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हमेशा रहती है थकान? वजह हो सकता है सोशल जेट लैग, ऐसे करें कंट्रोल

सोशल जेट लैग आपकी बॉडी क्लॉक और सोशल लाइफ के बीच का अंतर है, जो  थकान, फोकस की कमी और मूड स्विंग्स का कारण बनता है. सही स्लीप रूटीन और लाइफस्टाइल से इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है.

हमेशा रहती है थकान? वजह हो सकता है सोशल जेट लैग, ऐसे करें कंट्रोल
हमेशा रहती है थकान? वजह हो सकता है सोशल जेट लैग.

Social Jetlag: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि अलार्म लगातार बज रहा है, आप बार-बार स्नूज़ दबा रहे हैं और शरीर में बिल्कुल भी एनर्जी नहीं है. मन करता है कि वीकेंड कभी खत्म ही न हो. ऐसे में हम अक्सर इसे आलस, डिप्रेशन या मौसम का असर मान लेते हैं. लेकिन हकीकत में इसके पीछे एक कम चर्चित लेकिन बेहद आम समस्या हो सकती है, जिसे Social Jet Lag कहा जाता है.

क्या होता है सोशल जेट लैग?

Social Jet Lag कोई ट्रैवल से जुड़ी समस्या नहीं है. यह आपकी सर्केडियन रिदम और आपकी सोशल लाइफ के बीच पैदा होने वाला कन्फ्यूजन है. हमारी बॉडी में एक 24 घंटे की नेचुरल घड़ी होती है, जो तय करती है कि कब सोना है, कब उठना है और कब एनर्जी ज्यादा रहेगी. लेकिन जब हम वीकडेज़ में जल्दी उठते हैं और वीकेंड पर देर रात तक जागते हैं, तो यही बॉडी क्लॉक गड़बड़ा जाती है.

सोशल जेट लैग के मुख्य कारण

आज की लाइफस्टाइल इसका सबसे बड़ा कारण है. देर रात मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट दिमाग को यह संकेत देती है कि अभी सोने का समय नहीं है. इसके अलावा, वीकडेज में नींद की कमी और वीकेंड पर ज्यादा सोकर उसकी भरपाई करना भी इस समस्या को बढ़ाता है. सोशल लाइफ, पार्टीज़ और बिंज वॉचिंग भी नींद के टाइम को बिगाड़ देती है.

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इसके लक्षण क्या हैं?

अगर आप सुबह उठते ही थकान महसूस करते हैं, दिन में फोकस नहीं बनता, रविवार की रात नींद नहीं आती, मूड स्विंग्स होते हैं और हर समय कॉफी की जरूरत महसूस होती है, तो यह सोशल जेट लैग का संकेत हो सकता है. यह आलस नहीं, बल्कि आपकी बायोलॉजी का असर है.

सेहत पर क्या असर पड़ता है?

लंबे समय तक सोशल जेट लैग रहने से वजन बढ़ने, मेटाबॉलिज्म खराब होने, डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. एक सर्वे के मुताबिक, भारत में 60% से ज्यादा लोग 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, जो इस समस्या को और गंभीर बनाता है.

सोशल जेट लैग से कैसे बचें?

इससे उबरने के लिए सबसे जरूरी है कंसिस्टेंसी. वीकेंड पर भी सोने और जागने का समय लगभग एक जैसा रखें. सुबह की धूप लें, रात में स्क्रीन टाइम कम करें, हल्का डिनर करें और रोजाना थोड़ी एक्सरसाइज करें. सोने से पहले खुद को रिलैक्स करें, ताकि बॉडी क्लॉक दोबारा बैलेंस में आ सके.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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