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1 साल से पहले बच्चों को मोबाइल दिखाना पड़ सकता है भारी! AIIMS स्टडी में ऑटिज्म का बढ़ा खतरा

Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के 2025 के अनुमान के अनुसार, लगभग हर 31 में से 1 व्यक्ति में ASD पाया जाता है. यह दिखाता है कि इस समस्या के लिए मजबूत पब्लिक हेल्थ व्यवस्था की जरूरत बढ़ रही है. यह समस्या हर व्यक्ति में अलग-अलग तरह से दिखाई देती है. इसके लक्षण, काम करने की क्षमता और गंभीरता अलग हो सकती है.

1 साल से पहले बच्चों को मोबाइल दिखाना पड़ सकता है भारी! AIIMS स्टडी में ऑटिज्म का बढ़ा खतरा
छोटे बच्चों को मोबाइल देना क्यों है खतरनाक?

AIIMS, नई दिल्ली की एक स्टडी में सामने आया है कि 1 साल से कम उम्र के बच्चों में ज्यादा स्क्रीन टाइम, 3 साल की उम्र में ऑटिज्म के बढ़े खतरे से जुड़ा हो सकता है. बता दें कि ASD एक दिमाग के विकास से जुड़ी समस्या है, जिसकी पहचान कई बार 12–18 महीने की उम्र में ही हो सकती है. इससे यह पता चलता है कि जल्दी पहचान, बच्चों के विकास पर नजर रखना और सही समय पर इलाज बहुत जरूरी है. Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के 2025 के अनुमान के अनुसार, लगभग हर 31 में से 1 व्यक्ति में ASD पाया जाता है. यह दिखाता है कि इस समस्या के लिए मजबूत पब्लिक हेल्थ व्यवस्था की जरूरत बढ़ रही है. यह समस्या हर व्यक्ति में अलग-अलग तरह से दिखाई देती है. इसके लक्षण, काम करने की क्षमता और गंभीरता अलग हो सकती है.

AIIMS के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शेफाली गुलाटी ने बताया कि, ऑटिज्म स्पेक्ट डिसऑर्डर के लिए विशेष में स्क्रीन टाइम के लिए काफी रिसर्च हुई है काफी स्पेकुलेशंस है. उसके अंदर ये देखा गया है कि जो बच्चों में आह जो प्रूवन स्टडीज है 1 साल की उम्र में जिनका स्क्रीन टाइम ज्यादा था उनको 3 साल की उम्र में लडकों में ऑटिज्म ज्यादा प्रीवेलेंट पाया गया है. और लडकियों में भी ऑटिज्म के सिम्पटम्स ज्यादा पाए गए हैं. काफी सारी और स्टडीज जो है और उसमें मेट एनालिसिस में देखा गया है, की जितना जल्दी आपने बच्चे को स्क्रीन टाइम शुरू किया और जितना ड्यूरेशन ज्यादा दिया उससे ज्यादा वो रिलेशन हुआ है ऑटिज्म के साथ. 

हमने भी एक स्टडी की है अभी जिसमें हमने ऑटिज्म के बच्चे और जो दूसरे बच्चे थे अस्पताल में उनका देखा तो हमने देखा की ऑटिज्म के बच्चों का स्क्रीन टाइम जल्दी शुरू कर दिया गया उन बच्चों की तुलना में जिन्होंने कम फोन देखा.

स्क्रीन टाइम कम करना है, तभी हमारी गाइडलाइंस है इवेन सरकार ने दी है अमेरिकन अकादमी ओएफ पीडियाट्रिक्स, इंडियन अकादमी ओएफ पीडियाट्रिक्स और अभी मिनिस्ट्री की भी है जिसमें मिनिस्ट्री के गाइडलाइंस के हिसाब से 18 महीने के बच्चों से कम को स्क्रीन टाइम देना ही नहीं चाहिए. 18 महीने से 6 साल के बच्चों के 1 और पैसिव वाला नहीं देना चाहिए कि फोन उठाया और देखें जा रहे हैं. 

उसके ऊपर 7 साल से बड़े बच्चों को 2 घंटे. कई देश ऐसे हैं जिन्होंने ऐसी है देश है जिन्होंने बच्चों के लिए स्क्रीन बंद ही कर दिया है.  

उन्होंने बताया कि बच्चे को फोन देकर बिजी रखने से बेहतर है कि आप खुद उनसे इंटरेक्शन करें और जितना  बच्चे से इंडिविडुअल इंटरेक्शन करेंगे उनके लिए वो ज्यादा बेहतर होगा.  

क्या है ऑटिज्म

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) एक कॉम्प्लेक्स न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिससे पीड़ित बच्चों का बिहेवियर आम बच्चों से थोड़ा अलग होता है और उन्हें अपनी लाइफ में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. 

ऑटिज्म की पहचान (How to Autism Diagnosed)

बच्चों में ऑटिज्म के अधिकतर मामलों की पहचान दो से तीन वर्ष की उम्र में होती है. हालांकि ऑटिज्म की पहचान जल्दी से जल्दी 18 माह के बाद संभव है. सामान्य तौर पर ऑटिज्म की पहचान बच्चों के व्यवहार को परख कर किया जाता है. सच तो ये है कि ऑटिज्म को किसी एक मेडिकल टेस्ट से पहचाना नहीं जा सकता है. हालांकि फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम जैसे टेस्ट से ऑटिज्म की तरह के लक्षणों का पता लगाया जा सकता है. पिछले कुछ वर्षों में इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ने और पहचान के टूल्स बढ़ने के कारण ऑटिज्म के मामलों की पहचान की दर काफी बढ़ गई है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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