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17 साल से कम उम्र वालों के लिए सिगरेट हमेशा के लिए बैन, UK बना रहा स्मोग-फ्री जनरेशन, जानें भारत में क्या हैं नियम

UK में 2008 के बाद जन्मे बच्चों के लिए धूम्रपान पर प्रतिबंध को मंजूरी दे दी गई है. इसका मतलब है कि आज के बच्चे भविष्य में कानूनी तौर पर कभी सिगरेट नहीं खरीद पाएंगे.

17 साल से कम उम्र वालों के लिए सिगरेट हमेशा के लिए बैन, UK बना रहा स्मोग-फ्री जनरेशन, जानें भारत में क्या हैं नियम
UK Smoking Ban: यूके सरकार ने 2008 के बाद जन्मे बच्चों के लिए धूम्रपान पर प्रतिबंध को मंजूरी दे दी है.

Smoke Free Generation: कल्पना कीजिए एक ऐसी दुनिया, जहां आने वाली पीढ़ी को सिगरेट छूने का मौका ही न मिले. UK ने इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. 2008 के बाद जन्मे बच्चों के लिए धूम्रपान पर प्रतिबंध को मंजूरी दे दी गई है. इसका मतलब है कि आज के बच्चे भविष्य में कानूनी तौर पर कभी सिगरेट नहीं खरीद पाएंगे. यह फैसला सिर्फ कानून नहीं, बल्कि एक मजबूत हेल्थ मिशन है. सरकार का टारगेट है स्मोक-फ्री जनरेशन बनाना, ताकि आने वाले सालों में कैंसर, दिल की बीमारी और फेफड़ों की दिक्कतों जैसी समस्याएं कम हो सकें. यह कदम दुनिया भर के देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है.

क्या है यह नया कानून और क्यों खास है?

UK संसद से पास हुआ तंबाकू और वेप्स बिल सिर्फ सिगरेट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वेपिंग (ई-सिगरेट) और निकोटीन प्रोडक्ट्स पर भी सख्त नियम लागू किए जाएंगे. सरकार को इनके फ्लेवर, पैकेजिंग और बिक्री को कंट्रोल करने की नई शक्तियां मिलेंगी. इसका सीधा मकसद है, युवाओं को शुरुआत से ही इन आदतों से दूर रखना. क्योंकि रिसर्च बताती है कि ज्यादातर लोग धूम्रपान की शुरुआत किशोरावस्था में ही करते हैं.

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सेहत पर धूम्रपान का असली असर:

धूम्रपान सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि धीमा जहर है. इसके कारण कई गंभीर बीमारियां होती हैं. जैसे फेफड़ों का कैंसर, दिल की बीमारी, सांस की समस्या, कमजोर इम्यूनिटी.

UK सरकार के मुताबिक, धूम्रपान वहां रोकी जा सकने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है. यानी अगर लोग स्मोकिंग छोड़ दें, तो हजारों जानें बच सकती हैं.

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युवाओं पर फोकस क्यों?

किशोरों का दिमाग अभी विकसित हो रहा होता है, ऐसे में निकोटीन जल्दी लत बन जाती है. वेपिंग को अक्सर कम नुकसानदायक समझा जाता है, लेकिन यह भी फेफड़ों और दिमाग पर असर डालती है. इसलिए यह कानून शुरुआत को ही रोकने की कोशिश करता है, क्योंकि अगर शुरुआत नहीं होगी, तो लत भी नहीं लगेगी.

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भारत और बाकी दुनिया के लिए क्या सीख?

भारत जैसे देशों में भी स्मोकिंग और वेपिंग तेजी से बढ़ रही है, खासकर युवाओं में. UK का यह मॉडल एक संकेत देता है कि अगर सख्त नियम और जागरूकता साथ-साथ चलें, तो बड़ी हेल्थ समस्याओं को रोका जा सकता है.

भारत में क्या हैं नियम?

भारत में धूम्रपान पूरी तरह बैन नहीं है, लेकिन इसे कंट्रोल करने के लिए सख्त कानून मौजूद हैं. COTPA Act 2003 (Cigarettes and Other Tobacco Products Act) के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू बेचना गैरकानूनी है. स्कूल/कॉलेज के 100 मीटर के अंदर तंबाकू की बिक्री प्रतिबंधित है. सार्वजनिक जगहों (जैसे ऑफिस, मॉल, बस स्टैंड) पर स्मोकिंग बैन है. सिगरेट के पैकेट पर 85% तक हेल्थ वार्निंग अनिवार्य है.

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भारत में कितने किशोर इसकी चपेट में?

एक ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (GYTS 2019) के अनुसार, 13-15 साल के बच्चों में 8.5% किशोर तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं. लड़कों में 9.6% और लड़कियों में 7.4% उपयोग देखा गया. करीब 4.1% किशोर सिगरेट पीते हैं और उतने ही स्मोकलेस तंबाकू (गुटखा आदि) लेते हैं.

WHO और अन्य रिपोर्ट्स बताती हैं कि, कई बच्चे 10 साल से पहले ही तंबाकू ट्राई कर लेते हैं. हर दिन लगभग 5000 नए किशोर तंबाकू की आदत शुरू कर देते हैं. अनुमान है कि 5% से 25% तक भारतीय किशोर कभी न कभी तंबाकू का उपयोग कर चुके हैं.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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