किसी व्यक्ति को अचानक दौरा पड़ते देखना आसपास मौजूद लोगों के लिए घबराहट का कारण बन सकता है. ऐसी स्थिति में अक्सर लोग व्यक्ति के मुंह में चम्मच, कपड़ा या कोई अन्य वस्तु डालने की कोशिश करते हैं या उसके हाथ-पैर पकड़कर झटके रोकने का प्रयास करते हैं. हालांकि, ये दोनों तरीके नुकसानदायक हो सकते हैं. नारायणा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद कुमार लकेसर का कहना है कि दौरा पड़ने के दौरान सबसे जरूरी है व्यक्ति को चोट से बचाना और उसकी सांस की नली को सुरक्षित रखना.
मुंह में कुछ भी न डालें
डॉक्टर कहते हैं दौरे के दौरान व्यक्ति के मुंह में चम्मच, उंगली, कपड़ा, पानी या कोई अन्य वस्तु नहीं डालनी चाहिए. लोगों में यह आम धारणा है कि ऐसा करने से व्यक्ति अपनी जीभ नहीं निगलेगा, लेकिन यह सही नहीं है. दौरे के दौरान जबड़े की मांसपेशियां जोर से सिकुड़ सकती हैं, जिससे मुंह में डाली गई वस्तु से दांत या मुंह में चोट लग सकती है और वस्तु टूटकर सांस की नली में जा सकती है. व्यक्ति की जीभ को पकड़ने की कोशिश करना भी खतरनाक है.
व्यक्ति को पकड़कर न रखें
दौरे के दौरान हाथ-पैर के झटकों को जबरदस्ती रोकने या व्यक्ति को जमीन पर दबाकर रखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. इससे व्यक्ति या मदद करने वाले दोनों को चोट लग सकती है. इसके बजाय आसपास रखी नुकीली, कठोर या खतरनाक वस्तुओं को हटा दें. यदि व्यक्ति गिर रहा हो तो उसे सुरक्षित तरीके से जमीन पर आने में मदद करें और सिर के नीचे कोई मुलायम चीज रख सकते हैं.
सही फर्स्ट एड क्या है?
- दौरा शुरू होते ही सबसे पहले शांत रहें और समय नोट करें.
- व्यक्ति के आसपास पर्याप्त जगह बनाएं.
- गले के आसपास के बहुत कसे हुए कपड़े ढीले करें और चश्मा हटा दें.
- अगर व्यक्ति जमीन पर है और सुरक्षित रूप से संभव हो, तो उसे धीरे से करवट दिलाएं, खासकर जब वह होश में न हो.
- इससे लार या उल्टी जैसी चीजों को सांस की नली में जाने से रोकने में मदद मिलती है.
- व्यक्ति के पूरी तरह होश में आने तक उसके साथ रहें.
- पूरी तरह सतर्क होने से पहले उसे पानी, खाना या मुंह से कोई दवा न दें, क्योंकि उसके निगलने में परेशानी हो सकती है और वह चोक कर सकता है.
कब तुरंत मेडिकल मदद लें?
यदि दौरा 5 मिनट से ज्यादा चले, एक दौरे के तुरंत बाद दूसरा दौरा पड़ जाए, व्यक्ति को चोट लगी हो, सांस लेने में परेशानी हो, दौरा पानी में पड़ा हो या यह व्यक्ति का पहला दौरा हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए. गर्भावस्था या डायबिटीज जैसी स्थितियों में भी तत्काल चिकित्सा मदद लेना जरूरी है.
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