क्या आप भी अक्सर पेट दर्द, गैस या बदहजमी से परेशान रहते हैं, तो यह आर्टिकल खास आपके लिए है. आज हम आपको एक ऐसे पहाड़ी पौधे के बारे में बताने जा रहे हैं, जो किसी दवा से कम नहीं है. जी हां, हम बात कर रहे हैं हिमालय की गोद में मिलने वाले चोरू पौधे की. पहाड़ों में इसे सिर्फ एक जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि जीवन का अहम हिस्सा माना जाता है. आइए जानते हैं कि यह किन लोगों के लिए वरदान से कम नहीं है और इसे कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है.
चोरू क्या है और कहां मिलता है?
चोरू एक ऐसा पहाड़ी पौधा है, जो हिमालय के ऊंचे इलाकों में लगभग 2000 मीटर से भी ज्यादा की ऊंचाई पर उगता है. इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी जड़, पत्तियां और फूल तीनों ही बहुत काम के हैं. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग, जैसे भोटिया, मारछा और बोक्सा जनजाति के समुदाय, इसकी खेती भी करते हैं. लोग इसकी जड़ों को सुखाकर मसाले की तरह इस्तेमाल करते हैं.
चोरू की जड़ से लेकर फूल तक सब कुछ है फायदेमंद-
- जड़- इसे सुखाकर मसाले और औषधि दोनों रूपों में उपयोग किया जा सकता है.
- पत्तियां- इनसे स्वादिष्ट और गुणकारी काढ़ा तैयार किया जाता है.
- फूल- यह शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने में मददगार है.
कैसे करें डाइट में शामिल-
- मसाले- चोरू की सूखी हुई जड़ को पीसकर पाउडर बना लें और दाल या सब्जी में एक मसाले की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे खाने का स्वाद भी बढ़ेगा और पेट भी ठीक रहेगा.
- काढ़ा बनाकर- यदि सर्दी-जुकाम या पाचन की हल्की समस्या है, तो इसकी पत्तियों और फूलों का हल्का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं.
- पारंपरिक लेप- पेट में गैस या मरोड़ होने पर इसके पाउडर का लेप बनाकर नाभि के आसपास लगाया जा सकता है.

पेट के लिए किसी वरदान से कम नहीं है चोरू-
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पेट से जुड़ी शायद ही कोई ऐसी समस्या हो जिसमें चोरू काम न आता हो. चोरू की जड़ों में कार्बोनेटिक, एंटीहेलमेंथिक (कीड़े मारने वाले), एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं.
- पेट दर्द और मरोड़- अगर पेट में ऐंठन या मरोड़ हो रही है, तो चोरू का लेप राहत दे सकता है.
- अपच और गैस- इसे जीरा और हींग के साथ मिलाकर खाने से पाचन तंत्र दुरुस्त हो सकता है.
- पेट के कीड़े- इसकी एंटीहेलमेंथिक खूबी पेट के हानिकारक कीड़ों को खत्म करने में मदद कर सकती है.
- दस्त और पेट खराब- यह आंतों को मजबूत बनाता है और संक्रमण से बचाता है.
- सिर्फ पेट ही नहीं, पहाड़ों में सर्दी-जुकाम जैसी छोटी-मोटी दिक्कतों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
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