क्या आपको भी छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ जाता है? तनाव, खराब नींद और लगातार मानसिक दबाव की वजह से चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. योग विशेषज्ञों के अनुसार भ्रामरी प्राणायाम एक ऐसा आसान ब्रीदिंग एक्सरसाइज है, जो तनाव कम करने, दिमाग को शांत रखने और गुस्से को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है.
आजकल की जिंदगी इतनी तेज हो गई है कि हर कोई किसी न किसी बात को लेकर भागा दौड़ी में लगा रहता है. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक बस काम का प्रैशर, ऑफिस की टेंशन, बच्चों की चिंता और घर की जिम्मेदारियां. इन सब चक्करों में सबसे बुरा असर हमारी नींद और हमारे मूड पर पड़ता है.
जब शरीर को पूरा आराम नहीं मिलता और दिमाग लगातार सोचता रहता है, तो उसका नतीजा ये होता है कि हम चिड़चिड़े होने लगते हैं. कई बार तो घर या ऑफिस में किसी ने जरा सी बात कही नहीं कि हमारा पारा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है.
गुस्सा और तनाव कम करने में कैसे मदद करता है भ्रामरी प्राणायाम?
अचानक इतना तेज गुस्सा आता है कि हम सामने वाले पर चिल्ला पड़ते हैं. लेकिन जब थोड़ी देर बाद गुस्सा ठंडा होता है और दिमाग शांत होता है, तब खुद ही अफसोस होता है कि अरे यार, इतनी सी बात पर इतना भड़कने की क्या जरूरत थी. अगर आपके साथ भी अक्सर ऐसा होता है, तो समझ लीजिए कि आपके दिमाग को अब थोड़े आराम और शांति की सख्त जरूरत है.
गुस्से और तनाव से निपटने के लिए योग में एक बहुत ही जबरदस्त और सरल तरीका बताया गया है, जिसे भ्रामरी प्राणायाम कहते हैं. यह एक ऐसा अभ्यास है जिसे कोई भी इंसान बहुत आसानी से कर सकता है. इसके लिए आपको कोई बहुत भारी कसरत करने की जरूरत नहीं है. बस दिन भर में से कुछ मिनट अपने लिए निकालने होते हैं.

भ्रामरी प्राणायाम करने का सही तरीका
भ्रामरी प्राणायाम का नाम भ्रामरी इसलिए पड़ा है क्योंकि जब हम इसे करते हैं, तो सांस छोड़ते वक्त भौंरे की तरह 'हम्म्...' की गूंज वाली आवाज निकालते हैं. जैसे एक भौंरा फूलों के आसपास गुनगुनाता है, बिल्कुल वैसी ही वाइब्रेशन हमारे गले और सिर में महसूस होती है. जब आप यह आवाज निकालते हैं और अपनी सांसों पर ध्यान लगाते हैं, तो आपका दिमाग फालतू की भागदौड़ और बेकार के विचारों से हटकर सीधे अंदर की तरफ मुड़ जाता है.
रोज भ्रामरी प्राणायाम करने के फायदे
जब भी आपको लगे कि किसी बात पर बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा है और आप अपना आपा खोने वाले हैं, तो तुरंत कोई गलत रिएक्शन देने से बेहतर है कि आप चुपचाप एक जगह बैठ जाएं.
- अपनी आंखें बंद करें और गहरी सांस लेकर भ्रामरी का अभ्यास शुरू कर दें.
- इससे होता ये है कि दिमाग में जो गुस्से का तूफान चल रहा होता है, वो थम जाता है.
- आपको थोड़ा रुककर सोचने का मौका मिल जाता है कि बात वाकई इतनी बड़ी है भी या नहीं. धीमी और गहरी सांसें हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करती हैं, जिससे दिल की धड़कन सामान्य होती है और गुस्सा धीरे धीरे गायब होने लगता है.
सही तरीके से कैसे किया जाए
अब बात करते हैं कि इसे सही तरीके से कैसे किया जाए. इसका तरीका बहुत ही आसान है.
- सबसे पहले घर के किसी शांत कोने में जहां शोर शराबा न हो, आराम से सुखासन या पालथी मारकर बैठ जाएं.
- अगर जमीन पर बैठने में दिक्कत हो तो आप कुर्सी पर भी बैठ सकते हैं, बस ध्यान रहे कि कमर और गर्दन एकदम सीधी होनी चाहिए.
- इसके बाद अपने दोनों हाथों के अंगूठों से दोनों कानों को हल्के से बंद कर लें ताकि बाहर की आवाजें सुनाई न दें.
- अपनी पहली उंगली को माथे पर रखें और बाकी की तीनों उंगलियों को आराम से आंखों के ऊपर रख लें. इसे षण्मुखी मुद्रा भी कहा जाता है.
- अब नाक से एक लंबी और गहरी सांस अंदर खींचें.
- फिर मुंह बंद रखते हुए, भौंरे की तरह 'हम्म्...' की आवाज निकालते हुए धीरे धीरे सांस को बाहर छोड़ें.
- इस दौरान आपका पूरा ध्यान उस कंपन और अपनी सांस पर होना चाहिए जो आपके सिर और गले में महसूस हो रही है.
- जब सांस पूरी बाहर निकल जाए, तो फिर से गहरी सांस लें और इसे दोहराएं.
- शुरुआत में आप इसे 5 से 7 बार कर सकते हैं और बाद में धीरे धीरे अपनी सहूलियत के हिसाब से 10 से 15 बार तक बढ़ा सकते हैं.

Photo Credit: ians
भ्रामरी प्राणायाम के फायदे
अगर आप रोज सुबह या शाम को अपने रूटीन में इस प्राणायाम को शामिल कर लेते हैं, तो इसके कई फायदे देखने को मिलते हैं.
- यह दिमाग की बेचैनी और दिनभर की चिंता को पूरी तरह खत्म करने में मदद करता है.
- इससे मन शांत रहता है, जिससे आपकी काम करने की एकाग्रता यानी फोकस बढ़ता है.
- जिन लोगों को रात में ठीक से नींद नहीं आती या तरह तरह के ख्याल दिमाग में आते रहते हैं, उनके लिए भी यह बहुत फायदेमंद है.
- रात को सोने से पहले इसे करने से दिमाग हल्का हो जाता है और बहुत अच्छी व गहरी नींद आती है.
- हालांकि, इस अभ्यास को करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है.
- प्राणायाम करते वक्त शरीर पर बेवजह का जोर न लगाएं और सांस को बहुत ज्यादा जबरदस्ती रोकने की कोशिश न करें.
- सब कुछ सहज और आराम से होना चाहिए. एक और बात, अगर आपके कान में कोई इंफेक्शन है, दर्द है, या नाक बहुत ज्यादा बंद है और जुकाम की परेशानी है, तो उस समय इसे करने से बचें.
- जब आप पूरी तरह ठीक हो जाएं तभी इसे शुरू करें.
- अगर आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो हमेशा किसी योग ट्रेनर या डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.
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