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प्रयागराज का समोसा क्यों है इतना फेसम? क्या है सिग्नेचर डिश बनने कहानी, लोकल दुकानदार ने खोला स्वाद का असली राज

खुशबू, कुरकुरापन और मसालों का अनोखा मेल समोसे को खास बनाता है. प्रयागराज में समोसा को सिग्नेचर डिश घोषित किया गया है. लोकल वेंडर और ग्राहकों ने शहर में बनने वाले समोसे की खूब तारीफ की है.

प्रयागराज का समोसा क्यों है इतना फेसम? क्या है सिग्नेचर डिश बनने कहानी, लोकल दुकानदार ने खोला स्वाद का असली राज
प्रयागराज के समोसे को आधिकारिक सिग्नेचर डिश घोषित किया गया है. (AI Image)

संगम नगरी प्रयागराज, जो अब तक त्रिवेणी संगम और इलाहाबादी अमरूदों के लिए प्रसिद्ध रही है, अब अपने एक और खास स्वाद के कारण चर्चा में है. उत्तर प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट-वन क्यूजीन (ODOC) योजना के तहत प्रयागराज के समोसे को आधिकारिक सिग्नेचर डिश घोषित किया गया है. यह निर्णय न केवल इस शहर के स्वाद को नई पहचान देता है, बल्कि स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है. यहां का समोसा सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. इसकी खुशबू, कुरकुरापन और मसालों का अनोखा मेल इसे खास बनाता है. अब यह व्यंजन प्रयागराज की पहचान के रूप में देश और दुनिया में अपनी अलग जगह बनाने को तैयार है.

ODOC योजना और समोसे को मिली पहचान

उत्तर प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट-वन क्यूज़ीन (ODOC) योजना के तहत राज्य के 75 जिलों में प्रत्येक जिले के एक प्रमुख व्यंजन को चुना गया है. इसी योजना के अंतर्गत प्रयागराज से समोसा, प्रतापगढ़ से आंवला प्रोडक्ट्स, फतेहपुर से पेड़ा और कौशांबी से मूंग से बने व्यंजन को सिग्नेचर डिश के रूप में चयनित किया गया है.

यह कदम न केवल स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देगा, बल्कि छोटे व्यापारियों और फूड इंडस्ट्री को भी एक नई दिशा देगा. प्रयागराज में समोसे को आधिकारिक पहचान मिलने के बाद इसका ब्रांड वैल्यू और भी बढ़ने की संभावना है.

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दो तरह के समोसे, दोनों का अलग जलवा

प्रयागराज में मुख्य रूप से दो तरह के समोसे बेहद लोकप्रिय हैं, एक आलू का समोसा, जो मसालेदार आलू की भरावन से तैयार होता है, और हर गली-मोहल्ले में मिलता है. दूसरा सूखा मसाला समोसा. ये खास मसालों से बना होता है और कम नमी वाला और लंबे समय तक कुरकुरा रहने वाला होता है.

चौक के लोकनाथ इलाके में हरी नमकीन वाले के मसालेदार समोसे खासतौर पर मशहूर हैं. वहीं आलू वाले समोसे की मांग इतनी ज्यादा है कि सुबह से शाम तक हर दुकान पर इसकी बिक्री जारी रहती है..

प्रयागराज के ज्वाइंट कमिश्नर अजय चौरसिया ने बताया, कि अब प्रयागराज में समोसे को पहचान के रूप में जाना जाएगा. प्रयागराज मंडल में आने वाले अन्य तीन जिलों में भी अलग व्यंजनों को सिग्नेचर डिश के रूप में चुना गया है.

मेडिकल चौराहे पर दुकान चलाने वाले संजय यादव बताते हैं कि वे रोज 500 से ज्यादा समोसे बनाते हैं, और सभी तुरंत बिक जाते हैं. यह इस व्यंजन की लोकप्रियता का साफ संकेत है. आसपास रहने वाले छात्र और कर्मचारी उनके रोजाना के कस्टमर हैं.

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समोसे का इतिहास: फारस से भारत तक

समोसे का इतिहास काफी दिलचस्प है. माना जाता है कि इसकी जड़ें 10वीं शताब्दी के फारस से जुड़ी हैं. 13वीं-14वीं शताब्दी में व्यापारी और सूफी संत इसे भारत लेकर आए.

समय के साथ इसमें भारतीय मसालों का तड़का लगा और यह उत्तर भारत का प्रमुख नाश्ता बन गया. आज यह व्यंजन सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में पसंद किया जाता है.

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रोजगार और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा:

उद्योग विभाग के अनुसार प्रयागराज में 600 से ज्यादा निर्माण इकाइयां, 200 से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर्स, 200 से ज्यादा रेस्टोरेंट हैं समोसे के कारोबार से जुड़े हुए हैं. इस योजना के तहत इस उद्योग को संगठित रूप मिलने की उम्मीद है, जिससे 1000 से ज्यादा परिवारों को सीधा लाभ होगा. इसके संचालन के लिए 30 बड़े प्रतिष्ठानों की पहचान भी की जा चुकी है

समोसा और चाय का परफेक्ट कॉम्बिनेशन

स्थानीय लोगों का मानना है कि हल्की भूख के लिए समोसा और चाय सबसे अच्छा विकल्प है. यह न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि लंबे समय तक एनर्जी भी देता है.

लहसुन, धनिया और पुदीना जैसे खास मसालों से तैयार प्रयागराज का समोसा स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेहतर माना जाता है. खासकर छात्र और कामकाजी वर्ग के बीच इसकी लोकप्रियता सबसे ज्यादा है.

प्रयागराज का समोसा अब सिर्फ एक आम स्ट्रीट फूड नहीं रहा, बल्कि यह शहर की पहचान बन चुका है. ODOC योजना के तहत मिली इस मान्यता से न केवल समोसे का स्वाद दुनिया तक पहुंचेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक मजबूती के नए रास्ते भी खुलेंगे.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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