जन्म के बाद से ही बच्चे की सुरक्षा करना हर माता-पिता की प्राथमिकता होती है. लेकिन एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बच्चों की नींद से जुड़े ऐसे रिस्क ने लोगों को अपनी ओर खींचा है, जो बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं. अमेरिकी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (CDC) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, अचानक और अप्रत्याशित शिशु मृत्यु (SUID) के अधिकांश मामलों में असुरक्षित नींद की परिस्थितियां जुड़ी हुई थीं.
बता दें कि SUID एक साल से कम उम्र के बच्चों की अचानक होने वाली मौतों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है. इसमें सडन इंफैंट डेथ सिंड्रोम (SIDS), बिस्तर में दम घुटने से हुई मौत और ऐसे मामले शामिल हैं, जिनमें मौत की सटीक वजह का पता नहीं चल पाता.
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रिपोर्ट में क्या मिला?
CDC ने 2020 से 2024 के बीच दर्ज 4,861 मामलों का विश्लेषण किया. जांच में पाया गया कि 73 प्रतिशत मामलों में बच्चों के सोने के माहौल में एक या अधिक असुरक्षित कारक मौजूद थे. विश्लेषण में सामने आया कि 78 प्रतिशत मामलों में बच्चे के आसपास मुलायम बिस्तर, तकिया या अन्य सामान मौजूद था.
75 प्रतिशत बच्चों को पालने या बासिनेट की बजाय किसी दूसरी सतह पर सुलाया गया था. वहीं, 59 प्रतिशत मामलों में बच्चा किसी अन्य व्यक्ति या पालतू जानवर के साथ एक ही सतह पर सो रहा था. लगभग 46 प्रतिशत बच्चों को पीठ के बजाय करवट या पेट के बल सुलाया गया था.
बच्चे को सुलाने का सही तरीका क्या है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि नवजात और छोटे बच्चों को हमेशा पीठ के बल सुलाना सबसे सुरक्षित माना जाता है. बच्चे के लिए मजबूत और सपाट गद्दे वाला पालना या बासिनेट इस्तेमाल करना चाहिए. सोने की जगह में तकिया, कंबल, खिलौने या अन्य मुलायम वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि ये दम घुटने का रिस्क बढ़ा सकती हैं. बच्चा माता-पिता के कमरे में सो सकता है, लेकिन उसकी सोने की सतह अलग होनी चाहिए. एक ही बिस्तर पर बच्चे को सुलाने से रिस्क बढ़ सकता है.
क्यों जरूरी है जागरूकता?
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुरक्षित नींद से जुड़े नियमों का पालन कर बड़ी संख्या में शिशु मौतों को रोका जा सकता है. इसलिए माता-पिता, दादा-दादी और बच्चों की देखभाल करने वाले सभी लोगों को सुरक्षित नींद के नियमों की जानकारी होना बेहद जरूरी है.
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