चाय हम भारतीयों के लिए चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं है बल्कि, एक इमोशन है. चाहे दफ्तर की थकान मिटानी हो, दोस्तों के साथ गपशप करनी हो या बारिश का मज़ा लेना हो एक कप गर्म चाय हर मौके को खास बना देती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस चाय को आप बड़े मजे से पी रहे हैं, क्या वह पूरी तरह से सुरक्षित है?
हाल ही में भारत की खाद्य सुरक्षा संस्था यानी FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने चाय प्रेमियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक बेहद अहम कदम उठाया है. FSSAI ने चाय की पत्तियों में कीटनाशकों (पेस्टिसाइड्स) के अवशेषों को लेकर नए वैज्ञानिक नियम और सीमा तय करने का प्रस्ताव रखा है.
◆ एफएसएसएआई ने चाय के लिए कीटनाशक अवशेषों की वैज्ञानिक आधार पर निर्धारित सीमाएँ प्रस्तावित कीं, उपभोक्ता सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की ◆ भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने चाय में एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड के लिए अधिकतम अवशेष सीमा प्रस्तावित करने वाले संशोधन का मसौदा अधिसूचित किया; हितधारकों से टिप्पणियाँ आमंत्रित कीं ◆ भारत ने चाय में एसिटामिप्रिड की अवशेष सीमा 20 पीपीएम प्रस्तावित की है, जो जापान में 30 पीपीएम और अमेरिका में 50 पीपीएम की संबंधित सीमाओं से कम है विवरणः https://t.co/aeF2fuIHC6 @MoHFW_INDIA
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) October 18, 2026
FSSAI के नए प्रस्ताव में क्या खास है?
FSSAI ने एक ड्राफ्ट संशोधन जारी किया है, जिसमें चाय में इस्तेमाल होने वाले दो प्रमुख कीटनाशकों एसिटामिप्रिड (Acetamiprid) और इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid) की अधिकतम अवशेष सीमा (MRL) तय करने की बात कही गई है. आसान शब्दों में कहें तो, अब चाय कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि चाय की पत्ती में इन रसायनों की मात्रा तय सीमा से अधिक न हो. इसके साथ ही FSSAI ने चाय उद्योग से जुड़े लोगों, विशेषज्ञों और आम जनता से इस प्रस्ताव पर उनकी राय मांगी हैं.
दुनिया के मुकाबले भारत का नया नियम कितना सख्त है?
सबसे अच्छी बात यह है कि भारत सरकार उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर दिख रही है. अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत ने चाय में एसिटामिप्रिड की अवशेष सीमा 20 PPM (पार्ट्स पर मिलियन) प्रस्तावित की है.
अगर इसकी तुलना बाकी देशों से करें तो-
जापान में यह सीमा 30 PPM है.
अमेरिका में यह सीमा 50 PPM तक है.
यानी भारत का प्रस्तावित नियम जापान और अमेरिका जैसे विकसित देशों के नियमों से भी ज्यादा सख्त है. इसका सीधा मतलब यह है कि हमारी प्लेटफॉर्म पर आने वाली चाय की पत्ती पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और शुद्ध होगी.
आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
चाय के बागानों में कीड़ों से फसल को बचाने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है. लेकिन अगर ये केमिकल चाय की पत्ती में ज्यादा मात्रा में रह जाएं, तो लंबे समय में यह हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं. FSSAI का यह नया कदम यह सुनिश्चित करेगा कि चाय के कप में केमिकल नहीं, सिर्फ स्वाद और ताजगी पहुंचे.
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