Uttarakhand Mountain Life: उत्तराखंड के पहाड़ों पर 1 साल पहले बनाए घर को एक परिवार छोड़कर जाने को मजबूर हो गया है. इंस्टाग्राम पर उत्तराखंड के एक कंटेंट क्रिएटर सचिन सिंह ने घर छोड़ने का कारण बताया है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर अलग-अलग वीडियो शेयर किया है, जिसमें घर छोड़ने और फिर दूसरी जगह शिफ्ट होने में आए खर्च के बारे में जानकारी दी. सचिन ने वीडियो में बताया कि पिछले साल उनके घर के सामने एक खतरनाक लैंडस्लाइड हुआ था, जिसके बाद खतरा काफी बढ़ गया और हम लोगों को घर छोड़कर यहां से जाना पड़ा.
जुलाई 2023 में हुआ था गृह प्रवेश
इंस्टाग्राम पर शेयर किए वीडियो में सचिन ने बताया कि हम लोगों का सपना था, बस एक अपना बढ़िया सा घर हो, जहां पर हम चैन से रह सकें. इसके बाद हम लोगों ने बड़ी मेहनत करके अपना नया घर बनाया. परिवार ने उत्तराखंड के पहाड़ों पर अपना नया घर बनाया था, जहां पर भारी बारिश के होते ही भू स्खलन का खतरा बना रहता है. और इस परिवार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.
युवक ने बताया कि घर पूरी तरह से बनने के बाद 2023 में जुलाई में गृह प्रवेश हुआ. लाइफ भी धीरे-धीरे सही चलने लगी. इसके बाद नए घर में रहते हुए एक साल ही बीते थे कि 2024 के अगस्त में घर के आगे खतरनाक लैंडस्लाइड हुआ.
तेज बारिश के बाद इस साल आई दरार
पर परिवार ने जिस सपने के साथ नया घर बनाया था, उस पर खतरा टला नहीं. उत्तराखंड के युवक ने बताया कि इस साल जैसे ही मानसून आया और तेज बारिश होने लगी तो हमारे घर के आगे दरारें आना शुरू हो गई. इसके बाद घर की हालात को देखते हुए परिवार ने दूसरी जगह शिफ्ट होने का फैसला लिया है. यूट्यूबर व कंटेंट क्रिएटर सचिन अपने परिवार के साथ शहर शिफ्ट हो गया. उसने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए वीडियो में बताया कि सिर्फ यही एक कारण नहीं है यहां से शिफ्ट होने का. और भी कई सारे कारण हैं.
अपने घर से शहर के किराए के घर में शिफ्ट होने पर कितना आया खर्च?
उसने बताया कि इसके साथ हम सब लोगों की जिंदगी की एक नई जर्नी स्टार्ट होने वाली है. उत्तराखंड के पहाड़ों में बने अपने घर को छोड़कर शहर में किराए के घर में शिफ्ट होने वाले सचिन ने दूसरी वीडियो में पहले महीने का खर्च बताया कि उसने बताया कि गांव से शहर में शिफ्ट होने के बाद पहले महीने का खर्च निकाला तो देखकर सबके तोते उड़ गए. उसने बताया कि 26 सितंबर को गांव से शहर आए पूरा एक महीना हो गया.
अगर खर्च की बात करें तो 9-10 हजार रुपये कमरे का किराया था. जब शहर में आए तो टैक्सी के 800 पड़े. आने के बाद जरूरी सामान लिया. सोने के लिए गद्दे, तकिए, चद्दर, बर्तन और पूरा हिसाब किया तो 8,879 रुपये खर्च हुआ. इसके बाद 6वें दिन मम्मी को अस्पताल जाना पड़ा. वहां टेस्ट के 800 पड़े और 2,764 रुपये की दवाईयां आईं. इसके बाद भाई का कॉलेज एडमिशन में 2,755 रुपये फीस देनी पड़ी. हमने सोचा था 15-20 हजार में हो जाएगा, पर यह तो दोगुना से भी ज्यादा था.
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