Diwali Shopping Tips: दिवाली की खरीदारी के लिए बाजारों में भीड़ बढ़ने लगी है. लोग कपड़े, मिठाइयां और सजावटी सामान खरीदने के लिए बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकल रहे हैं. लेकिन त्योहार की चमक-दमक के साथ वायु प्रदूषण भी चिंता बढ़ा रहा है. दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई शहरों में जब भी घर से बाहर निकलते हैं, तो चारों को धुंधला सा नजर आता है. ये कोहरा नहीं, बल्कि बढ़ता AQI लेवल है. इ दिनों दिल्ली-एनसीआर का AQI खराब से गंभीर श्रेणी तक पहुंच रहा है. ऐसे में दूषित हवा में घंटों शॉपिंग करना फेफड़ों की सेहत पर भारी पड़ सकता है.
सीके बिड़ला हॉस्पिटल, गुरुग्राम के एसोसिएट डायरेक्टर पल्मोनोलॉजी एंड क्रिटिकल केयर डॉ. कुलदीप कुमार ग्रोवर का कहना है कि दिवाली के दौरान लोग अक्सर प्रदूषण को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन थोड़ी सी सावधानी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है.
बाहर निकलने से पहले चेक करें AQI
दिवाली शॉपिंग पर जाने से पहले अपने इलाके का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) जरूर देखें. अगर AQI बहुत खराब या गंभीर श्रेणी में है तो गैर-जरूरी बाहर जाने से बचें. साथ ही भीड़भाड़ और ज्यादा ट्रैफिक वाले बाजारों में लंबे समय तक रुकने से भी बचना चाहिए.
2. N95 मास्क पहनें
प्रदूषण से बचाव के लिए N95 मास्क सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है. साधारण कपड़े या सर्जिकल मास्क की तुलना में यह हवा में मौजूद PM2.5 जैसे सूक्ष्म कणों को रोकने में अधिक मदद करता है. ध्यान रखें कि मास्क नाक और मुंह दोनों को अच्छी तरह कवर करे.
3. सही समय देखकर शॉपिंग करने के लिए निकलें
कई बार सुबह और देर शाम के समय प्रदूषण ज्यादा हो सकता है. इसलिए घर से निकलने से पहले स्थानीय AQI की जांच करना जरूरी है. ट्रैफिक पीक आवर्स से बचकर और कम समय में खरीदारी पूरी करके आप प्रदूषित हवा के संपर्क को कम कर सकते हैं.
4. शरीर को हाइड्रेट रखना है जरूरी
भीड़भाड़ वाले बाजारों में तेज चलना, भारी बैग उठाना और लगातार इधर-उधर घूमना सांस लेने की गति बढ़ा देता है. इससे शरीर में ज्यादा प्रदूषित हवा पहुंच सकती है. पर्याप्त पानी पिएं, समय-समय पर आराम करें और जरूरत पड़ने पर नाक की नमी बनाए रखने के लिए सलाइन स्प्रे का इस्तेमाल कर सकते हैं.
5. बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को लेकर रहें सतर्क
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या COPD जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर प्रदूषण का असर ज्यादा पड़ता है. अगर खांसी, सांस फूलना, सीने में जकड़न, घरघराहट या गले में जलन जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.
स्मॉग और कोहरे में अंतर समझना भी जरूरी
डॉ. ग्रोवर का कहना है कि कोहरा सिर्फ पानी की सूक्ष्म बूंदों से बनता है, जबकि स्मॉग में PM2.5, PM10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक प्रदूषक शामिल होते हैं. जब कोहरा और प्रदूषण एक साथ मिलते हैं तो हवा और अधिक जहरीली हो जाती है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
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