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डीजे वाले बाबू कहीं जान ना ले लें!...डॉक्टर ने बताया, लाउड म्यूजिक से किन्हें ज्यादा खतरा

DJ Noise Side Effects : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक महिला की बीजे के तेज म्यूजिक की वजह से मौत हो गई. इस तरह की घटना से सवाल उठता है कि आखिर किन लोगों को लाउड म्यूजिक से दूरी बनाकर रखना चाहिए. यहां जानते हैं- 

डीजे वाले बाबू कहीं जान ना ले लें!...डॉक्टर ने बताया, लाउड म्यूजिक से किन्हें ज्यादा खतरा
Loud Music Affect Heart Health : तेज आवाज से किन लोगों को दूरी बनाकर रखनी चाहिए?

Loud Music Risk: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के एक गांव में कथित तौर पर तेज आवाज में बज रहे DJ के पास से गुजरते समय एक 60 वर्षीय महिला की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई. यह घटना बीते सोमवार को अलीगंज क्षेत्र के महोलिया गांव की है. बताया जा रहा है कि कमला देवी नाम की महिला अपनी बहू नानू के साथ गौरी शंकर मंदिर में जलाभिषेक के लिए जा रही थीं. इस दौरान डीजे की तेज अवाज के कारण महिला की मौत हो गई. इस तरह की घटनाएं जब सामने आती हैं, तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि आखिर किन लोगों को लाउज म्यूजिक के आसपास नहीं जाना चाहिए? यहां हम आपके इन्हीं सवालों के जवाब देने जा रहे हैं. आइए सीके बिड़ला हॉस्पिटल के डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी,  डॉ. अंशुल कुमार जैन से जानते हैं लाउड म्यूजिक से किन लोगों को ज्यादा खतरा रहता है?

लाउड म्यूजिक शरीर पर कैसे असर डालती है?

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल का कहना है कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक बहुत तेज आवाज के संपर्क में रहता है, तो इसकी वजह से शरीर में स्ट्रेस बढ़ने लगता है. इससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकते हैं. डीजे की तेज आवाज कुछ लोगों में घबराहट, बेचैनी और चक्कर जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकती है.

किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

हार्ट के मरीज : अगर किसी को पहले से हार्ट की बीमारी है, तो ऐसे लोगों को लाउड म्यूजिक से दूर रहने की सलाह दी जाती है. 

हाई ब्लड प्रेशर के मरीज : तेज आवाज के कारण ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है. इसलिए बीपी के मरीजों को ऐसी जगहों पर ज्यादा देर न करने की सलाह दी जाती है. 

बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं : डॉक्टर का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की सहन क्षमता कम हो जाती है. तेज शोर बुजुर्गों में स्ट्रेस और हेल्थ संबंधी दिक्कतें बढ़ा सकता है. वहीं, प्रेग्नेंसी में बहुत ज्यादा शोर से बचना चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से स्ट्रेस बढ़ सकता है. 

माइग्रेन और एंग्जायटी : अगर आपको माइग्रेन, एंग्जायटी या पैनिक अटैक की समस्या रहती है, उनमें तेज आवाज ट्रिगर का काम कर सकती है. ऐसे लोगों को भी तेज आवाज से दूर रहने की सलाह दी जाती है.

कितनी आवाज को माना जाता है खतरनाक?

डॉक्टर का कहना है कि सामान्य बातचीत करीब 60 डेसिबल की होती है. वहीं, डीजे और लाउडस्पीकर की आवाज कई बार 100 डेसिबल से ऊपर पहुंच जाती है. लंबे समय तक इतनी तेज आवाज के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है.

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