आजकल वजन घटाने के चक्कर में लोग बिना सोचे-समझे दवाइयां खरीदने लगे हैं. सोशल मीडिया पर रील्स और तरह-तरह के पोस्ट देखकर कोई भी दवा मंगा लेना अब आम बात हो गई है. लेकिन अब सरकार इस मनमानी पर पूरी तरह रोक लगाने जा रही है. केंद्र सरकार एक ऐसा नया नियम लाने की तैयारी में है जिससे वजन घटाने वाली दवाओं के विग्यापन, गलत प्रचार और बिना पर्चे की बिक्री पर भारी लगाम लगेगी.
अब सिर्फ दवा बनाने वाली कंपनियां ही नहीं, बल्कि मेडिकल स्टोर, होलसेलर और डिस्ट्रीब्यूटर भी सीधे सरकार की निगरानी में होंगे.
GLP-1 Drugs क्या हैं?
GLP-1 (Glucagon-Like Peptide-1) दवाएं मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए विकसित की गई थीं. कुछ मामलों में डॉक्टर इन्हें मोटापे और वजन प्रबंधन के लिए भी लिखते हैं. इन दवाओं का उपयोग केवल योग्य चिकित्सक की सलाह पर ही किया जाना चाहिए.
आखिर सरकार क्यों उठा रही है यह कदम
दरअसल GLP-1 नाम की दवाएं जो आमतौर पर टाइप 2 डायबिटीज और कुछ खास सूरतो में वजन घटाने के लिए डॉक्टर लिखते हैं, उनकी मांग बहुत तेजी से बढी है.
लोग बिना डॉक्टर की सलाह के सिर्फ इंटरनेट पर देखकर ये दवाएं मांगने लगे हैं. कई जगह बिना पर्चे के धडल्ले से इनकी बिक्री हो रही थी. सोशल मीडिया पर वजन घटाने के नाम पर चोरी-छिपे इन दवाओं को बढावा दिया जा रहा था. इसी खतरे को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कड़े नियम बनाने का फैसला किया है.
मेडिकल स्टोर पर CCTV कैमरे लगाने की भी तैयारी
सरकार सिर्फ विग्यापन ही नहीं, बल्कि दुकानों से दवा बेचने के तरीके पर भी नजर रख रही है. कुछ ही हफ्ते पहले सरकार ने प्रस्ताव दिया था कि मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं.
दुकानदारों को इन कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 3 महीने तक संभालकर रखनी होगी. इससे यह साफ पता चल सकेगा कि बिना डॉक्टर के पर्चे के कौन सी दवा किसको बेची गई है.
बीमारी के नाम पर छुपा विग्यापन अब नहीं चलेगा
आपने देखा होगा कि कई बार सीधे दवा का नाम नहीं लिया जाता. मोटापा घटाने के कैंपेन, इन्फ्लुएंसर के वीडियो या फिटनेस चर्चा के नाम पर परदे के पीछे से किसी खास दवा को प्रमोट कर दिया जाता है. इसे सरोगेट विज्ञापन कहते हैं.
ड्रग रेगुलेटर CDSCO ने साफ कर दिया है कि अवेयरनेस या सलाह की आड़ में चोरी-छुपे ब्रांड चमकाने का यह खेल अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा. मार्च में ही 49 ऐसी जगहों पर जांच की गई थी जिनमें ऑनलाइन फार्मेसी, स्लिमिंग क्लिनिक और वेलनेस सेंटर शामिल थे.
GLP-1 दवाओं को लेकर सरकार की 5 बड़ी चिंताएं
- बिना पर्चे बिक्री
- सोशल मीडिया प्रमोशन
- भ्रामक विज्ञापन
- ऑनलाइन दवा खरीद
- गलत इस्तेमाल से स्वास्थ्य जोखिम
नियमों में क्या बड़ा बदलाव हो रहा है
पहले नियम यह था कि कंपनियां बिना सरकारी इजाजत के शेड्यूल H, H1 और X वाली सख्त दवाओं का विग्यापन नहीं कर सकती थीं. लेकिन इसमें मेडिकल स्टोर और डिस्ट्रीब्यूटर पूरी तरह साफ दायरे में नहीं आते थे.
अब ड्राफ्ट नियम में बदलाव करके दुकानदारों, थोक व्यापारियों और सप्लायरों को भी शामिल किया जा रहा है. यानी अब कोई भी दुकानदार अपने बैनर, पोस्टर या सोशल मीडिया पेज पर इन दवाओं का प्रचार नहीं कर पाएगा. बिना केंद्र सरकार की मंजूरी के इन दवाओं का किसी भी स्तर पर प्रचार पूरी तरह गैरकानूनी होगा.
आम लोगों और कारोबारियों को 30 दिन का समय
यह नियम अभी ड्राफ्ट के रूप में सामने आया है. सरकार ने आम जनता और दवा कारोबार से जुड़े लोगों से 30 दिनों के भीतर अपनी राय और आपत्तियां भेजने को कहा है. इसके बाद ही इसे पक्का कानून बनाया जाएगा.
अगर आप भी वजन घटाने के लिए सोशल मीडिया पर देखकर कोई दवा लेने की सोच रहे हैं, तो रुक जाइए. बिना डॉक्टर की जांच और सही पर्चे के ऐसी दवाएं लेना सेहत के लिए बहुत बड़ा जोखिम बन सकता है.
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए दी गई है. इसे किसी योग्य डॉक्टर की सलाह का विकल्प न समझें. कोई भी दवा शुरू करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से जरूर मिलें.
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