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शरीर जवाब दे रहा है, फिर भी नहीं आ रही नींद? दिमाग हो सकता है इसकी वजह

शरीर थका होने के बावजूद नींद नहीं आती? तनाव, मोबाइल, कैफीन, स्लीप एपनिया और अनियमित दिनचर्या इसके पीछे हो सकते हैं. जानिए एक्सपर्ट की सलाह.

Medically Reviewed By: Dr Praveen Gupta
शरीर जवाब दे रहा है, फिर भी नहीं आ रही नींद? दिमाग हो सकता है इसकी वजह
शरीर थका होने के बावजूद नींद क्यों नहीं आती?
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दिनभर काम करने के बाद शरीर थका हुआ महसूस करता है, आंखों में नींद होती है और आराम करने की इच्छा भी होती है, लेकिन बिस्तर पर जाने के बाद भी नींद नहीं आती. कई लोगों के लिए यह स्थिति परेशान करने वाली होती है. आमतौर पर लोग इसे केवल तनाव या थकान से जोड़कर देखते हैं, लेकिन लगातार नींद में परेशानी के पीछे मानसिक तनाव के साथ-साथ मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम की सक्रियता, अनियमित दिनचर्या और कुछ अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकते हैं.

मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS), मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. प्रवीण गुप्ता के मुताबिक, शरीर की थकान और नींद आने की प्रक्रिया हमेशा एक-दूसरे के अनुरूप नहीं होती. व्यक्ति शारीरिक रूप से थका हुआ होने के बावजूद मानसिक रूप से अत्यधिक सक्रिय रह सकता है, जिसके कारण उसे नींद आने में कठिनाई होती है.

डॉ. प्रवीण गुप्ता कहते हैं, “कई बार शरीर थक जाता है, लेकिन मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम पूरी तरह शांत नहीं हो पाते. दिनभर का तनाव, चिंता, काम का दबाव, पारिवारिक या आर्थिक चिंताएं और अगले दिन की जिम्मेदारियों के बारे में लगातार सोचते रहना व्यक्ति को hyperarousal की स्थिति में रख सकता है. ऐसी स्थिति में शरीर को आराम की जरूरत होने के बावजूद दिमाग लगातार सक्रिय रहता है और नींद आने में परेशानी होती है.”

शरीर थका, लेकिन दिमाग को आराम नहीं

डॉ. गुप्ता के अनुसार, नींद केवल शरीर के थक जाने से नहीं आती. इसके लिए मस्तिष्क का भी धीरे-धीरे शांत अवस्था में जाना जरूरी है. यदि कोई व्यक्ति रात तक लगातार काम करता है, मोबाइल या लैपटॉप पर सक्रिय रहता है अथवा सोने से ठीक पहले तनावपूर्ण गतिविधियों में लगा रहता है, तो उसका दिमाग आराम की स्थिति में जाने के बजाय सक्रिय बना रह सकता है.

डॉक्टर गुप्ता के अनुसार, “आज की जीवनशैली में लोगों का दिमाग सोने के समय भी लगातार काम करता रहता है. दिनभर की घटनाओं को दोहराना, आने वाले दिन की चिंता करना या लगातार फोन और सोशल मीडिया से जुड़े रहना मस्तिष्क को आराम की स्थिति में जाने से रोक सकता है. इसलिए नींद के लिए शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी शांत करना जरूरी है,”.

देर रात तक मोबाइल भी बन सकता है वजह

सोने से पहले मोबाइल फोन, लैपटॉप या अन्य डिजिटल स्क्रीन का लंबे समय तक इस्तेमाल भी नींद की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. लगातार मिलने वाले मैसेज, सोशल मीडिया अपडेट, वीडियो और काम से जुड़े नोटिफिकेशन मस्तिष्क को सक्रिय बनाए रखते हैं.

डॉ. गुप्ता बताते हैं कि “सोने से ठीक पहले लगातार स्क्रीन देखने की आदत नींद की प्राकृतिक प्रक्रिया में बाधा डाल सकती है. विशेष रूप से जब व्यक्ति बिस्तर पर जाने के बाद भी फोन का इस्तेमाल करता रहता है, तो उसका मस्तिष्क आराम और नींद के बजाय सक्रियता की अवस्था में बना रह सकता है. इसलिए सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना उपयोगी आदत हो सकती है.”

कैफीन और बिगड़ी दिनचर्या भी जिम्मेदार

शाम या देर रात में चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक अथवा अन्य कैफीनयुक्त पेय का सेवन भी कुछ लोगों में नींद आने में देरी कर सकता है. कैफीन का असर हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है, इसलिए जिन लोगों को पहले से नींद आने में परेशानी है, उन्हें शाम के बाद कैफीन के सेवन पर ध्यान देना चाहिए.

इसके अलावा रोज अलग-अलग समय पर सोना और जागना भी शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी को प्रभावित कर सकता है.

डॉ. गुप्ता के अनुसार, “नींद के लिए एक नियमित sleep-wake cycle बनाए रखना महत्वपूर्ण है. यदि कोई व्यक्ति कभी देर रात सोता है और कभी जल्दी, तो शरीर की आंतरिक घड़ी प्रभावित हो सकती है. लंबे समय तक ऐसा होने पर नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है और दिन में थकान, चिड़चिड़ापन तथा एकाग्रता में कमी महसूस हो सकती है.”

हर बार तनाव ही कारण नहीं होता

लगातार नींद न आने की समस्या को केवल तनाव या चिंता मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कुछ मामलों में insomnia के पीछे sleep apnea, restless legs syndrome, कुछ दवाओं का प्रभाव, thyroid जैसी चिकित्सकीय स्थितियां या अन्य sleep disorders भी हो सकते हैं.

डॉ. गुप्ता कहते हैं, “अगर किसी व्यक्ति को पर्याप्त समय बिस्तर पर रहने के बावजूद नियमित रूप से नींद नहीं आती या उसकी नींद बार-बार टूटती है, तो इसके कारणों की जांच करना जरूरी है. खासकर यदि इसके साथ दिन में अत्यधिक नींद, लगातार थकान, जोरदार खर्राटे या नींद में सांस रुकने जैसी समस्या हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.”

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

कभी-कभार नींद न आना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि यह समस्या लगातार बनी रहे और दिन के सामान्य कामकाज को प्रभावित करने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

यदि व्यक्ति को पर्याप्त नींद लेने का अवसर मिलने के बावजूद दिनभर थकान रहती है, रात में बार-बार नींद खुलती है, सुबह बहुत जल्दी नींद खुल जाती है, दिन में अत्यधिक नींद आती है या रात में सांस लेने में परेशानी होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

कई लोग दिनभर थकान महसूस करते हैं लेकिन रात को नींद नहीं आती. विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे तनाव, स्क्रीन टाइम, कैफीन, अनियमित स्लीप शेड्यूल या स्लीप डिसऑर्डर जिम्मेदार हो सकते हैं.

नींद की दवा या मेलाटोनिन खुद से न बढ़ाएं

नींद की समस्या होने पर कुछ लोग स्वयं sleeping pills या melatonin की मात्रा बढ़ाने लगते हैं. डॉ. गुप्ता के अनुसार, ऐसा करने के बजाय पहले समस्या के वास्तविक कारण को समझना जरूरी है.

डॉक्टर गुप्ता न कहा, “नींद न आने पर खुद से दवा या melatonin की मात्रा बढ़ाना उचित नहीं है. यदि समस्या बार-बार हो रही है, तो पहले यह पता लगाना जरूरी है कि इसके पीछे तनाव, अनियमित sleep schedule, sleep disorder या कोई अन्य चिकित्सकीय कारण तो नहीं है. कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार तय किया जाना चाहिए,” .

बेहतर नींद के लिए अपनाएं ये आदतें

डॉ. गुप्ता के मुताबिक, बेहतर नींद के लिए कुछ बुनियादी आदतों को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है. रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें. दिन में पर्याप्त फिजिकल एक्टिविटी रखें, देर शाम कैफीन का सेवन सीमित करें और सोने से पहले मोबाइल तथा लैपटॉप का इस्तेमाल कम करें.

इसके अलावा बिस्तर को काम करने या लंबे समय तक मनोरंजन करने की जगह के बजाय नींद से जोड़ना भी उपयोगी हो सकता है.

डॉ. प्रवीण गुप्ता ने कहा- 

“अच्छी नींद के लिए केवल शरीर को थकाना पर्याप्त नहीं है. मस्तिष्क को भी आराम और नींद के लिए तैयार करना जरूरी है. नियमित दिनचर्या, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, सोने से पहले शांत वातावरण और स्क्रीन टाइम में कमी नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकती है. यदि इन उपायों के बावजूद समस्या बनी रहती है, तो चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना बेहतर है,” .
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