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दारू पीने वालों का बड़ा दिल हो सकता है खतरनाक, जानें कार्डियोमायोपैथी कैसे बन रही है साइलेंट हार्ट डिजीज

Heart Disease: कार्डियोमायोपैथी कोई मामूली बीमारी नहीं है. ‘दारू से बड़ा दिल’ सुनने में भले हल्का लगे, लेकिन हकीकत में यह जानलेवा बन सकता है.

दारू पीने वालों का बड़ा दिल हो सकता है खतरनाक, जानें कार्डियोमायोपैथी कैसे बन रही है साइलेंट हार्ट डिजीज
Heart Disease: दिल के लिए खतरनाक हो सकती है आपकी ये आदत.

अक्सर मजाक में कहा जाता है कि शराब पीने वालों का दिल बहुत बड़ा होता है, लेकिन मेडिकल साइंस में यह बात खतरे की घंटी मानी जाती है. डॉक्टरों की भाषा में इसे Cardiomyopathy कहा जाता है. यह ऐसी बीमारी है जिसमें दिल की मांसपेशियां कमजोर या असामान्य हो जाती हैं और दिल को पूरे शरीर में खून पंप करने में परेशानी होने लगती है. समय रहते इलाज न हो तो यह हार्ट फेलियर, अनियमित धड़कन और यहां तक कि अचानक मौत का कारण भी बन सकती है.

कार्डियोमायोपैथी क्या है- (What is Cardiomyopathy)

कार्डियोमायोपैथी में दिल की मांसपेशियां फैल सकती हैं, मोटी हो सकती हैं या सख्त हो जाती हैं. यह कई प्रकार का हो सकता है जैसे- Dilated Cardiomyopathy, Hypertrophic Cardiomyopathy और Restrictive Cardiomyopathy हैं. कुछ मामलों में बीमारी हल्की रहती है, लेकिन कई बार कंडीशन इतनी खराब हो जाती है कि मरीज को डिवाइस, सर्जरी या यहां तक कि हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है.

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लक्षण जो अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं-

इस बीमारी की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कई लोगों में शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखते. बाद में सांस फूलना, सीने में दर्द, दिल की धड़कन तेज होना, पैरों या पेट में सूजन, थकान, चक्कर या बेहोशी जैसी दिक्कतें सामने आती हैं. यही वजह है कि इसे एक तरह की साइलेंट हार्ट डिजीज भी कहा जाता है.

कार्डियोमायोपैथी के कारण

कार्डियोमायोपैथी कई वजहों से हो सकती है. कुछ लोगों में यह जेनेटिक (Inherited) होती है, जबकि कई मामलों में यह लाइफस्टाइल से जुड़ी होती है, जिसे Acquired Cardiomyopathy कहते हैं. लंबे समय तक बहुत ज्यादा शराब पीना, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, कोविड या दूसरे इंफेक्शन, ड्रग्स का इस्तेमाल और कुछ कैंसर ट्रीटमेंट भी इसके खतरे को बढ़ाते हैं.

क्यों बढ़ जाता है खतरा-

अगर परिवार में पहले से दिल की बीमारी रही हो, लंबे समय तक शराब या ड्रग्स का सेवन किया गया हो, या हाई बीपी और डायबिटीज कंट्रोल में न हों, तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है. समय पर पहचान न होने पर यह बीमारी ब्लड क्लॉट, हार्ट वाल्व की समस्या और अचानक कार्डियक अरेस्ट तक पहुंच सकती है.

कैसे करें बचाव-

जेनेटिक कार्डियोमायोपैथी को रोका नहीं जा सकता, लेकिन लाइफस्टाइल से जुड़ी इस बीमारी से बचाव संभव है. शराब और ड्रग्स से दूरी, हेल्दी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, स्ट्रेस कम करना और दूसरी बीमारियों को कंट्रोल में रखना दिल को सेफ रखने में मदद करता है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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