3 Signs Your Papaya Is Chemically Or Natural Ripened In Hindi: पपीता एक ऐसा फल है जिसे आमतौर पर ज्यादातर लोग खाना पसंद करते हैं. इसकी सबसे अच्छी बात ये है कि ये आसानी से आपको हर मौसम में मिल जाएगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस पपीते को आप सेहत के लिए सबसे अच्छा समझकर खरीद रहे हैं, वह कहीं आपकी सेहत बिगाड़ तो नहीं रहा? क्योंकि आजकल बाजार में हर चीज में मिलावट देखी जा रही है. कुछ दुकानदार फल जल्दी पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल कर करते हैं. ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि जो पपीता आप खरीद रहे हैं, वह नेचुरली पका है या फिर केमिकल से. आइए जानते हैं कुछ आसान ट्रिक.
मीठा और नेचुरल पपीता चुनने के आसान तरीके-
1. रंग और छिलके-
नेचुरली पका हुआ पपीता कभी भी एक ही रंग का नहीं होता. उसके छिलके पर पीले और हल्के हरे रंग के शेड्स या थोड़े बहुत धब्बे जरूर नजर आएंगे. अगर पपीता एकदम मक्खन जैसा चमकदार, एक जैसी यूनिफॉर्म पीले या नारंगी रंग का दिख रहा है, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है. ऐसे पपीतों को अक्सर केमिकल से पकाया जाता है. इसके अलावा, नेचुरल पपीते का छिलका हल्का सा दबाने पर अंदर की तरफ पिलपिला महसूस होता है, जबकि केमिकल वाला फल बाहर से सख्त और अंदर से अजीब सा निकल सकता है.
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2. खुशबू-
कुदरती तरीके से पके हुए पपीते की एक बहुत ही मीठी और सोंधी सी खुशबू होती है, जो दूर से ही महकने लगती है. अगर आप पपीते को सूंघकर देखें और उसमें से किसी केमिकल, दवा या मिट्टी जैसी अजीब सी बदबू आए, तो उसे बिल्कुल न खरीदें.
3. काट कर देखें-
कई बार हम पपीता बाहर से देखकर ले आते हैं, लेकिन काटने पर असलियत सामने आती है. जब आप नेचुरल पपीते को काटेंगे, तो वह अंदर से पूरी तरह से पका हुआ, गहरे नारंगी या लाल रंग का होगा और उसके बीज बिल्कुल काले और सूखे होंगे. इसके उलट, अगर पपीता बाहर से पीला है लेकिन अंदर से सफेद, कच्चा और उसके बीज सफेद या हल्के भूरे रंग के हैं, तो समझ लीजिए कि उसे जबरदस्ती केमिकल से पकाया गया है.
पपीता खरीदते और खाते वक्त इन बातों का रखें ध्यान-
- वजन चेक करें- हमेशा भारी और थोड़ा सा मुलायम पपीता चुनें. हल्का पपीता अंदर से सूखा या खराब निकल सकता है.
- साफ पानी से धोएं- घर लाने के बाद पपीते को हमेशा बहते हुए साफ पानी से अच्छी तरह धोएं और उसके बाद ही काटें.
- कटे हुए से बचें- बाजार में कटे-रखे पपीते खरीदने से बचें, क्योंकि उन पर मक्खियां बैठती हैं और धूल-मिट्टी चिपकती है, जो पेट खराब कर सकती है.
क्यों खतरनाक होते हैं केमिकल से पकाए गए फल?
बाजार में मांग पूरी करने के लिए कई बार व्यापारी कच्चे हरे पपीतों पर कैल्शियम कार्बाइड या एथिलीन जैसे रसायनों का इस्तेमाल करते हैं. ये केमिकल्स इतनी तेजी से फल को पीला कर देते हैं कि वह बाहर से तो पका हुआ नजर आता है, लेकिन अंदर से कच्चा और बेस्वाद रहता है. इस तरह के केमिकल वाले फल खाने से पेट दर्द, उल्टी, चक्कर आना और लंबे समय में लिवर-किडनी जैसी गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है.
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