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हर साल राष्ट्रपति को तोहफे में परोसा जाता है ये खास आम, 200 साल पुराना इतिहास और अनोखी खुशबू बनाती है खास

आम का स्वाद तो आपने जरूर खा होगा लेकिन, क्या कभी जर्दालू आम खाया है. इस आर्टिकल में जानें इस आम की कहानी और खासियत.

हर साल राष्ट्रपति को तोहफे में परोसा जाता है ये खास आम, 200 साल पुराना इतिहास और अनोखी खुशबू बनाती है खास
Bihar Heritage Mango: जर्दालू आम कहां मिलता है. (Image Unsplash)

आम का नाम लेते ही मुंह में पानी आ जाता है. गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में आम की बहार आ जाती है. कोई लंगड़ा आम का दीवाना होता है, तो किसी को दशहरी पसंद आता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में एक ऐसा आम भी है, जो आम लोगों के साथ-साथ देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की भी पहली पसंद है?

जी हां, ये खास आम जिसे हर साल सम्मान के तौर पर देश के राष्ट्रपति को गिफ्ट में भेजा जाता है और जिसे हमारे देश के वीवीआईपी लोग बड़े ही चाव से खाते हैं. इस यूनिक और शाही आम का नाम है जर्दालू आम.

बिहार की मिट्टी से निकलने वाले इस आम का स्वाद और इसकी खुशबू इतनी लाजवाब है कि जिसने इसे एक बार चख लिया, वह इसका दीवाना हो गया. लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि देश का इतना बड़ा वीवीआईपी आम होने के बावजूद, हमारे देश के बहुत से लोग हैं जिन्होंने इसका स्वाद नहीं चखा. आइए जानते हैं इस शाही आम के दिलचस्प इतिहास, इसकी खासियत और इसके उत्पादन से जुड़ी कुछ अनोखी बातें.

क्या है जर्दालू आम का इतिहास? (History of Jardalu Mango)

जर्दालू आम की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है.  कहा जाता है कि करीब दो सौ साल पहले, बिहार के भागलपुर के पास मधुबन बाग में एक बगीचे के अंदर इस आम के पेड़ को सबसे पहले देखा गया था. इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि खड़गपुर हवेली के राजा रहमत अली खान ने जर्दालू आम का सबसे पहला पेड़ सन 1810 और 1820 के बीच लगाया था. इसे बीजू पौधे (गुठली) के जरिए विकसित किया गया था. आपको जानकर हैरानी होगी कि वह पहला पेड़ आज भी शान से खड़ा है और आज भी उसमें फल आते हैं. rishifromfarms नाम के इंस्टाग्राम पेज पर शेयर वीडियो में बताया गया है कि उसके दादा-परदादाओं ने साल 1965 में इसके पौधे लगाए थे, जिनकी उसी नस्ल (ब्लडलाइन) और खुशबू को आज की नई पीढ़ी के युवा किसान भी संभाल रहे हैं.

कहां होता है इसका उत्पादन?

जर्दालू आम बिहार के भागलपुर जिला और उसके आस-पास के इलाके में होता है. भागलपुर की गंगा नदी के किनारे वाली जो जलोढ़ मिट्टी है, वह इस आम के लिए खास है. इसी खास मिट्टी और मौसम की वजह से जर्दालू आम को उसका असली स्वाद और खुशबू मिलती है. भागलपुर के जर्दालू आम को इसकी खासियत की वजह से जीआई टैग (GI Tag Geographical Indication) भी मिला हुआ है, इसे 28 मार्च 2018 को (GI टैग) मिला था, जो यह साबित करता है कि यह दुनिया में अपनी तरह का इकलौता आम है. 

हर साल गर्मियों के सीजन में भागलपुर के चुनिंदा बगीचों से सबसे बेहतरीन जर्दालू आमों को तोड़कर, उन्हें खास तरीके से पैक किया जाता है. इसके बाद इन चुनिंदा आमों को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन भेजा जाता है. जहां राष्ट्रपति और देश के अन्य बड़े नेता इसके स्वाद का आनंद लेते हैं.

क्यों इतना खास है जर्दालू आम? (Specialties of Jardalu Mango)

जर्दालू आम कोई आम, आम नहीं है. यह न तो आपको आसानी से किसी सुपरमार्केट में मिलेगा और न ही यह कोल्ड स्टोरेज में हफ्तों तक दबाकर रखा जाने वाला फल है. यह पूरी तरह से असली, पारंपरिक और प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाला फल है. 

क्या है इस आम की खासियत- 

  • खुशबू- जर्दालू आम की सबसे बड़ी पहचान इसकी महक है. यह खुशबू इतनी तेज और सुहानी होती है कि फल को करीब से देखने से पहले ही उसकी महक आप तक पहुंच जाती है. पूरा बगीचा इसकी खुशबू से भरा रहता है.
  • रंग और स्वाद- पकने के बाद यह आम बेहद खूबसूरत हल्के पीले रंग का दिखाई देता है. इसका स्वाद न तो बहुत ज्यादा तीखा मीठा होता है और न ही फीका, बल्कि इसमें एक परफेक्ट खट्टा-मीठा स्वाद होता है. 
  • कम रेशा- इस आम में रेशा बहुत ही कम या न के बराबर होता है. 

जर्दालू आम खरीदने और खाने के लिए खास टिप्स- 

यदि आप भी इस बार गर्मियों में जर्दालू आम का असली स्वाद चखना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें-

असली पहचान- जर्दालू आम साइज में बहुत ज्यादा बड़े नहीं होते. इनका रंग नींबू जैसा हल्का पीला होता है. खरीदने से पहले इसे सूंघकर जरूर देखें, इसकी खास खुशबू ही इसकी असली पहचान है.

सीधे किसानों से खरीदें- यह आम कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखा जाता, इसलिए कोशिश करें कि इसे सीधे बिहार के प्रामाणिक आम उत्पादक किसानों या भरोसेमंद वेंडर्स से ऑनलाइन ऑर्डर करके ही मंगवाएं.

खाने का सही तरीका- जर्दालू आम को खाने से पहले कम से कम एक घंटे के लिए ठंडे पानी में डुबोकर रख दें. इससे आम की प्राकृतिक गर्मी निकल जाती है और इसका स्वाद बढ़ जाता है.

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