-सफाई रखने, घरों के आसपास चूहों को पनपने से रोकने और बंद जगहों की सफाई करते समय सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं. फिलहाल दुनिया इसे नई महामारी नहीं मान रही, लेकिन ‘मौत के वायरस' की खबर ने लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है.
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