वायु प्रदूषण का असर सिर्फ फेफड़ों और सांस की सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर हमारी आंखों पर भी पड़ता है. खासकर जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खराब या बेहद खराब स्तर पर पहुंच जाता है, तब आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और बार-बार पानी आने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. सर्दियों के मौसम में प्रदूषण, धूल और धुएं के संपर्क में आने से यह परेशानी और अधिक महसूस हो सकती है.
नारायणा हॉस्पिटल ऑफ्थैल्मोलॉजी डिपार्टमेंट के विजिटिंग कंसल्टेंट डॉ. अनिल गोयल का कहना है कि हवा में मौजूद बारीक प्रदूषक कण, PM2.5 और PM10, आंखों की बाहरी सतह यानी कंजंक्टाइवा और आंसुओं की प्रोटेक्शन कवर को प्रभावित कर सकते हैं. इससे आंखों में सूखापन, जलन और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. प्रदूषित हवा में मौजूद नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, ओजोन और अन्य केमिकल्स तत्व भी आंखों में परेशानी पैदा कर सकते हैं. जिन लोगों को पहले से एलर्जी, ड्राई आई या आंखों की संवेदनशीलता की समस्या है, उन्हें इसका असर अधिक महसूस हो सकता है.
आंखों को प्रदूषण से कैसे बचाएं?
डॉ. अनिल गोयल का कहना है कि खराब AQI के दौरान आंखों की सुरक्षा के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं. सबसे पहले, जब प्रदूषण का स्तर अधिक हो, तो अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें. बाहर जाते समय अच्छी तरह फिट होने वाले चश्मे या सनग्लासेज का इस्तेमाल करें, ताकि धूल और हवा के सीधे संपर्क को कुछ हद तक कम किया जा सके. आंखों को बार-बार हाथों से छूने या रगड़ने से बचें और बाहर से घर लौटने पर साफ पानी से चेहरे और आंखों के आसपास की स्किन को साफ करें.
लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों का सूखापन बढ़ सकता है, इसलिए बीच-बीच में ब्रेक लें और पलकें झपकाते रहें. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से प्रिजर्वेटिव-फ्री लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है. बिना सलाह के स्टेरॉयड या एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल न करें.
कब डरने की होती है जरूरत
डॉक्टर कहते हैं कि अगर आंखों में लगातार खुजली हो रही है, बार-बार पानी आ रहा है, आंखें लाल रहती हैं या ऐसा महसूस होता है, जैसे उनमें कुछ चला गया हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार लोग आंखों को बार-बार रगड़ते हैं, जिससे जलन और बढ़ सकती है. हालांकि, इन लक्षणों का कारण केवल प्रदूषण ही नहीं होता. एलर्जी, संक्रमण और ड्राई आई जैसी स्थितियां भी इसकी वजह हो सकती हैं.
आंखों के इन लक्षणों को न करें इग्रोनर
अगर आंखों में तेज दर्द, रोशनी से परेशानी, धुंधला दिखाई देना, अत्यधिक लालिमा या लगातार पानी आने की समस्या हो, तो नेत्र विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए. आंखों में दर्द या दृष्टि में अचानक बदलाव को केवल प्रदूषण का असर समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है.
याद रखें प्रदूषण से पूरी तरह बचना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन सही सावधानियां अपनाकर आंखों को होने वाली परेशानी कम की जा सकती है. आंखों में लगातार बने रहने वाले लक्षणों का समय पर इलाज करवाना ही बेहतर तरीका है.
ये भी पढ़ें - दिवाली पर दिल्ली-NCR में AQI खतरनाक लेवल पर, पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव होने से 10 राज्यों में बारिश की संभावना
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं