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बारिश में रोजाना Walk करना कितना सुरक्षित? डॉक्टर ने बताया किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी

बारिश के मौसम में वॉक करनी चाहिए या नहीं. एक्सपर्ट ने बताया कि इस मौसम में वॉक करते समय किन बातों का ध्यान रखें और किन लोगों को सावधानी बरतनें की ज्यादा जरूरत होती है.

बारिश में रोजाना Walk करना कितना सुरक्षित? डॉक्टर ने बताया किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी
बरसात के मौसम में वॉक करनी चाहिए या नहीं?
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मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आता है. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि क्या बारिश के मौसम में रोजाना मॉर्निंग या ईवनिंग वॉक करना सुरक्षित है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश में वॉक करना पूरी तरह से गलत नहीं है, लेकिन मौसम और अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए. लापरवाही करने पर संक्रमण, फिसलकर चोट लगने और पहले से मौजूद बीमारियों के बढ़ने का खतरा हो सकता है. 

आकाश हेल्थ केयर के सीनियर डायरेक्टर डॉ. विक्रम जीत सिंह ने बताया कि, "रोजाना वॉक करना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है और मानसून में भी इसे जारी रखा जा सकता है. हालांकि तेज बारिश, जलभराव, बिजली कड़कने या अत्यधिक नमी वाले मौसम में बाहर निकलने से बचना चाहिए. यदि मौसम अनुकूल न हो तो घर के अंदर ही हल्की एक्सरसाइज या वॉक करना बेहतर ऑप्शन है." 

उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान सड़कों पर पानी जमा होने से बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है. लंबे समय तक गीले जूते और मोजे पहनने से पैरों में फंगल संक्रमण हो सकता है. इसलिए वॉक के बाद पैरों को अच्छी तरह साफ और सूखा रखना जरूरी है. इन लोगों को बरतनी चाहिए विशेष सावधानी डॉ.  के अनुसार कुछ लोगों को मानसून में वॉक के दौरान अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत होती है. 

  • दिल की बीमारी वाले मरीज
  • हाई ब्लड प्रेशर वाले
  • COPD और अस्थमा के मरीज
  • डायबिटीज
  • बुजुर्ग
  • लो इम्यूनिटी वाले लोग

एक्सपर्ट के अनुसार, "अगर किसी व्यक्ति को सांस फूलने, सीने में दर्द, चक्कर आने या अत्यधिक थकान जैसी समस्या महसूस हो तो तुरंत वॉक रोक देनी चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए." 

फिसलन भी बन सकती है बड़ी समस्या

मानसून में सड़कें और पार्क अक्सर फिसलन भरे हो जाते हैं. ऐसे में गिरने और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है. विशेष रूप से बुजुर्गों और घुटनों की समस्या से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. अच्छी ग्रिप वाले स्पोर्ट्स शूज़ पहनना और ऐसी जगहों पर चलना जहां पानी जमा न हो, ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. 

सही समय का रखें ध्यान विशेषज्ञों के अनुसार तेज बारिश या तूफानी मौसम में वॉक करने की बजाय बारिश रुकने के बाद निकलना बेहतर होता है. यदि वातावरण में अत्यधिक प्रदूषण या बिजली गिरने की आशंका हो तो बाहर जाने से बचना चाहिए. सुबह या शाम के समय मौसम साफ होने पर वॉक करना अपेक्षाकृत सुरक्षित रहता है. 

भीगने के बाद क्या करें?

अगर वॉक के दौरान बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचते ही गीले कपड़े बदल लें. शरीर और पैरों को अच्छी तरह सुखाएं तथा आवश्यकता हो तो गुनगुने पानी से स्नान करें. इससे सर्दी, फंगल संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है. 

कितनी देर वॉक करना उचित?

डॉ. विक्रम जीत सिंह बताते हैं कि स्वस्थ व्यक्ति मौसम अनुकूल होने पर 30 से 45 मिनट तक वॉक कर सकते हैं. वहीं जिन लोगों को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, उन्हें अपनी क्षमता और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही वॉक करनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर वॉक की अवधि कम की जा सकती है. मानसून में वॉक पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, लेकिन सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है. मौसम की स्थिति देखें, साफ और सुरक्षित जगह चुनें, फिसलन से बचें और शरीर की क्षमता के अनुसार ही व्यायाम करें. 

यदि पहले से कोई गंभीर बीमारी है तो अपनी दिनचर्या में बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें." विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर मानसून में भी नियमित वॉक की आदत बनाए रखी जा सकती है. इससे शरीर सक्रिय रहता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता को समर्थन मिलता है और मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

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डॉ. विक्रम जीत सिंह - सीनियर डायरेक्टर (यूनिट–I), (इंटरनल मेडिसिन)

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