अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आज संसद भवन में मुलाक़ात हुई, यह मुलाक़ात अकाली दल के अध्यक्ष सुखवीर सिंह बादल की पहल पर हुई उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए वक्त मांगा था , पंजाब मैं अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं ऐसे में ये मुलाक़ात बेहद अहम है सूत्रों के मुताबिक़ सुखबीर बादल ने प्रधानमंत्री को पंजाब की क़ानून व्यवस्था की स्थिति से अवगत कराया सूत्रों के मुताबिक़ अकाली दल चाहता है कि BJP और अकाली दल मिलकर पुरानी परंपरा के मुताबिक़ चुनाव लड़ें.
सूत्रो के मुताबिक़ सुखवीर बादल ने इस मुलाक़ात में प्रधानमंत्री को पंजाब में 550 से ज़्यादा गैंग की जानकारी दी सूत्रों के मुताबिक़ पंजाब में यह गैंग केवल ना केवल स्थानीय कानून व्यवस्था के लिए मुश्किल पैदा कर देते हैं बल्कि साथ ही साथ नशे के कारोबार और अंतरराष्ट्रीय गैंग से भी जुड़े हुए हैं, सूत्र के मुताबिक़ इन्हें गैंग के सदस्य सीमा आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं.
सूत्रो के मुताबिक़ इस मुलाक़ात में चुनाव से पहला पंजाब की राजनीतिक हालत पर विस्तार से चर्चा हुई है, सूत्र बताते हैं की अकाली दल चाहता है की पुरानी परंपरा के मुताबिक़ बीजेपी और अकाली दल फिर मिलकर से चुनाव लड़े.
सूत्रो के मुताबिक़ अगर सब कुछ ठीक रहा तो अकाली दल और बीजेपी का गठबंधन हो सकता है बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक़ बीजेपी 2022 के विधानसभा चुनाव में 37 सीटों पर मज़बूती से चुनाव लड़ी थी और इस बार 37 विधानसभा सीटों की माँग पंजाब में कर सकती है, शेष 80 विधानसभा सीटों पर अकाली दल मैदान में उतर सकता है, हालांकि अकाली दल के सूत्रो के मुताबिक़ 2017 में आखरी विधानसभा चुनाव जब अकाली दल और बीजेपी ने मिलकर लड़ा था तब बीजेपी को 23 सीटें दी गई थी अगर फिर से गठबंधन होता है तो फिर पुरानी परंपरा के मुताबिक़ बीजेपी को 23 सीटें दी जा सकती है.
आख़िरी बार दोनों दल 2017 का विधानसभा चुनाव मिलकर लड़े थे लेकिन 2020 में कृषि क़ानूनों के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री और अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया था, इसके बाद से अकाली दल और बीजेपी की राहें अलग अलग हो गई, बाद में 2024 के लोकसभा चुनाव भी दोनों दल ने अलग अलग होकर लोकसभा चुनाव लड़ा था, 1997 में अटल बिहारी वाजपई और प्रकाश सिंह बदल ने गठबंधन की शुरुआत की थी.
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