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सडन कार्डियक अरेस्ट क्यों आता है? डॉक्टर ने बताए इसके कारण और शुरुआती लक्षण

Sudden Cardiac Arrest Aane Ke Karan: युवाओं में हार्ट अटैक और सडन कार्डियक अरेस्ट अचानक नहीं होते, बल्कि सालों की गलत आदतों  का नतीजा होते हैं. समय रहते अलर्ट रहने, सही लाइफस्टाइल और रेगुलर जांच से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

सडन कार्डियक अरेस्ट क्यों आता है? डॉक्टर ने बताए इसके कारण और शुरुआती लक्षण
Cardiac Arrest Kyu Hota Hai?

Sudden Cardiac Arrest Aane Ke Karan: पहले हार्ट अटैक को बुढ़ापे की बीमारी माना जाता था लेकिन बीते कुछ सालों में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और अब यह युवाओं  के साथ ही साथ बच्चों को भी अपना शिकार बना रहा है. यह सवाल सभी के मन में आता है कि आखिर छोटी उम्र में ही हार्ट अटैक जैसी समस्याओं का सामना क्यों करना पड़ रहा है. इस पर NDTV से बात करते हुए पद्म भूषण Dr. T. S. Kler ने कुछ बातें बताई हैं आइए जानते हैं उनके बारे में.

हार्ट अटैक और सडन कार्डियक अरेस्ट में क्या फर्क है? Heart Attack Or Cardiac Arrest Mein Kya Antar Hai

डॉ. T. S. Kler ने बताया हार्ट अटैक तब होता है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली नसों में ब्लॉकेज हो जाता है, जिससे हार्ट मसल को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती. वहीं सडन कार्डियक अरेस्ट एक इलेक्ट्रिकल प्रॉब्लम होती है, जिसमें दिल की धड़कन अचानक बंद हो जाती है. इसमें मरीज को बचाने के लिए बहुत कम समय मिलता है और अगर तुरंत सीपीआर या मेडिकल मदद न मिले, तो जान का खतरा बढ़ जाता है.

युवाओं में हार्ट से जुड़ी समस्याएं क्यों बढ़ रही हैं?

डॉ. T. S. Kler के मुताबिक,  इसके पीछे सबसे बड़ा कारण खराब लाइफस्टाइल है. लंबे समय तक बैठकर काम करना, नींद की कमी, प्रोसेस्ड और जंक फूड का ज्यादा सेवन धीरे-धीरे दिल को कमजोर बनाता है. इसके अलावा स्मोकिंग, लाइट स्मोकिंग और वेपिंग को युवा सेफ मान लेते हैं, जबकि ये दिल की नसों में सूजन और ब्लॉकेज का खतरा बढ़ाती हैं.

लगातार स्ट्रेस, काम का प्रेशर और सोशल मीडिया से जुड़ा स्ट्रेस भी हार्ट हेल्थ को नुकसान पहुंचाता है. कई मामलों में युवाओं को हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर या जेनेटिक हार्ट डिजीज होती है, लेकिन लक्षण न होने के कारण वे जांच नहीं करवाते.

अचानक सडन कार्डियक अरेस्ट क्यों आता है? | What Causes Sudden Cardiac Arrest?

सडन कार्डियक अरेस्ट अक्सर बिना किसी चेतावनी के होता है. इसकी वजह दिल की इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी, पहले से कमजोर हार्ट मसल, इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस, डिहाइड्रेशन या जरूरत से ज्यादा हैवी एक्सरसाइज हो सकती है. कई बार शरीर संकेत देता है, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है.

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें इग्नोर

अगर सीने में दबाव या दर्द, अचानक सांस फूलना, चक्कर आना, बेहोशी, असामान्य थकान या दिल की तेज और अनियमित धड़कन महसूस हो, तो इसे गैस या थकान समझकर टालना खतरनाक हो सकता है. युवाओं में यही सबसे बड़ी गलती देखने को मिलती है.

बचाव के लिए क्या करें?

डॉ. T. S. Kler के मुताबिक,  युवाओं को रेगुलर हेल्थ चेकअप कराना चाहिए, खासकर अगर परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास रहा हो. स्मोकिंग और वेपिंग से पूरी तरह दूरी बनाना, नींद पूरी करना, स्ट्रेस को कंट्रोल करना और जरूरत से ज्यादा हैवी वर्कआउट से बचना बेहद जरूरी है. दिल से जुड़ी किसी भी परेशानी को हल्के में न लें.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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