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महिला के शरीर में कई अंगों तक फैला कैंसर, 7 घंटे की सर्जरी कर AIIMS के डॉक्टरों ने बचाई जान

AIIMS के डॉक्टरों ने महिला की सर्जरी कर गर्भाशय, दोनों अंडाशय, पेट की प्रभावित परत, ओमेंटम, आंत का प्रभावित हिस्सा, कैंसर से प्रभावित यूरेटर और कई लिम्फ नोड्स को हटाया. सात घंटो तक चली ये सर्जरी सफल रही.

महिला के शरीर में कई अंगों तक फैला कैंसर, 7 घंटे की सर्जरी कर AIIMS के डॉक्टरों ने बचाई जान
7 घंटे की सर्जरी कर बचाई महिला की जान. ( Image Unsplash)

कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से जूझ रही महिला (57) की सफल सर्जरी कर एम्स के चिकित्सकों ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. महिला को एडवांस्ड स्टेज ओवेरियन कैंसर होने की आशंका थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने मरीज की स्थिति को देखते हुए एक लंबी और जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया.

नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMD Delhi) के चिकित्सकों को अनुसार, जांच में महिला के पेट और पेल्विस में लगभग 20×15 सेंटीमीटर का बड़ा ट्यूमर मिला था, जो मूत्राशय, बड़ी आंत (रेक्टोसिग्मॉइड जंक्शन) और बाएं यूरेटर तक फैल चुका था. इसके अलावा पेट की परत (पेरिटोनियम), छोटी आंत और कई लिम्फ नोड्स में भी कैंसर के फैलने के लक्षण मिले, जिसके बाद चिकित्सकों ने महिला की सर्जरी करने का निर्णय लिया. 

डॉक्टरों ने कहा कि करीब सात घंटे तक महिला की सर्जरी चली. इस दौरान गर्भाशय, दोनों अंडाशय, पेट की प्रभावित परत, ओमेंटम, आंत का प्रभावित हिस्सा, कैंसर से प्रभावित यूरेटर और कई लिम्फ नोड्स को हटाया गया. साथ ही, आंत के एक हिस्से को भी निकालकर डबल बैरल इलियोस्टॉमी भी बनाई गई, जिससे मरीज का सुरक्षित तरीके से सुधार हो सके. सर्जरी के बाद मरीज को 24 घंटे आईसीयू में निगरानी में रखा गया और बाद में वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया.

एम्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. (मेजर) एमडी.रे ने बताया कि,

एडवांस्ड ओवेरियन कैंसर में यदि सर्जरी के जरिए दिखाई देने वाले कैंसर को पूरी तरह हटाना संभव हो, तो प्राथमिक साइटोरिडक्टिव सर्जरी (Primary Cytoreductive Surgery) मरीज के लिए लंबे समय तक जीवित रहने का सबसे अच्छा अवसर प्रदान करती है. महिला के शरीर में कैंसर कई अंगों तक फैल चुका था, इसलिए हमने मल्टी-ऑर्गन सर्जरी करके ट्यूमर को हटाने का प्रयास किया. ऐसे ऑपरेशन केवल उच्च स्तरीय कैंसर केंद्रों में ही सुरक्षित रूप से किए जा सकते हैं, जहां सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन, एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की टीम उपलब्ध हो.

प्रोफेसर डॉ. (मेजर) एमडी.रे

एम्स सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग

डॉ. रे का कहना है कि जिन मरीजों में कैंसर को सर्जरी से पूरी तरह निकालना संभव नहीं होता या जिनकी शारीरिक स्थिति ऑपरेशन के लिए उपयुक्त नहीं होती, उनमें पहले कीमोथेरेपी दी जाती है. हालांकि, जिन मरीजों में कैंसर ऑपरेशन से हटाया जा सकता है, वहां शुरुआती सर्जरी को कीमोथेरेपी का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए.उन्होंने कहा कि भारत में ओवेरियन कैंसर के मरीजों को समय पर विशेषज्ञ केंद्रों तक पहुंचाने, मल्टीडिसिप्लिनरी उपचार व्यवस्था मजबूत करने और जटिल कैंसर सर्जरी में विशेषज्ञता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक मरीजों को संभावित रूप से जीवनरक्षक और उपचारात्मक सर्जरी का लाभ मिल सके.

डॉ (मेजर) मुकुरदीपी रे (एमडी रे)
शिक्षा
एमबीबीएस (कलकत्ता), एमएस (दिल्ली), एफआरसीएस (यूके), पीएचडी (ऑन्को. एम्स), एफएसीएस, एफआईसीएस (सर्जरी ऑन्को) यूएसए, एफएआईएस (भारत) 

 

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