जब भी हम किसी दूसरे देश के खान-पान के बारे में सोचते हैं, तो दिमाग में अक्सर बर्गर, पिज्जा या किसी अन्य विदेशी फास्ट फूड का ख्याल आता है. हमें ऐसा लगता है कि तवे पर गरमा-गरम रोटी सेकने का चलन सिर्फ भारत या हमारे आस-पास के देशों में ही है. लेकिन क्या आप इस बात पर यकीन करेंगे कि अफ्रीका के एक खूबसूरत देश युगांडा में भी लोग बड़े चाव से रोटी खाते हैं?
जी हां, यह बिल्कुल सच है और वहां की सड़कों पर सुबह से शाम तक वैसे ही तवे पर रोटियां बनती दिखती हैं, जैसे हमारे यहां किसी नुक्कड़ की दुकान पर होती हैं. आइए जानते हैं कि इस विदेशी देश में रोटी का क्या इतिहास है और इसे वहां किस रूप में पसंद किया जाता है.
युगांडा में रोटी को क्या कहते हैं?
युगांडा की सड़कों पर जब आप निकलेंगे, तो वहां की स्थानीय स्वाहिली और अंग्रेजी भाषा में भी इसे बड़े प्यार से 'चपाती' ही कहां जाता है. राजधानी कंपाला की गलियों में कई जगह आपको "Fresh Chapati" के बोर्ड लगे मिल जाएंगे. हालांकि, नाम भले ही हमारे जैसा हो, लेकिन वहां की चपाती हमारे घर की पतली और सादी रोटी जैसी नहीं होती. युगांडा की चपाती हमारे यहां के लच्छा या परतदार परांठे जैसी होती है, जो बाहर से कुरकुरी और अंदर से बेहद नरम होती है.
भारतीय रोटी अफ्रीका कैसे पहुंची?
इस दिलचस्प कहानी के तार करीब सौ साल पुराने इतिहास से जुड़े हुए हैं. 19वीं सदी के आखिर में जब अंग्रेजों का शासन था तब युगांडा और केन्या के बीच रेलवे लाइन बिछाने का काम चल रहा था. इस प्रोजेक्ट के लिए भारत के पंजाब और गुजरात जैसे इलाकों से हजारों मजदूरों को वहां ले जाया गया था.
जब ये भारतीय मजदूर वहां गए, तो वे अपने साथ अपनी संस्कृति और खाने की आदतें भी लेते गए. वे दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद शाम को अपने हिस्से के आटे से रोटियां बनाते थे. धीरे-धीरे वहां के स्थानीय अफ्रीकी लोगों को भी इस भारतीय स्वाद से प्यार हो गया. समय बीतता गया, कई भारतीय वहीं बस गए और उनकी रसोई की यह चपाती देखते ही देखते पूरे युगांडा की जान बन गई. आज यह वहां के खान-पान का ऐसा हिस्सा है कि लोग इसे अपना ही पारंपरिक भोजन मानते हैं.
हमारे परांठे से कितनी अलग है युगांडा की चपाती?
इसे बनाने का तरीका हमारी आम रोटियों से थोड़ा अलग होता है,
- आटे का चुनाव: हमारे यहां जहां चोकर वाले आटे का इस्तेमाल होता है, वहीं युगांडा में ज्यादातर मैदे या बहुत महीन पिसे हुए सफेद आटे का उपयोग किया जाता है.
- तेल का भरपूर इस्तेमाल: आटा गूंथते समय ही उसमें काफी सारा तेल और नमक मिला दिया जाता है, जिससे वह बहुत मुलायम हो जाता है.
- परतें बनाने का तरीका: लोई को बेलते वक्त बीच में तेल लगाकर उसका रोल बनाया जाता है और फिर दोबारा गोल बेला जाता है, ताकि सेकते वक्त अच्छी परतें उभर सकें.
किस चीज के साथ खाई जाती है चपाती?
- बीन्स स्टू: राजमा जैसी बीन्स की गाढ़ी रसेदार सब्जी के साथ इसे खाना वहां आम बात है.
- नॉन-वेज सूप: कई लोग इसे मटन या बीफ के गाढ़े सूप के साथ खाना पसंद करते हैं.
- चाय के साथ: सुबह के समय गर्मागर्म चपाती को मीठी दूध वाली चाय में डुबोकर खाना वहां के लोगों को बहुत भाता है.
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