Cobra Pose For Kidney Stone: आज की डिजिटल दुनिया में मोबाइल, लैपटॉप और घंटों कुर्सी पर बैठे रहने की आदत ने हमारे रूटीन को बेहद सुस्त बना दिया है. पहले जहां लोग पैदल चलते थे, खेतों या घर के कामों में सक्रिय रहते थे, वहीं अब ज्यादातर समय स्क्रीन के सामने गुजर रहा है. इसका सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है. अंदरूनी अंग ठीक से काम नहीं कर पाते, मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और धीरे-धीरे कई बीमारियां जन्म लेने लगती हैं.
इन्हीं बीमारियों में एक गंभीर समस्या है किडनी से जुड़ी परेशानी, खासकर पथरी. गलत खान-पान, कम पानी पीना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण अब कम उम्र के लोग भी किडनी स्टोन की समस्या से जूझ रहे हैं. जब किडनी में पथरी बनती है, तो शरीर के अंदर जमा गंदगी सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाती.
इससे तेज दर्द, पेशाब में जलन और कई बार संक्रमण तक हो जाता है. आमतौर पर लोग दवाइयों या ऑपरेशन का सहारा लेते हैं, लेकिन अगर समय रहते लाइफस्टाइल सुधारी जाए, तो इस परेशानी से काफी हद तक बचा जा सकता है. योग इसी दिशा में एक सरल और प्राकृतिक उपाय माना जाता है.
सर्पासन क्या है और क्यों है खास?
योग में कई ऐसे आसन हैं जो शरीर के अंदरूनी अंगों पर सीधा असर डालते हैं. इन्हीं में से एक प्रभावी आसन है सर्पासन, जिसे भुजंगासन या कोबरा पोज भी कहा जाता है. यह आसन दिखने में जितना आसान है, असर में उतना ही गहरा माना जाता है.
सर्पासन में पेट के बल लेटकर शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाया जाता है. इस दौरान पेट, कमर और रीढ़ की हड्डी पर हल्का दबाव पड़ता है. यही दबाव किडनी के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करता है, जिससे वहां जमा विषैले तत्व बाहर निकलने की प्रक्रिया तेज होती है.
किडनी और पथरी पर कैसे असर डालता है सर्पासन?
पथरी बनने की एक बड़ी वजह यह है कि किडनी ठीक से साफ नहीं हो पाती. सर्पासन करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. किडनी तक ज्यादा ऑक्सीजन और पोषण पहुंचता है. किडनी की सफाई प्रक्रिया तेज होती है.
रेगुलर प्रैक्टिस से छोटी पथरी धीरे-धीरे टूटकर पेशाब के रास्ते बाहर निकलने में मदद कर सकती है. यही कारण है कि योग विशेषज्ञ पथरी के शुरुआती चरण में सर्पासन को उपयोगी मानते हैं.

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रीढ़ और कमर के दर्द में भी फायदेमंद | Beneficial for Back and Lower Back Pain
आजकल कमर और पीठ दर्द आम समस्या बन गई है. लंबे समय तक बैठने से रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है. सर्पासन पीठ की मांसपेशियों को खींचता है. रीढ़ में लचीलापन लाता है. कमर दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है. मजबूत रीढ़ का सीधा असर शरीर के बाकी अंगों की कार्यक्षमता पर भी पड़ता है.
तनाव, पाचन और त्वचा के लिए सर्पासन के फायदे:
मानसिक तनाव भी कई बीमारियों की जड़ होता है. सर्पासन करते समय गहरी सांस ली जाती है, जिससे फेफड़े बेहतर काम करते हैं. दिमाग तक ज्यादा ऑक्सीजन पहुंचती है. मन शांत होता है और तनाव कम होता है.
इसके अलावा, यह आसन डाइजेशन सिस्टम को एक्टिव करता है, जिससे पेट साफ रहता है. बेहतर ब्लड सर्कुलेशन के कारण त्वचा और चेहरे पर भी प्राकृतिक चमक आने लगती है.
सर्पासन करने की सही विधि:
- पेट के बल जमीन पर लेट जाएं.
- हथेलियों को छाती के पास रखें.
- सांस लेते हुए धीरे-धीरे शरीर को ऊपर उठाएं.
- सिर को हल्का पीछे ले जाकर ऊपर देखें.
- 10-20 सेकंड इसी अवस्था में रहें.
- सांस छोड़ते हुए वापस आ जाएं.
रोजाना कुछ मिनट सर्पासन करने से शरीर में धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगते हैं. किडनी की पथरी जैसी समस्या में योग कोई जादू नहीं, लेकिन सही समय पर अपनाया गया यह प्राकृतिक उपाय शरीर को अंदर से मजबूत जरूर बनाता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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