मिर्गी का दौरा पड़ते ही अक्सर आपने देखा होगा कि लोग बोलते हैं, 'जल्दी से इसे जूता सूंघा दो, ठीक हो जाएगा.' लेकिन क्या सच में ऐसा होता है या ये सिर्फ एक मिथक है. ये जानने के लिए हमने सीके बिड़ला हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. केके जिंदल से बातचीत की है. उनसे हमने मिर्गी से जुड़ी कुछ मिथक और उसके सच को जानने की कोशिश की है.
डॉक्टर जिंदल का कहना है कि दुनियाभर में मिर्गी एक आम न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में से एक है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 5 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं. इसके बावजूद आज भी इस बीमारी को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं और अंधविश्वास लोगों में फैल रही हैं, जो मरीजों की स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं.
आगे उनका कहना है कि मिर्गी कोई श्राप, भूत-प्रेत का साया या सजा नहीं है, बल्कि ये दिमाग की विद्युत गतिविधियों में अस्थाई गड़बड़ी के कारण होने वाली एक मेडिकल कंडीशन है. यहां विस्तार से जानते हैं मिर्गी के दौरे से जुड़े कुछ मिथक और उनकी सच्चाई-

मिथक 1: मिर्गी के दौरे के दौरान मुंह में चम्मच या कपड़ा डालना चाहिए?
सच : डॉक्टर बताते हैं कि ये सबसे खतरनाक मिथक है कि दौरा पड़ने पर मरीज अपनी जीभ निगल सकता है, इसलिए उसके मुंह में चम्मच, कपड़ा या उंगली डाल देनी चाहिए. डॉक्टर बताते हैं कि जीभ निगलना शारीरिक रूप से संभव ही नहीं है. ऐसा करने से दांत टूट सकते हैं, जबड़े में चोट लग सकती है या मरीज का दम भी घुट सकता है.
दौरे के समय सिर्फ मरीज को करवट पर लिटाएं, सिर के नीचे कोई मुलायम चीज रखें, आसपास की खतरनाक वस्तुएं हटा दें और दौरे की अवधि पर नजर रखें.
मिथक 2: मिर्गी से पीड़ित महिलाएं मां नहीं बन सकतीं
सच : इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर कहते हैं कि कई परिवार आज भी मानते हैं कि मिर्गी वाली महिलाओं को गर्भधारण नहीं करना चाहिए. ये धारणा पूरी तरह गलत है. सही मेडिकल सलाह, दवाओं के उचित प्रबंधन और नियमित निगरानी के साथ अधिकांश महिलाएं स्वस्थ गर्भावस्था और स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं. डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद करना मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिमभरा हो सकता है.
मिथक 3: मिर्गी छूने से फैलती है या बुरी आत्माओं का असर है?
सच : ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में आज भी कई लोग मिर्गी को बुरी आत्माओं या किसी श्राप से जोड़ते हैं. इस वजह से मरीजों को सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है. डॉक्टर कहते हैं कि मिर्गी न तो छूने से फैलती है और न ही साथ बैठने, खाने या सांस लेने से. इसके कारणों में आनुवंशिक कारक, सिर की चोट, संक्रमण, स्ट्रोक या मस्तिष्क से जुड़ी अन्य समस्याएं शामिल हो सकती हैं.
मिथक 4: क्या मिर्गी के मरीज सामान्य जीवन नहीं जी सकते हैं?
सच : बहुत से लोग सोचते हैं कि मिर्गी का मतलब नौकरी, शादी और फ्री लाइफ का अंत है. जबकि हकीकत ये है कि सही इलाज से अधिकतर मरीज पढ़ाई, नौकरी, शारी और पारिवारिक जीवन सामान्य रूप से जी सकते हैं.
अंत में डॉ. जिंदल ने कहा कि मिर्गी से जुड़े अंधविश्वास मरीजों को इलाज लेने से रोकते हैं. कई लोग अपनी बीमारी छिपाते हैं या समय पर डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते. इसलिए जरूरी है कि लोग तथ्यों को समझें और मिथकों पर नहीं, विज्ञान पर भरोसा करें. सही जानकारी ही मिर्गी के मरीजों के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा है.
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