अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे एक क्रूज शिप पर संदिग्ध हंतावायरस(Hantavirus) प्रकोप ने दुनियाभर में चिंता बढ़ा दी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई और कई लोग बीमार पड़ गए. यह प्रकोप MV Hondius नामक एक्सपीडिशन क्रूज शिप पर हुआ, जो अर्जेंटीना से केप वर्डे की ओर जा रहा था. अब अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि जहाज पर यह वायरस कैसे फैला.
जर्नल Frontiers in Microbiology में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, हंतावायरस एक ऐसा वायरस है जो मुख्य रूप से चूहों, कीट खाने वाले जानवरों और चमगादड़ों में पाया जाता है. इसे उभरता हुआ रोगजनक माना जाता है क्योंकि इंसानों में फैलने पर यह गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है. इनमें सबसे खतरनाक हैं हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम और हेमरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम.
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हंतावायरस क्या है?
एक्सपर्ट ने बताया कि, “हंतावायरस एक दुर्लभ वायरस है जो चूहों में पाया जाता है और उनके पेशाब, मल या लार के संपर्क में आने से इंसानों तक पहुंचता है. अटलांटिक क्रूज शिप पर सामने आए मामले ने चिंता बढ़ा दी है क्योंकि ऐसे संक्रमण आमतौर पर ग्रामीण इलाकों में देखे जाते हैं, जहाजों पर नहीं. यह वायरस फेफड़ों या किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है. इसके लक्षण शुरुआत में फ्लू जैसे होते हैं, लेकिन तेजी से गंभीर हो सकते हैं. इसलिए समय पर पहचान और इलाज बहुत जरूरी है.”
हंतावायरस के कई प्रकार होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) नाम की गंभीर बीमारी का कारण बनता है, जो फेफड़ों को प्रभावित करती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकती है.
जर्नल Immunology में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, हंतावायरसपल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) एक दुर्लभ, गंभीर और कई बार जानलेवा सांस संबंधी बीमारी है, जिसकी मृत्यु दर 40% तक हो सकती है. यह बीमारी अमेरिका में पाए जाने वाले ऑर्थोहंतावायरसके कारण होती है और चूहों के जरिए फैलती है.
यह संक्रमण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 7 से 39 दिनों बाद फ्लू जैसे लक्षणों जैसे बुखार और शरीर दर्द से शुरू होता है. इसके बाद 3 से 6 दिनों के भीतर फेफड़ों में पानी भरने और लो ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है. इसका इलाज मुख्य रूप से ICU में सपोर्टिव केयर के जरिए किया जाता है.
क्या कोविड से भी ज्यादा खतरनाक है हंतावायरस? | Is Hantavirus Even More Dangerous than COVID?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हंता वायरस (Hanta Virus), कोविड (COVID-19) की तुलना में प्रति व्यक्ति मामले में कहीं ज्यादा जानलेवा है, लेकिन इससे वैश्विक खतरा बहुत कम है क्योंकि यह इंसानों के बीच शायद ही कभी फैलता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) यह साफ करता है कि जहां अमेरिका में हंतावायरस की मृत्यु दर (CFR) 50 प्रतिशत तक हो सकती है, वहीं ग्लोबल लेवल पर इसका इंसानों के लिए जोखिम कम है, क्योंकि इसका संक्रमण आमतौर पर इंसानों के आपसी संपर्क के बजाय संक्रमित चूहों के सीधे संपर्क में आने से होता है.
हंतावायरस कैसे फैलता है?
दूसरे कई वायरल संक्रमणों की तरह हंतावायरस आमतौर पर इंसान से इंसान में आसानी से नहीं फैलता. यह मुख्य रूप से संक्रमित वातावरण के संपर्क से जुड़ा होता है.
- चूहों के मल या पेशाब के सूक्ष्म कणों वाली हवा में सांस लेने से.
- संक्रमित सतह को छूने के बाद चेहरे को छूने से.
- चूहों के पेशाब, लार या मल के सीधे संपर्क में आने से.
- बहुत कम मामलों में चूहों के काटने या खरोंच से.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह फ्लू या कोविड-19 की तरह इंसान से इंसान में तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं है, हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में ऐसा देखा गया है.
किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए?
हंतावायरस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे लगते हैं, जिससे इसकी पहचान मुश्किल हो सकती है.
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शुरुआती लक्षण
- बुखार
- मांसपेशियों में दर्द
- थकान
- सिरदर्द
बाद में दिखने वाले गंभीर लक्षण:
- सांस लेने में दिक्कत
- लगातार खांसी
- तेजी से सांस चलना
- फेफड़ों में पानी भरना
बीमारी बढ़ने पर मरीज को सांस लेने में गंभीर समस्या हो सकती है, जो सबसे खतरनाक स्थिति मानी जाती है. वायरस के संपर्क में आने के एक से आठ हफ्ते बाद तक लक्षण सामने आ सकते हैं, इसलिए कई बार लोग बीमारी को उसके असली कारण से जोड़ नहीं पाते.
यह कितना खतरनाक है?
हंतावायरस संक्रमण गंभीर हो सकता है, खासकर जब यह फेफड़ों को प्रभावित करता है.
- कुछ प्रकारों में मृत्यु दर 30-40% तक हो सकती है.
- गंभीर मामलों में सांस से जुड़ी गंभीर समस्या हो सकती है.
- इसका कोई खास एंटीवायरल इलाज नहीं है, सिर्फ सपोर्टिव केयर दी जाती है.
इसलिए समय पर पहचान और अस्पताल में इलाज बहुत जरूरी माना जाता है.
किन लोगों को ज्यादा खतरा है?
कुछ लोगों में हंतावायरस का खतरा ज्यादा हो सकता है:
- ऐसे लोग जो चूहों वाले इलाकों में रहते या काम करते हैं.
- कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोग.
- ग्रामीण या जंगल वाले इलाकों में यात्रा करने वाले यात्री.
- बंद या साफ-सफाई की कमी वाली जगहों पर रहने वाले लोग.
क्रूज शिप वाले मामले में माना जा रहा है कि संक्रमण जहाज पर चढ़ने से पहले या जहाज के अंदर संक्रमित वातावरण के कारण हुआ हो सकता है.
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बचाव कैसे करें?
हालांकि आम लोगों के लिए इसका खतरा अभी कम माना जा रहा है, लेकिन कुछ सावधानियां संक्रमण से बचा सकती हैं:
- चूहों या उनके मल से दूरी बनाए रखें.
- साफ-सफाई का ध्यान रखें.
- संक्रमित जगह की सफाई करते समय सुरक्षा उपकरण पहनें.
- खाने-पीने की चीजों को सही तरीके से रखें ताकि चूहे न आएं.
हंतावायरस का इलाज
हंतावायरस का कोई निश्चित इलाज नहीं है, इसलिए मरीज को सपोर्टिव केयर दी जाती है. मरीजों को जल्दी अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में रखा जाता है. सांस लेने में दिक्कत होने पर ऑक्सीजन दी जाती है और गंभीर मामलों में ICU या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है. डॉक्टर शरीर में तरल पदार्थों को नियंत्रित रखते हैं ताकि फेफड़ों में पानी न भरे. कुछ मामलों में डॉक्टर एंटीवायरल दवाएं भी दे सकते हैं.
इलाज में बुखार, ब्लड प्रेशर और दूसरी जटिलताओं को नियंत्रित करना भी शामिल होता है. समय पर इलाज बहुत जरूरी है क्योंकि बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है. खासकर जब सांस लेने में परेशानी शुरू हो जाए तो तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी होता है.
यह क्रूज शिप घटना इस बात की याद दिलाती है कि हंतावायरस जैसे दुर्लभ संक्रमण भी सही परिस्थितियों में गंभीर खतरा बन सकते हैं. यह मुख्य रूप से चूहों के संपर्क से फैलता है, न कि सामान्य इंसानी संपर्क से. इसके शुरुआती लक्षण हल्के लग सकते हैं, लेकिन बाद में गंभीर रूप ले सकते हैं.
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