हम जब भी किसी खिलाड़ी को मैदान पर देखते हैं, तो लगता है कि ये लोग लोहे के बने हैं. चाहे 40 डिग्री की धूप हो या मीलों लंबी दौड़, वे बिना रुके भागते रहते हैं. लेकिन सच तो यह है कि खिलाड़ी भी हमारी और आपकी तरह ही इंसान होते हैं. हाल ही में बीजिंग की एक फिटनेस प्रतियोगिता में कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको चौंका दिया. ऑस्ट्रेलिया की एक महिला एथलीट दौड़ते-दौड़ते अचानक अपने पेट पर काबू खो बैठी और उनका बाउल एक्सीडेंट हो गया. सोशल मीडिया पर इसका विडिओ वायरल हुआ, कुछ लोगों ने मजाक बनाया तो कुछ हैरान रह गए.
लेकिन अगर आप किसी भी मैराथन धावक या लंबी दूरी तक साइकिल चलाने वाले से पूछेंगे, तो वो कहेगा कि भाई, यह कोई नई बात नहीं है. यह खेल की दुनिया का एक ऐसा सच है जिस पर लोग खुलकर बात नहीं करते. तेज दौड़ते समय या भारी कसरत करते हुए आखिर हमारे पेट के अंदर ऐसा क्या होने लगता है कि इंसान सब कुछ भूलकर सीधे वॉशरूम की तरफ भागने को मजबूर हो जाता है? चलिए इसको बिल्कुल आसान और बोलचाल की भाषा में समझते हैं.
#IndiaMatters with @ShivAroor | Australian HYROX Athlete's Embarrassing Moment Sparks Debate: How Far Can Athletes Push The Body? @snehamordani pic.twitter.com/WDPYT2O072
— NDTV (@ndtv) September 15, 2026
जब शरीर आंतों को भूलकर टांगों की मदद करने लगता है
सोचिए आप किसी मुसीबत से बचने के लिए पूरी जान लगाकर भाग रहे हैं. उस वक्त आपका दिमाग और दिल क्या करेंगे? वे सारा खून आपकी टांगों, जांघों और फेफड़ों की तरफ भेजेंगे ताकि आप तेजी से भाग सकें.
जब कोई एथलीट या आम इंसान बहुत तेज दौड़ता है, तो शरीर में खून का बंटवारा बदल जाता है. मांसपेशियों को ऑक्सीजन की भारी जरूरत होती है. ऐसे में दिल आंतों और पेट की तरफ जाने वाले खून को कम कर देता है और सारा खून एक्टिव मसल्स की तरफ मोड़ देता है.
अब होता यह है कि जब पाचन तंत्र को पूरा खून और आक्सीजन नहीं मिलता, तो वह ठीक से काम करना बंद कर देता है. आंतों की दीवारें कमजोर पड़ने लगती हैं और पेट में मरोड़ या गैस बनने लगती है. जब यह स्थिति ज्यादा देर तक बनी रहती है, तो पेट अंदर जमा सब कुछ बाहर फेंकने की कोशिश करता है. इसी वजह से इंसान अचानक अपना कंट्रोल खो बैठता है.
‘रनर्स डायरिया' क्या है?
गुरुग्राम स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल के GI लैप्रोस्कोपिक एंड बैरिएट्रिक सर्जन डॉ. अंशुमान कौशल का कहना है कि दौड़ने वाले लोगों के बीच यह परेशानी इतनी आम है कि डॉक्टरों ने इसका एक खास नाम ही रख दिया है - ‘रनर्स डायरिया'. इसके पीछे कई छोटे-छोटे कारण एक साथ काम करते हैं:
शरीर का लगातार ऊपर-नीचे उछलना: जब आप दौड़ते हैं, तो हर कदम के साथ आपके पेट के अंदर मौजूद अंग भी ऊपर-नीचे जोर से हिलते हैं. यह लगातार हिलना-डुलना मल को तेजी से नीचे की तरफ धकेल देता है.
मानसिक तनाव और घबराहट: रेस से पहले हर किसी के पेट में तितलियां उड़ती हैं. यह नर्वसनेस आंतों की हरकत को और तेज कर देती है.
खान-पान की गलती: रेस से ठीक पहले ज्यादा फाइबर, बहुत तला-भुना या बहुत ज्यादा कैफीन लेना भी पेट में तूफान ला सकता है.
यहां एक बात समझना जरूरी है. रनर्स डायरिया का मतलब है बार-बार पतले दस्त होना या पेट में मरोड़ उठना. लेकिन बाउल इनकॉन्टिनेंस का मतलब होता है पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियों का ढीला पड़ जाना, जिससे मल रोकने की ताकत ही खत्म हो जाती है. कई बार जब थकान चरम पर होती है, तो ये दोनों चीजें एक साथ हो जाती हैं.
गर्मी और पसीने का खेल
अगर मौसम गर्म और उमस भरा हो, तो यह आफत दोगुनी हो जाती है. दौड़ते समय शरीर से लगातार पसीना बहता है, जिससे शरीर में पानी और जरूरी नमक यानी इलेक्ट्रोलाइट्स खत्म होने लगते हैं.
डिहाइड्रेशन होते ही शरीर का तापमान बढ़ने लगता है. जब अंदर की गर्मी बढ़ती है, तो आंतें और ज्यादा भड़क जाती हैं. कुछ लोग सोचते हैं कि खूब सारा पानी पी लो तो सब ठीक रहेगा, लेकिन यह भी गलत है. दौड़ते वक्त एक साथ बहुत सारा पानी पीने से पेट फूल जाता है और उल्टी या दस्त की समस्या और बढ़ जाती है. इसलिए पानी और नमक का सही संतुलन होना बेहद जरूरी है.
शारदाकेयर - हेल्थसिटी के इंटरनल मेडिसिन डायरेक्टर, डॉ. पल्लव मिश्रा बताते हैं कि जब हम बहुत ज्यादा मेहनत वाली कसरत करते हैं, तो रनिंग, बार-बार उठने-बैठने वाली एक्सरसाइज, दिमागी टेंशन और खून के बहाव में बदलाव मिलकर हमारे पेट के सिस्टम पर असर डालते हैं.
जब पेट को छोड़ टांगों की मदद करने लगता है हार्ट
डॉ. पल्लव मिश्रा के मुताबिक, "जब हम बहुत भारी कसरत करते हैं, तो हमारा शरीर सबसे पहले उन मांसपेशियों, दिल और फेफड़ों को खून पहुंचाना जरूरी समझता है जो उस समय काम कर रहे होते हैं. इस वजह से पाचन तंत्र की तरफ जाने वाला खून कुछ समय के लिए कम हो जाता है, जिससे खाना पचने और आंतों के सही से काम करने पर सीधा असर पड़ता है."
आसान भाषा में कहें तो दिल सोचता है कि इस वक्त दौड़ना ज्यादा जरूरी है, इसलिए वह सारा खून पैरों और जांघों की तरफ भेज देता है. पेट और आंतों को कम खून और ऑक्सीजन मिलती है, जिससे वे थोड़ी देर के लिए सुस्त या कमजोर पड़ जाते हैं. आंतों की दीवारें ढीली होने लगती हैं और पेट अंदर मौजूद कचरे को तुरंत बाहर निकालने का सिग्नल दे देता है.
इस परेशानी से बचने के कुछ आसान उपाय
अगर आप सुबह पार्क में दौड़ते हैं, जिम में भारी पसीना बहाते हैं या किसी मैराथन की तैयारी कर रहे हैं, तो कुछ आसान आदतों से इस शर्मनाक स्थिति से बच सकते हैं:
रेस से पहले हल्का खाना लें: दौड़ने से दो-तीन घंटे पहले ऐसा खाना खाएं जो पचने में आसान हो. बहुत ज्यादा कच्ची सब्जियां, दूध की चीजें या ज्यादा तेल-मसाला खाने से बचें.
नए प्रयोग बिल्कुल न करें: रेस वाले दिन कोई नया प्रोटीन शेक, सप्लीमेंट या एनर्जी जेल पहली बार मत आजमाएं. जो भी खाना है, उसका अभ्यास पहले अपनी आम ट्रेनिंग में कर लें.
थोड़ा-थोड़ा पानी पिएं: एक साथ दो गिलास पानी गटकने के बजाय दौड़ने से पहले और बीच में छोटे-छोटे घूंट लेकर पानी या ओआरएस पिएं.
वॉशरूम जाने का रुटीन बनाएं: अपनी रनिंग शुरू करने से पहले पेट पूरी तरह साफ करने की आदत डालें.
शरीर की बात सुनें: अगर दौड़ते समय पेट में बहुत तेज मरोड़ उठे, चक्कर आएं या उल्टी जैसा लगे, तो जबरदस्ती खुद को मत खींचिए. रुकना कोई हार नहीं होती.
अगर कभी कसरत के दौरान ऐसा हो जाए, तो घबराने या शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है. यह आपकी कमजोरी नहीं है, बल्कि आपका शरीर सिर्फ यह बता रहा है कि उस पर जरूरत से ज्यादा लोड पड़ गया है. अगली बार जब दौड़ने निकलें, तो अपनी डाइट और पेट की टाइमिंग का थोड़ा ध्यान रखें, सब ठीक रहेगा.
एक्सपर्ट के बारे में-
डॉ. अंशुमान कौशल, रोबोटिक GI, लैप्रोस्कोपिक और बैरिएट्रिक सर्जन, CK बिड़ला हॉस्पिटल, गुरुग्राम
पल्लव मिश्रा, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, शारदाकेयर हेल्थसिटी
FAQs-
क्या दौड़ते समय दस्त लगना सामान्य है?
हाँ, लंबी दूरी की दौड़ या हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज के दौरान कुछ लोगों को Runner's Diarrhea की समस्या हो सकती है.
Runner's Diarrhea क्यों होता है?
दौड़ते समय आंतों में खून का प्रवाह कम होने, डिहाइड्रेशन और पेट के लगातार हिलने की वजह से यह समस्या हो सकती है.
मैराथन से पहले क्या खाना चाहिए?
हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर माना जाता है. अधिक फाइबर, तला-भुना और ज्यादा कैफीन से बचना चाहिए.
Bowel Incontinence क्या है?
यह ऐसी स्थिति है जिसमें मल रोकने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है और व्यक्ति कंट्रोल खो सकता है.
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