विज्ञापन

एक छोटी सी गलती, मूंगफली ने रोक दी नन्ही सांसें! फरिदाबाद में मासूमों की जान और मौत के बीच खौफनाक जंग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ एक साल और आठ महीने के इन दोनों बच्चों को गंभीर हालत में अमृता अस्पताल लाया गया. डॉक्टरों का कहना है कि अगर कुछ मिनटों की भी और देरी होती, तो नतीजा बेहद भयावह हो सकता था.

एक छोटी सी गलती, मूंगफली ने रोक दी नन्ही सांसें! फरिदाबाद में मासूमों की जान और मौत के बीच खौफनाक जंग
बच्चे की दाहिनी मुख्य एयरवे में एक मूंगफली पूरी तरह फंसी हुई थी.
Photo: AI

कई बार जिंदगी में ऐसा लगता है कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातें कभी बड़ा खतरा नहीं बन सकतीं. खासकर बच्चों के मामले में माता-पिता अक्सर सोचते हैं कि हल्की खांसी, सर्दी या सांस की परेशानी कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाएगी. लेकिन, फरीदाबाद में सामने आए दो मामलों ने इस सोच को झकझोर कर रख दिया. एक आम सर्दी जैसा दिन, दो परिवारों के लिए अचानक मौत से जंग में बदल गया, जब उनके नन्हे बच्चों के फेफड़ों में खाने के कण फंस गए और उनकी सांसें रुकने लगीं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ एक साल और आठ महीने के इन दोनों बच्चों को गंभीर हालत में अमृता अस्पताल लाया गया. डॉक्टरों का कहना है कि अगर कुछ मिनटों की भी और देरी होती, तो नतीजा बेहद भयावह हो सकता था.

एक हफ्ते तक चली साधारण खांसी की सच्चाई:

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पहला बच्चा, जिसकी उम्र करीब एक साल तीन महीने थी, पिछले एक हफ्ते से खांसी और सांस लेने में दिक्कत से जूझ रहा था. परिवार को लगा कि यह जिद्दी खांसी है, लेकिन जब हालत बिगड़ने लगी और ऑक्सीजन लेवल गिर गया, तो बच्चे को अस्पताल लाया गया. पीडियाट्रिक आईसीयू में जांच के बाद डॉक्टरों ने इमरजेंसी ब्रोंकोस्कोपी की.

पल्मोनरी मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सौरभ पाहुजा के अनुसार, बच्चे की दाहिनी मुख्य एयरवे में एक मूंगफली पूरी तरह फंसी हुई थी. नमी के संपर्क में आने से मूंगफली फूल गई थी, जिससे पूरे फेफड़े में हवा की सप्लाई बंद हो गई. समय रहते इसे निकाल लिया गया और कुछ ही घंटों में बच्चे का ऑक्सीजन लेवल सामान्य होने लगा. अगले दिन उसे घर भेज दिया गया. बच्चे के पिता ने कहा, "हमें लगा यह सिर्फ खांसी है, हमें अंदाजा ही नहीं था कि फेफड़े में कुछ फंसा हुआ है."

जब ऑक्सीजन 40% तक गिर गया

दूसरा मामला और भी डरावना था. सिर्फ आठ महीने के बच्चे को अस्पताल लाया गया, जिसका ऑक्सीजन सैचुरेशन महज 40 प्रतिशत था. बच्चा करीब 10 दिनों से बीमार था. जांच में पता चला कि बाएं फेफड़े में गहराई तक कोई बाहरी चीज फंसी हुई है.

डॉ. पाहुजा के मुताबिक, "इंतजार का समय नहीं था, हर मिनट कीमती था." बच्चे के छोटे एयरवे और कम ऑक्सीजन रिजर्व के कारण ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था. जब सामान्य उपकरण काम नहीं आए, तो एडवांस्ड क्रायोथेरेपी तकनीक की मदद से फंसी हुई चीज को सुरक्षित तरीके से निकाला गया. कई दिनों तक फंसे रहने के कारण फेफड़ों में सूजन और नुकसान हो चुका था, इसलिए बच्चे को दो-तीन दिन तक गहन निगरानी में रखा गया. बाद में उसकी हालत स्थिर होने पर डिस्चार्ज किया गया. बच्चे की मां ने कहा, "हमें कहा गया था कि शायद हमारा बच्चा रात न निकाल पाए. आज उसे सामान्य सांस लेते देखना किसी चमत्कार से कम नहीं."

डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामले माता-पिता की सोच से कहीं ज्यादा आम हैं. खाना खिलाते समय अचानक खांसी, घरघराहट या सांस लेने में दिक्कत को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर ये लक्षण एक दिन से ज्यादा रहें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

हर माता-पिता के लिए जरूरी सीख:

  • छोटे बच्चों को मूंगफली, काजू जैसी सख्त और छोटी चीजें न दें.
  • खाना खाते समय बच्चों पर लगातार नजर रखें.
  • छोटी वस्तुएं बच्चों की पहुंच से दूर रखें.

डॉक्टरों के मुताबिक, यह एक रोकी जा सकने वाली त्रासदी थी. समय पर इलाज से इन दोनों बच्चों की जान बच गई, लेकिन अगर देर हो जाती, तो कहानी बिल्कुल अलग हो सकती थी.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Faridabad Food Tragedy, Peanut Mishap Children, Kids Breathing Difficulty, Peanuts In Lungs, Child Health Crisis Faridabad Accident, Food Safety Issue, Lung Obstruction Kids
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com