Rice Cooking Tips: भारत में चावल सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि रोजमर्रा की थाली का अहम हिस्सा है. उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक, करोड़ों लोग दिन में कम से कम एक बार चावल जरूर खाते हैं. इसे हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन माना जाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि चावल पकाने का तरीका आपकी सेहत पर सीधा असर डालता है? अक्सर लोग जल्दी में चावल धोते हैं और तुरंत उबाल देते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह तरीका पूरी तरह सही नहीं है. चावल को पकाने से पहले कुछ समय पानी में भिगोना एक छोटा सा कदम है, लेकिन इसके फायदे बड़े हैं. यह न सिर्फ पाचन को बेहतर बनाता है, बल्कि पोषक तत्वों के अवशोषण और ब्लड शुगर कंट्रोल में भी मदद करता है.
चावल में मौजूद फाइटिक एसिड क्या करता है?
चावल में प्राकृतिक रूप से फाइटिक एसिड (Phytic Acid) नामक तत्व पाया जाता है. यह एक “एंटी-न्यूट्रिएंट” की तरह काम करता है, यानी यह शरीर में आयरन, जिंक और कैल्शियम जैसे जरूरी मिनरल्स के अवशोषण को रोक सकता है. अगर चावल को बिना भिगोए सीधे पका लिया जाए, तो ये मिनरल्स शरीर में पूरी तरह एब्जॉर्ब नहीं हो पाते. लेकिन, जब चावल को कुछ समय के लिए पानी में भिगोया जाता है, तो फाइटिक एसिड का स्तर कम हो जाता है. इससे पोषक तत्वों का अवशोषण आसान हो जाता है. खासकर उन लोगों के लिए यह तरीका फायदेमंद है जिन्हें आयरन या जिंक की कमी है.
रिसर्च क्या कहती है?
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, चावल को भिगोने से उसका टेक्सचर और स्वाद बेहतर होता है, चावल जल्दी और समान रूप से पकता है, दाने नरम और हल्के रहते हैं
भिगोने से चावल में मौजूद एंजाइम सक्रिय हो जाते हैं, जो कार्बोहाइड्रेट को सरल शुगर में बदलने की प्रक्रिया को आसान बनाते हैं. इससे पाचन आसान होता है और शरीर को पोषक तत्व बेहतर तरीके से मिलते हैं.

ब्लड शुगर पर क्या असर पड़ता है?
चावल को भिगोने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) थोड़ा कम हो सकता है. इसका मतलब है कि भीगे हुए चावल खाने से ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता. डायबिटीज के मरीजों के लिए यह खासतौर पर उपयोगी हो सकता है, क्योंकि धीरे-धीरे शुगर बढ़ना शरीर के लिए बेहतर माना जाता है.
कितना समय भिगोना चाहिए?
हर प्रकार के चावल के लिए भिगोने का समय अलग हो सकता है:
- सफेद चावल: 15-20 मिनट
- बासमती चावल: 20-30 मिनट
- ब्राउन राइस: 6-8 घंटे
- साबुत अनाज वाले चावल: 8-12 घंटे
भिगोने से पहले चावल को 2-3 बार साफ पानी से धोना जरूरी है. इससे धूल और एक्स्ट्रा स्टार्च निकल जाता है. ध्यान रखें, सफेद चावल को बहुत ज्यादा देर तक पानी में न छोड़ें, क्योंकि इससे कुछ विटामिन और मिनरल्स पानी में घुल सकते हैं और पोषण कम हो सकता है.
आयुर्वेद और विज्ञान की एक जैसी राय
आयुर्वेद में भी अनाज को भिगोकर पकाने की सलाह दी गई है. माना जाता है कि इससे भोजन सात्त्विक और सुपाच्य बनता है. विज्ञान भी इस बात से सहमत है कि भिगोने से पाचन और पोषण दोनों बेहतर होते हैं.
चावल को भिगोना कोई कठिन या समय लेने वाला काम नहीं है, लेकिन यह आपकी सेहत के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है. बेहतर पाचन, ज्यादा पोषक तत्वों का अवशोषण और कंट्रोल ब्लड शुगर ये सब फायदे सिर्फ एक छोटी सी आदत से मिल सकते हैं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं