हमारे घरों में लगभग हर रोज खाने की थाली में रोटी जरूर शामिल की जाती है. लेकिन जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं, वे रोटी से दूरी बना लेते हैं. वहीं, सोशल मीडिया पर रोटी और दूसरे कार्बोहाइड्रेट्स को वजन बढ़ने की वजह बताकर उन्हें छोड़ने की सलाह दी जाती है. लेकिन हकीकत इतनी सीधी नहीं है.
इस बारे में नारायणा हॉस्पिटल की डायटेटिक्स एंड क्लिनिकल डायटीशियन सोनल भटनागर का कहना है कि हमें सबसे पहलेये समझना जरूरी है कि रोटी अपने आप में अनहेल्दी आहार नहीं है. गेहूं की रोटी कार्बोहाइड्रेट के साथ कुछ प्रोटीन, फाइबर और माइक्रोन्यूट्रीएंट्स भी देती है. WHO के मुताबिक, कार्बोहाइट्रेस शरीर के प्रमुख एनर्जी सोर्स हैं हेल्दी डाइट में इनका मुख्य स्रोत साबुत अनाज, सब्जियां, फल और दालें होनी चाहिए.
रोटी छोड़ने से वजन कम हो सकता है, लेकिन वजह क्या होगी?
अगर रोटी छोड़ने के बाद व्यक्ति की कुल कैलोरी इंटेक कम हो जाती है, तो वजन कम हो सकता है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि सिर्फ रोटी छोड़ने से शरीर की चर्बी अपने आप कम होने लगती है. अगर रोटी की जगह व्यक्ति चावल, मिठाई, नमकीन, तले हुए स्नैक्स या प्रोसेस्ड फूड्स ज्यादा खाने लगे, तो कैलोरी इनटेक कम होने के बजाय बढ़ भी सकती है.

कुछ लोगों को शुरुआती दिनों में वजन कम दिखाई दे सकता है. मुख्य रूप से अगर रोटी के साथ-साथ कुल कार्बोहाइट्रेट्स और कैलोरी इनटेक भी काफी घट जाए. इसमें शरीर के ग्लाइकोजेन स्टोर्स और उनसे जुड़े पानी में बदलाव भी योगदान दे सकते हैं. इसलिए शुरुआती वेट लॉस को सिर्फ फैट लॉस समझना सही नहीं होगा.
क्या रोटी छोड़ने से कमजोरी हो सकती है?
ये इस बात पर निर्भर करता है कि रोटी की जगह क्या खाया जा रहा है. अगर डाइट में पर्याप्त रूप से कैलोरी, प्रोटीन, सब्जियां, फ्रूट्स, फल, दालें और दूसरे न्यूट्रीएंट रिच कार्बोहाइट्रे सोर्स मौजूद हैं, तो सिर्फ रोटी न खाने से कमजोरी होना जरूरी नहीं है.
लेकिन अगर व्यक्ति रोटी हटाकर भोजन की मात्रा बहुत कम कर देता है या कार्बोहाइट्रेट को लगभग पूरी तरह बंद कर देता है, तो थकान, भूख, चक्कर या एक्सरसाइज परफॉर्मेंस में कमी जैसी समस्याएं कुछ लोगों में हो सकती हैं.
कब्ज का भी हो सकता है असर
रोटी छोड़ने से कब्ज तभी बढ़ सकती है जब इसके साथ फाइबर रिच फूड्स की कुल मात्रा कम हो जाए. WHO के मुताबिक, 10 साल से अधिक उम्र के लोगों को रोज कम से कम 25 ग्राम प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले फाइबर लेने का लक्ष्य रखना चाहिए. इनमें साबुत अनाज, हरी सब्जियां, फल और दालें प्रमुख सोर्स हैं.

क्या 30 दिनों तक रोटी छोड़ना जरूरी है?
इस बारे में डायटीशियन का कहना है कि ऐसा बिल्कुल भा नहीं है. वजन कंट्रोल करने या मेटाबॉलिक हेल्थ बेहतर करने के लिए हर व्यक्ति को रोटी छोड़ने की जरूरत नहीं होती. ज्यादा महत्वपूर्ण है कि पूरी डाइट कैसी है, कितनी कैलोरी ली जा रही हैं, रोटी किस आटे की है, उसके साथ क्या खाया जा रहा है, प्रोटीन और फाइबर पर्याप्त हैं या नहीं और व्यक्ति कितना फिजिकल एक्टिव है.
अगर वजन कम करना लक्ष्य है, तो रोटी की मात्रा और पूरे भोजन का बैलेंस व्यक्ति की जरूरत के अनुसार तय करना अधिक उचित है. साबुत गेहूं या अन्य साबुत अनाज विकल्पों को सब्जियों, दालों और पर्याप्त प्रोटीन के लेना एक बैलेंस अप्रॉच हो सकती है. WHO भी कार्बोहाइट्रेड की क्वालिटी पर जोर देता है न कि सभी कार्बोहाइट्रेड को पूरी तरह से हटाने पर.
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