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क्या सच में केला है ‘जन्नत का फल’? इतिहास और मान्यताओं से जुड़ा रोचक किस्सा

अगर आप भी केले को एक साधारण फल समझते हैं तो आज आपको ये गलतफहमी दूर कर लेनी चाहिए. क्योंकि ये आम सा दिखने वाले फल आम नहीं बल्कि जन्नत का फल है. चलिए जानते हैं इसके इस नाम की पीछे छिपी दिलचस्प कहानी.

क्या सच में केला है ‘जन्नत का फल’? इतिहास और मान्यताओं से जुड़ा रोचक किस्सा
केले को क्यों कहा जाता है जन्नत का फल.( Image Unsplash)

फलों का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद होता है, इसलिए इसको हर कोई शौक से या फिट रहने के लिए खाता है. वहीं इन दिनों मार्केट में कई तरह के महंगे और ऐसे फल आ रहे हैं जिसे लोग उनके दाम की वजह से भी खा रहे हैं. आज के समय में फल सिर्फ सेहत नहीं बल्कि आपका स्टेटस सिंबल भी बन गए हैं! ड्रैगन फ्रूट्स और ब्लू बेरी जैसे कई ऐसे फल है जों महंगे हैं और अगर ये आपके घर पर हैं तो आपका स्टेटस हाई हो जाता है. 

हालांकि ये सिर्फ कहने की बाते हैं. जो लोगों की सोच पर निर्भर करती हैं. आज हम आपको एक ऐसे फल के बारे में बताएंगे जिसे "जन्नत का फल" कहा जाता है. अब बताइए जन्नत से बड़ा क्या ही होगा. हम बात कर रहे हैं केले की. सुनकर हैरानी हो रही है? होनी भी चाहिए क्योंकि ये तो एक ऐसा फल ही जिसे बहुत ही मामूली समझा जाता है. 

केले को क्यों समझते हैं मामूली फल 

केला एक ऐसा फल है जो आपको हर मौसम में आसानी से मिल जाता है. नाश्ते में बनाना शेक से लेकर पूजा-पाठ तक केला हर घर का एक अहम हिस्सा होता है. केले के फल के अलावा इसके पत्ते, फूल, छिलके और कच्चे केले को भी कई तरीकों से इस्तेमाल में लाया जाता है. लेकिन इसके बावदूज भी इसका स्थान उन महंगे फलों की लिस्ट में बहुत ही पीछे रह जाता है. 

केले को क्यों कहा गया 'जन्नत का फल'

अनिमेष मुखर्जी ने अपनी किताब 'इतिहास की थाली' में इस बात का जिक्र किया है. उनके अनुसार-

केला हर धर्म में पूजनीय है. यहां तक की वनस्पति विज्ञान में खाने योग्य केले का नाम "मूसा पैराडिसिका" है जिसका अर्थ होता है जन्नत का पेड़, क्योंकि कुछ लोग मानते हैं कि ऐडम और ईव की कहानी में मौजूद फल असल में केला था. अब लोग भले ही कहते हों कि दुनिया तीन एप्पल ( ऐडम-ईव, न्यूटन और स्टीव जॉब्स) ने बदली, मगर दुनिया को इसकी मौजूद शक्ल देने में केले का भी पर्याप्त योगदान है.  
अनिमेष मुखर्जी
 

अनिमेष मुखर्जी अपनी पुस्तक ‘इतिहास की थाली' में बताते हैं कि केले का इतिहास हजारों साल पुराना है. यह केवल एक फल नहीं, बल्कि सभ्यताओं, धार्मिक विश्वासों और वैश्विक व्यापार का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. दुनिया के सबसे पुराने फलों में शामिल केला आज भले ही आम दिखाई देता हो, लेकिन कभी यह राजाओं, यात्रियों और धार्मिक परंपराओं के बीच विशेष स्थान रखता था.

कुरान में भी जन्नत के पेड़ों और फलों के बारे में बताया गया है, जिसे कुछ विद्वानों ने केले से जोड़कर देखा है. वहीं कई इतिहासकार इस पर एकमत नहीं हैं. लेकिन समय के साथ ये धारणा लोगों के बीच लोकप्रिय होती चली गई और केले को 'जन्नत के फल' का दर्जा दे दिया गया.

सबसे ज्यादा बिकने वाली चीज है केला

अनिमेष मुखर्जी ने अपनी किताब में बताया कि, सुनहरी उंगलियों वाले इस फल की दुनियाभर में बहुत ज्यादा मांग है. ऐसा समझिए केला दुनिया की सबसे बड़ी रीटेल चेन वॉलमार्ट में सबसे ज्यादा बिकने वाली चीज है. जी हां, वॉलमार्ट के तमाम स्टोर्स को मिलाकर सबसे ज्यादा बिकने वाली चीज केला है, दूसरे नंबर पर टॉयलेट पेपर है.

जाहिर है कि जह मांग बढ़ेगी तो आपूर्ति भी ज्याजा होगी. ऐसे में कारोबार भी बड़ा होगा. केले के इस कारोबार के चलते दुनियाभर में इसकी खेती कराने की होड़ लगी. लेकिन तब इनकी खेती छोटे-छोटे लैटिन अमेरिकी देशों में होती थी और वहां से जहाज लादकर केले अमेरिका वगैरह भेजे जाते थे. जिसमें से कुछ सड़ जाते, कुछ खराब निकल जाते, तो मुनाफा कमाने के लिए केले का उत्पादन सस्सा होना चाहिए था.

जिसका एक ही तरकी था उन देश पर कब्जा करके लोगों से बंधुआ मजदूरी करानाऔर बिना बड़े खर्चे के केले का उत्पादन कराना. इन तरकीबों से एक समय में केले के व्यापार में 1000 प्रतिशत तक का मुनाफा होता था. 

संयुक्त राज्य अमेरिका के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) (1 दिसंबर 2022 को देखा गया) के अनुसार, केले का औसत उत्पादन और व्यापार 2000-2002 में 69 मिलियन टन से बढ़कर 2020-2021 में लगभग 121 मिलियन टन हो गया है, जो पिछले दो दशकों में इसकी वृद्धि को दर्शाता है. हाल के आँकड़े बताते हैं कि भारत, चीन, फिलीपींस, इक्वाडोर और ब्राजील विश्व के शीर्ष केला उत्पादक हैं.

भारतीय संस्कृति में खास महत्व?

बता दें कि भारत में केला केवल एक फल नहीं है, बल्कि कई धार्मिक अनुष्टठानों में भी इसका इसतेमाल किया जाता है. केले के पत्तों से लेकर फल तक और केले के पेड़ का भी विशेष महत्व माना जाता है. गृह प्रवेश, पूजा-पाठ और शादियों में भी केले के पौधे और पत्तों को लगाया जाता है. इसके साथ ही विष्णु भगवान की पूजा में भी केले का इस्तेमाल किया जाता है. 

ऐसा माना जाता है कि केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है. यही वजह है कि भारत में केला सिर्फ एक खाने वाला फल नहीं बल्कि यहां की संस्कृति पहचान का हिस्सा भी बन गया है. साउथ में आज भी लोग केले के पत्तों पर खाना पसंद करते हैं. 

पोषक तत्वों से भरपूर है केला

केला पोटेशियम के सबसे प्रसिद्ध स्रोतों में से एक है. एक मीडियम साइज के पके हुए केले में 450 ग्राम पोटेशियम, 28 ग्राम कार्ब्स और 15 ग्राम प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाली चीनी प्रदान कर सकता है. 

ये आर्टिकल अनिमेष मुखर्जी की किताब के तथ्यों को लेकर के लिखा गया है. एनडीटीवी किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता है.

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