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कब आ रहा है मानसून : घिर-घिर आएंगे बदरा, फिर-फिर आएंगे बदरा, संग में कुछ रोग ला सकते हैं बदरा... | Monsoon Diseases and Prevention Tips

Explainer: Monsoon Diseases and Prevention Tips: पूर्वानुमान के मुताबिक इस साल मानसून 1 जून से भारत में प्रवेश कर सकता है. मानसून की शुरुआत अपने साथ लाती है ढेर सारी बीमारियां और कई तरह के संक्रमण. इस लेख में विस्तार से जानें मानसून के बारे में, मानसून में होने वाले रोगों के बारे में और बरसात में होने वाली बीमारियों से बचाव के उपायों के बारे में.

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कब आ रहा है मानसून : घिर-घिर आएंगे बदरा, फिर-फिर आएंगे बदरा, संग में कुछ रोग ला सकते हैं बदरा... | Monsoon Diseases and Prevention Tips

Explainer: Monsoon Diseases and Prevention Tips: मौसम विभाग द्वारा जारी साल 2024 के मानसून (Monsoon 2024) को लेकर जारी पूर्वानुमान के मुताबिक इस साल मानसून 1 जून से भारत में प्रवेश कर सकता है. लेकिन मानसून की शुरुआत अपने साथ लाती है ढेर सारी बीमारियां (Monsoon Diseases) और कई तरह के संक्रमण. जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकते हैं. लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर आप मानसून में कुछ बुनियादी सावधानियां बरतते हैं तो सेहतमंद रह सकते हैं. इस लेख में विस्तार से जानें मानसून के बारे में, मानसून में होने वाले रोगों के बारे में और बरसात में होने वाली बीमारियों से बचाव के उपायों के बारे में. 

मानसून क्या है? (What Is a Monsoon?)

मानसून शब्द अरबी शब्द मौसिम से आया है, जिसका अर्थ है "मौसम". अक्सर जब लोग मानसून के बारे में सोचते हैं, तो कई दिनों और हफ्तों तक होने वाली भारी बारिश का ख्याल करते हैं. जबकि असल में बरसात जो है वो मानसून का हिस्सा भर है. मानसून महज बरसात से कहीं अलग है. मासनूस अपने आप में हमारे वातावरण की एक पूरी प्रक्रिया या घटना है. ये बिलकुल भी जरूरी नहीं कि मानसून बरसात ही लाए, कई बार ये शुष्क मौसम का कारण बन सकता है. तो मानसून है क्या और ये घटना आखिर घटित कैसे होती है. इसका जवाब है कि मानसून हवा की दिशा में बदलाव के कारण होता है जो मौसम बदलने पर होता है.

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What Is a Monsoon?  मानसून हवा की दिशा में बदलाव के कारण होता है जो मौसम बदलने पर होता है.

कम शब्दों में मानसून हवाओं का बदलाव है, जो अक्सर बहुत ज्यादा बरसात वाले मौसम या बहुत शुष्क मौसम का कारण बनता है. हालांकि मानसून आमतौर पर एशिया के कुछ हिस्सों से जुड़ा होता है, यह कई उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी हो सकता है - जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका के कई हिस्से भी शामिल हैं.

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क्यों आता है, मानसून का कारण क्या है? (What Are Monsoons and Why Do They Happen?)

मानसून हवाओं में मौसमी बदलाव के कारण होता है. अब हवाओं में बदलाव क्यों होता है. तो जब मौसम बदलने के कारण जमीन और जल का तापमान बदलता है, तो इसका सीधा असर हवांओं पर होता है और वे हवाएं अपना रुख बदल लेती हैं. इसे ऐसे समझें जब गर्मियों की शुरुआत होती है तो जमीन जल स्रोतों यानी वॉटर बॉडीज से पहले और जल्दी गर्म होती है. और मानसूनी हवाएं हमेशा ठंडी से गर्म की ओर बहती हैं. गर्मियों में जब जमीन ज्यादा गर्म होती है तो ये मानसूनी हवाएं इस क्षेत्र की ओर आती हैं और इधर बरसात करती हैं.

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How does monsoon occur? गर्मियों में जब जमीन ज्यादा गर्म होती है तो ये मानसूनी हवाएं इस क्षेत्र की ओर आती हैं और इधर बरसात करती हैं. Image Credit: Getty

मानसून को नक्शे पर समझते हैं

अभी तक आपने समझा कि मानसून असल में क्या है. अब नक्शे पर इसका मलबत समझते हैं. मानसून उन हवाओं को कहा जाता है जो हिन्द महासागर और अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आती हैं. ये भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों में भारी वर्षा का कारण बनती हैं. इन्हें मौसमी हवाएं भी कहा जा सकता है.

भारत में मानसून कब शुरू होता है?

जैसा कि हमने आपको बताया हिन्द महासागर एवं अरब सागर की ओर से आनी वाली मौसमी हवाएं मानसून हैं, जिनके साथ दक्षिणी एशिया क्षेत्र में बरसात आती है. भारत में मानसून दक्षिण-पश्चिम तट पर जून माह में आता है. सितंबर तक इसका असर देखने को मिलता है. कुल मिलकार जून से शुरू हुआ इन मौसमी हवाओं का प्रभाव चार महीने तक रहता है.

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When will Monsoon 2024 hit India: मानसून भारत में 1 जून को दस्तकत दे सकता है.

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अगर मानसून जून में आता है, तो अप्रैल-मई महीने में बरसात क्यों हुई

बीते कुछ सालों से अप्रैल-मई के महीने में भी भारी बरसात देखी जा रही है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसका कारण क्लाइमेट चेंज है. वहीं वेस्टर्न डिस्टरबेंस (Western Disturbance) भी इसके पीछे के कारण बने. बीते कुछ सालों से अप्रैल महीने में वेस्टर्न डिस्टरबेंस देखने को मिल रहा है. जिसके चलते ये बिना मानसून की बरसात देखी गई. इस बरसात के पीछे का कारण होती हैं वेस्टर्न डिस्टरबेंस से बनने वाली चक्रवाती हवाएं न कि मौसमी बदलाव.

कब आएगा मानसून | कब, कहां आ रहा है मानसून | Monsoon 2024 Arrival dates for major Indian cities in Hindi

मौसम विभाग द्वारा जारी साल 2024 के माससून को लेकर जारी पूर्वानुमान के मुताबिक इस साल करीब 106 फीसदी बारिश की संभावना है. हालांकि इसमें 5 फीसदी कम ज्यादा हो सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक इस साल मानसून 1 जून से भारत में प्रवेश कर सकता है. यह केरल में 1 जून, कर्नाटक, असम, त्रिपुरा और गोवा में 5 जून, तेलंगाना, सिक्किम और महाराष्ट्र में 10 जून, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में 15 जून के आसपास दस्तकद दे सकता है. वहीं लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में 20 जून तक प्रवेश कर सकता है.

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गर्मी से जलते भारत को कब मिलेगी राहत। मानसून कब और कहां पहुंचेगा. Image Cerdit: mausam.imd.gov.in

मौसम विभाग के मुताबिक साल 2024 में बेहतर मानसून की संभावना के पीछे अल नीनो प्रभाव है, जो धीरे-धीरे कमजोर हो रही है. इससे अगस्त -सितंबर के बीच ला नीना की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसका अर्थ यह लगाया गया है कि इस वजह से बारिश सामान्य से अधिक हो सकती है.

क्या है अल-नीनो और ला-नीना

देखिए चर्चा जो चला वो कहां तक आ पहुंचा. हमने मानसून जाना, फिर समझा कि मानसून आता कैसे है साल 2024 में मानसून कब आएगा. इसके साथ ही हमें पता चला कि इस साल ला नीना की स्थिति के चलते बारिश सामान्य से ज्यादा हो सकती है. अब समझते हैं कि ये अल-नीनो और ला-नीना क्या हैं.
जैसा कि हमने आपको बताया. मानसून मौसम बदलने से हवा के रुख में होने वाला बदलाव है. आमतौर पर हवाएं भूमध्य रेखा के साथ पश्चिम की ओर बहती हैं, जो समुद्र के गर्म पानी को दक्षिण अमेरिका से एशिया की ओर ले जाती हैं. अब गर्म पानी को ठंडा करने के लिए समुंद्र के नीचे का पानी ऊपरी सतह पर आता है. इससे दो विपरीज जलवायु पैटर्न अल-नीनो और ला-नीना बनते हैं.

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What are El Nino and La Nina?: क्या है अल-नीनो और ला-नीना Image Credt: Getty.


अल-नीनो क्या है: जब यह हवा मजबूत होती है, तो दक्षिण अमेरिका से ज्यादा गर्म पानी एशिया की तरफ आता है. यह अल-नीनो की स्थिति है. जिससे वातावरण में एक कूलिंग प्रभाव पैदा होता है.
ला नीना क्या है : वहीं, जब यह हवाएं कमजोर होती हैं, तो एशिया की लाया जाने वाला गर्म पानी कम मात्रा में इधर आता है. तो समुद्र की गहरायी का ठंडा पानी ऊपर नहीं आता. इससे वातावरण में गर्म प्रभाव पैदा होता है. जिसे ला नीना के नाम से जाना जाता है.ला नीना होने पर ज्यादा बरसात होती है.

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मानसून के साथ आती हैं मानसूनी बीमारियां

हमने आपको मानसून की तो पूरी जानकारी दी. और आपको यह भी पता चला कि मानसून इस बार पूरे जोर पर होगा और बरसात अधिक होने की संभावना है. मानसून सुनते ही ज्यादातर लोग खुशी से झूम उठते हैं. और साल 2024 में गर्मी ने जो बदमाशी की हुई है उसके बाद तो हर कोई मानसून के ही इंतजार में है. लेकिन मानसून की शुरुआत अपने साथ लाती है ढेर सारी बीमारियां और कई तरह के संक्रमण. जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकते हैं. लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर आप मानसून में कुछ बुनियादी सावधानियां बरतते हैं तो सेहतमंद रह सकते हैं.


मानसून में होने वाले आम रोग | बरसात के मौसम में कौन कौन से रोग होते हैं? | Monsoon Diseases in Hindi

भारत में मानसून के दौरान होने वाले रोग मुख्यतः तीन तहर से फैलते या होते हैं.
पहले मच्छर जनित रोग, दूसरे दूषित पानी, हवा और भोजन से हाने वाले रोग, तीसरे संक्रामक रोग.

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Mosquito-Borne Diseases: डेंगू और मलेरिया जैसे रोग भारत में बेहद आम हो जाते हैं मानसून के दौरान. Image Credit: Istock

I- मच्छर जनित रोग

मानसून मच्छरों के पनने के लिए सबसे अच्छा मौसम या वक्त है. और भारत में मच्छर और मच्छर से होने वाले रोग बड़ी समस्या हैं. डेंगू और मलेरिया जैसे रोग भारत में बेहद आम हो जाते हैं मानसून के दौरान. एक अनुमान के अनुसार भारत में हर साल पूरी दुनिया में सामने आए डेंगू के मामलों का 35 फीसदी तो मलेरिया के मामलों का 11 फीसदी होता है.

डेंगू: डेंगू का वायरस एडेनोस मच्छर के काटने से फैलता है. भले डेंगू जंगल की आग की तरह फैल रहा है, लेकिन यह संक्रामक बीमारी नहीं है. यह छूने या छींकने से नहीं फैलता है, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के आसपास रहने पर सावधान रहना चाहिए. आमतौर पर वायरल सर्दी से अन्य वायरस और कीटाणु शरीर को संक्रमित कर सकते हैं.

चिकनगुनिया: चिकनगुनिया का वायरस कुछ दिनों तक बुखार और जोड़ों के दर्द का कारण बनता है जो हफ्तों या महीनों तक रह सकता है. चिकनगुनिया एक वायरल फीवर है जो संक्रमित मच्छरों के काटने से होता है. चिकनगुनिया वायरस इनफेक्टेड मच्छर जब किसी व्यक्ति को काट लेता है तो यह वायरस उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है. चिकनगुनिया के संक्रमण होने पर अचानक बुखार और जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है.

मलेरिया: मलेरिया एक जानलेवा मच्छर जनित रक्त रोग है. लक्षणों में बुखार, ठंड लगना और सिरदर्द शामिल हैं. यह परजीवी संक्रमित मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है.

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Monsoon Diseases and Prevention in Hindi: मानसून में होने वाले आम रोग. 

मच्छर जनित रोगों से बचाव के उपाय :

  • जहां मच्छरों का प्रकोप ज्यादा हो वहां आने जाने से बचें.
  • मच्छर से बचने के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें.
  • मच्छर या कीड़े भगाने वाली क्रीम का उपयोग करें.
  • घर और उसके आसपास पानी इकट्ठा न होने दें
  • लंबी स्लीव्स की शर्ट और पैंट पहनें.
  • घर के अंदर और बाहर मच्छरों को कंट्रोल करने के लिए जरूरी कदम उठाएं.
  • स्वच्छता बनाए रखें और अपने बाथरूम को नियमित रूप से साफ करें
  • मच्छरों से खुद के बचाव के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें.
  • मच्छर मारने या भगाने वाली दवा का छिड़काव करें.
  • खूब सारा पानी पिएं और खुद को हाइड्रेटेड रखें.

II- दूषित पानी, हवा और भोजन से हाने वाले रोग

हैजा: हैजा भी आंत का ही एक गंभीर संक्रमण है. हैजा विब्रियो कॉलेरी नाम के जीवाणु से होता है. यह छोटी आंत में बैक्टीरिया द्वारा के पहुंच जाने पर होता है. इसमें दस्त, उल्टी हो सकते हैं.

हेपेटाइटिस ए : हेपेटाइटिस ए मानसून में होने वाले वायरल संक्रमणों में से एक है. यह भी आपके लिवर को प्रभावित करता है. यह लिवर में भयंकर सूजन का कारण बन सकता है.

टाइफाइड: टाइफाइड (Typhoid) बुखार एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है. यह दूषित पानी या खाने की वजह से होता है. टाइफाइड में पाचन तंत्र प्रभावित होता है. यह आंतों के रास्ते को प्रभावित करता है. यही वहज है इसे “आंतों का बुखार” भी कहा जाता है. अगर यह रक्तप्रवाह में फैल जाए तो जानलेवा हो सकता है.

पीलिया : दूषित भोजन और पानी से पीलिया हो सकता है. पीलिया सबसे आम लिवर डिसऑर्डर में से एक है जिसमें हमारे ब्लड फ्लो में बिलीरुबिन का लेवल बढ़ जाता है. बिलीरुबिन एक पीले रंग का तरल पदार्थ होता है जो की पित्त (बाइल) में पाया जाता है. यह रेड ब्लड सेल्स (Red Blood Cells) के टूटने से और बोन मैरो सेल से बनता है.

लेप्टोस्पायरोसिस : मानसून के दौरान गंदे पानी के कारण यह होता है. इसे वैल'स डिजीज के नाम से भी जाना ताजा है.

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण : गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण बैक्टीरिया, वायरल या परजीवी से हो सकता है. इसके लक्षणों में दस्त, पेट में ऐंठन और मतली शामिल हो सकते हैं.

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Waterborne diseases:  टाइफाइड (Typhoid) बुखार एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है. यह दूषित पानी या खाने की वजह से होता है.


मानसून में दूषित पानी, हवा और भोजन से हाने वाले रोगों से बचने के उपाय

  • पानी उबाल कर पिएं.
  • फल और सब्जियों को खाने से पहले अच्छे से धो लें.
  • खाना ढककर रखें.
  • बाजार में बनने वाले भोजन से दूरी बनाएं.
  • खाना बनाते समय हाथों अच्छी तरह साफ करें.
  • शौच के बाद हाथों को साबुन से धोएं.
  • बच्चे का टीकाकरण पूरा करें.

III- हवा से संचारित होने वाले रोग

सर्दी और फ्लू: जैसा कि हमने बताया मानसून हवा में होने वाला मौसमी बदलाव है. इस दौरान हवा से फैलने वाले कई संक्रमण बढ़ जाते हैं. जो सर्दी, खांसी, सामान्य फ्लू, वायरल बुखार जैसी समस्याओं का कारण बनते हैं. इस दौरान कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग जैसे बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा प्रभावित होते हैं. इस दौरान सामान्यतः सर्दी और फ्लू और इन्फ्लुएंजा होते हैं.

मानसून में हवा से संचारित होने वाले रोगों से कैसे बचें

  • मास्क लगाकर रखें.
  • छींकते और खांसते समय मुंह और नाक को ढक लें.
  • गर्म पानी पिएं.
  • हाथों को बार बार धोते रहें.
  • हाथों से चेहरे को छूने से बचें.
  • प्रभावित लोगों से दूरी बनाएं.
  • घर की वेंटिलेशन बेहतर करें.
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मानसून में खुद को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये टिप्स :

* मानसून के दौरान अपने पेट को आराम दें. बेहद तलाभुना न खाएं. अपने आहार को हल्का रखें. हल्का भोजन खाएं.
* मानसून के दौरान संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है. इससे बचने के लिए अपने सब्जियों और फलों को सिरके से धोएं.
* बेशक बरसात हो रही है और आपको पसीना कम आ रहा हो, लेकिन मानसून में हमेशा अपने आप को हाइड्रेटेड रखें.
* जैसा कि हमने बताया मानसून में मच्छर जनित रोग बहुत फैलते हैं. ऐसे में मच्छरों से बचने के लिए हर उपाय अपनाएं. पूरी आस्तीन वाले हल्के कपड़े पहनें.
* प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाएं. इसके लिए संतुलित आहार लें.
* साफ, ताजा, धुले हुए फल और सब्जियां खाएं. तले-भुने, तेल और सोडियम से भरपूर आहार न लें. डेयरी उत्पादों के सेवन से बचें.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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